आवर्त सारणी [Periodic Table] in Hindi

आधुनिक आवर्त सारणी (मौजले की आवर्त सारणी)-

यह आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक z पर आधारित हैं|

इनके अनुसार सभी तत्वों के भौतिक व रासायनिक गुणधर्म परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं|अर्थात तत्वों को यदि उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया जाए तो एक निश्चित समय अंतराल पश्चात समान गुण वाले तत्वों की पुनरावृति होती है|इसे ही मौजले का आवर्त नियम कहा गया|

आधुनिक आवर्त सारणी आफबाहु सिद्धांत का ग्राफीय निरूपण हैं|आधुनिक आवर्त सारणी का दीर्घ रूप बोर-बरी नामक वैज्ञानिको ने प्रतिपादित किया|

आधुनिक आवर्त सारणी में 18 वर्ग तथा 7 आवर्त बनाए गए|

इन सातो आवर्तो को नाम प्रदान किया गया|

क्रम संख्या आवर्त का नाम कहां से कहां तक तत्वों की संख्या
1 अति लघु आवर्त Z=1 ,H Z=2 ,He 2
2 लघु आवर्त Z=3 ,Li Z=10,Ne 8
3 लघु आवर्त Z=11,Na Z=18,Ar 8
4 दीर्घ आवर्त Z=19,K Z=36,Kr 18
5 दीर्घ आवर्त Z=37,Rb Z=54,Xe 18
6 अति दीर्घ आवर्त Z=55,Cs Z=86,Rn 32
7 अपूर्ण आवर्त Z=87,Fr Z=115,Uup 29

नोट-

यदि आवर्त सारणी में 112 तत्व माने जाए तो 7 वे आवर्त में कुल 26 तत्व उपस्थित होते है|

आवर्त सारणी में सबसे बड़ा वर्ग =3rd B, 32 तत्व |

जबकि सबसे बड़ा आवर्त 6 है जिसमे 32 तत्व पाये जाते हैं|

लैंथेनाईड तत्व 6ठे आवर्त में पाये जाते हैं|जबकि एक्टिंनाइड तत्व 7वे आवर्त में पाये जाते हैं|

आधुनिक वर्गीकरण:

प्रकृति में उपस्थित सभी तत्वों को आधुनिक समय में इलेक्ट्रोनिक विन्यास के आधार पर 4 खंडो में विभाजित किया गया है|अर्थात किसी तत्व का अंतिम इलेक्ट्रोन जिस कक्षक में भरा जाता है उसे उसी खंड में रखा गया हैं|

  1.  S खंड (14 तत्व)
  2. P खंड(33तत्व)
  3. Dखंड(40तत्व)
  4. F खंड(28तत्व)

S खंड के तत्व –

इस खंड में वे तत्व रखे गये है जिनका अंतिम इलेक्ट्रोन S उपकोश में भरा जाता हैं|

इस खंड में कुल 14 तत्व हैं|जिन्हें क्रमश:1-A(1) वर्ग व 2-A(2)वर्ग में रखा गया हैं|

इन्हें क्रमश क्षारीय धातु व क्षारीय मृदा धातु कहते हैं|

आवर्त सारणी में इस खंड के तत्वों को बाई तरफ रखा गया हैं|

1-A

H   2-A             [He] 1s2

Li          Be

Na       Mg

K        Ca

Rb     Sr

Cs     Ba

Fr     Ra

नोट-

  1. इस खंड में दो अधात्विक तत्व [H &He] व शेष 12 तत्व धातुएं हैं|
  2. तत्व गैसीय अवस्था [H &He] तथा 2 तत्व [Cs &Fr]द्रव अवस्था में तथा शेष 10 तत्व ठोस अवस्था में पाए जाते हैं|
  3. दो तत्व रेडियोसक्रिय अवस्था [Fr &Ra] में पाए जाते हैं|
  4. इस खंड के तत्वों की वैद्युत संयोजकता [आक्सीकरण अंक]व इलेक्ट्रोनिक विन्यास क्रमश:+1,+2तथा ns1 ,ns2 पाए जाते हैं|
  5. Li,Na,K ऐसी धातुएं है जिनको चाक़ू की सहायता से काटा जा सकता है|
  6. Na को केरोसीन में रखा जाता है क्योंकि वह जल से क्रिया कर लेता हैं|
  7. Li,K को माँ के अंतर्गत लपेट कर रखा जाता हैं क्योंकि ये धातुएं वायु व जल दोनों से क्रिया कर लेती हैं|
  8. Cs &Gs ऐई धातुएं हैं मुट्ठी में रखने पर वाष्पशील अवस्था में आ जाती हैं|
  9. आतिशबाजी के दौरान पटाखों की रोशनी में ईट जैसा लाल रंग स्ट्रांशियम तत्व के कारण व सेब जैसा हरा रंग बेरियम के कारण आता हैं|
  10. विद्युत बल्बों में फिलामेंट टंगस्टन धातु का बना होता है जबकि फ्लैश बल्बों में [जीरो वाट]में फिलामेंट मैग्नीशियम धातु का बना होता हैं|
  11. प्रकाश वैधुत सेलो में सीजियम धातु का उपयोग किया जाता हैं|
  12. सर्वाधिक प्रबल अपचायक धातु लिथियम को माना जाता हैं|जबकि सबसे बड़ा आकार s खंड में सीजियम का होता हैं|
  13. सबसे छोटा आकार s खंड में हाइड्रोजन[H] का होता है|जबकि सबसे छोटा आकार धातुओं में लिथियम [Li] का होता हैं|
  14. Ca तत्व सर्वाधिक मात्रा में दूध व अंकुरित अनाजों में पाया जाता हैं|
  15. इस खंड के तत्वों का आयनन विभन न्यूनतम होता हैं|
  16. इसके अतिरिक्त विद्युत् ऋणता व इलेक्ट्रोन बन्धुता के मान भी न्यूनतम होते हैं|

P खंड के तत्व-

इस खंड के अंतर्गत वे तत्व रखे गये है जिनका अंतिम इलेक्ट्रानिक विन्यास P उपकोश में भरा जाता हैं|

P उपकोश में अधिकतम 6 इलेक्ट्रोन आ सकते हैं|

इस खंड के तत्वों को 6 वर्गो में विभाजित किया गया हैं|

इस खंड में तीनो प्रकार के [धातु,अधातु,उपधातु]तत्व रखे गये हैं|इन तत्वों की संख्या 33 मानी गई हैं|

इस खंड के तत्व परिवर्तनशील वैद्युत संयोजकता प्रदर्शित करते हैं|

भिखारी तत्व :वर्ग 13 {3rd  A}:-

Z=5[B]                       धातु=4 ,उपधातु=1[B],अधातु=0

Z=13[Al]

Z=31[Ga]

Z=49[In]

Z=81[Tl

नोट;

Ga तत्व द्रव अवस्था में पाया जाता हैं|शेष तत्व ठोस अवस्था में पाये जाते हैं|

Al को भविष्य की धातु कहा जाता है तथा पृथ्वी की भूपर्पटी में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली धातु हैं|

कार्बन परिवार के तत्व [वर्ग14,4th A]

Z= 6 C             धातु =3,उपधातु =1 ,अधातु =1

Z=14Si

Z=32Ge

Z=50 Sn

Z=82 Pb

कार्बन तत्व को सामान्य तत्व के नाम से जाना जाता हैं|

प्रकृति में सर्वाधिक मात्रा में यौगिक केवल दो तत्वों कार्बन व हाइड्रोजन के पाये जाते हैं|

सीसा,मर्करी दो ऐसी धातु है जो विद्युत् की कुचालक पाई जाती है जबकि पारा धातु ताप की सर्वश्रेष्ठ सुचालक पाई जाती हैं|

कार्बन ग्रेफाईट नामक अधातु विद्युत् की सुचालक पाई जाती है|

इस खंड की धातुएं (4th A)मिश्र धातुओं का निर्माण करने में प्रयुक्त होती हैं|

सिलिकन नामक उपधातु का प्रयोग कम्प्यूटर चिप का निर्माण करने में किया जाता हैं|

 N(5th –A) परिवार के तत्व [15]:

इस परिवार के तत्वों को निकोजन परिवार के तत्व कहा जाता हैं|

Z=7    -N        धातु-2 ,उपधातु =1 ,अधातु=2

Z=15-P

Z=33-As

Z=51-Sb

Z=83-Bi

नोट:

1.वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में नाइट्रोजन तत्व उपस्थित पाया जाता हैं|

2.भूमि में सामान्यत: तीन तत्वों की (N,P,K) की कमी पाई जाती हैं|

3.पेड़-पौधों को नाइट्रोजन तत्व सर्वाधिक मात्रा में वायुमंडलीय नाइट्रोजन से प्राप्त होता हैं|

4.वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट आयन में परिवर्तित करने का कार्य दलहनी पादपो की जडो में उपस्थित ग्रंथियों में पाये जाने वाले राइजोबियम ,एजोतोबेक्टर आदि जीवाणुओं के द्वारा किया जाता हैं|इस प्रक्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण/यौगिकीकरण कहते हैं|

5.पेड़-पौधे नाइट्रोजन तत्व को नाइट्रेट आयन के रूप में प्रयोग करते हैं|

6.कीट भक्षी पादपों में (ड्रोसेरा,युट्रीकुलेरिया,युक्का) नाइट्रोजन तत्व की कमी पाई जाती हैं|जिसे ये कीटो का भक्षण कर पूरा करते हैं|

फास्फोरस तत्व के 4 अपररूप पाये जाते हैं|

  • लाल फास्फोरस-दियासलाई का निर्माण करने में,मसाला बनाने में किया जाता हैं|सर्वाधिक स्थाई भी यही हैं|
  • काला फास्फोरस-यह अर्द्ध चालक प्रकृति दर्शाता है|
  • पीला फास्फोरस-यह सर्वाधिक क्रियाशील पाया जाता हैं|इसलिए इसे जल में डुबोकर रखा जाता हैं|
  • सफेद फास्फोरस-प्रकृति में सबसे न्यूनतम मात्रा में पाया जाता हैं|

आक्सीजन परिवार के तत्व (16)[6th –A]

इस वर्ग के तत्वों को चाल्कोजन व पिकोजन परिवार के तत्व कहा जाता हैं|

Z=8- O            धातु-1 ,उपधातु-1,अधातु-3 (O, S, Se

Z=16-S

Z=34-Se

Z=52-Te

Z=84-Po

1.पृथ्वी की भू-पर्पटी व मनुष्य के शरीर में सर्वाधिक मात्रा में आक्सीजन तत्व उपस्थित पाया जाता हैं|

  1. आक्सीजन की खोज प्रीस्तले नामक वैज्ञानिक ने की तथा यह पदार्थो को जलाने में सहायक हैं|इसलिए इसे पोषक गैस कहते हैं|

3.जबकि स्वयं ज्वलनशील गैस हाइड्रोजन को मानते हैं|

4.हाइड्रोजन को खोज कैवेंडिश ने की थी|तथा ज्वलनशील गैस कहा,हाइड्रोजन नाम लैवाशिये ने दिया|

5.मधुमक्खी पालन की क्रिया में शहद प्राप्त करते समय व्यक्ति अपने शरीरपर गंधक या सल्फर का लेप करता हैं|

6.प्रकृति में सर्वाधिक समस्थानिक पोलोनियम के 27 पाये जाते हैं|

हैलोजन परिवार के तत्व [7th-A (17)]

Z=9 -F

Z=17 -Cl

Z=35 -Br

Z=53 -I

Z=85 –At

1.फ़्लोरिन तत्व को कपटी तत्व या काला भेडिया भी कहा जाता है|क्योंकि इसकी विद्युत् ऋणता आवर्त सारणी में सर्वाधिक (4.0)पाई जाती हैं|

2.क्लोरिन गैस का उपयोग जल के शुद्धिकरण में तथा पुष्पों का रंग उड़ाने में किया जाता हैं|

3.आयोडीन तत्व वाष्पशील अधात्विक तत्व हैं|इस तत्व की सर्वाधिक मात्रा समुंद्री शैवाल (लैमिनेरिया) से प्राप्त होती हैं|

शून्य वर्ग के तत्व (18)-

Z=2 -He

Z=10 -Ne

Z=18 –Ar

Z=36 -Kr

Z=54 -Xe

Z=86 –Rn

1.वायुमंडल में केवल 5 अक्रीय गैस उपस्थित पाई जाती हैं|रेडान अनुपस्थित होती हैं|

2.रेडान का निर्माण कृत्रिम विधियों के द्वारा रेडियम तत्व से एल्फा कण के उत्सर्जन के द्वारा होता हैं|

3.वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में अक्रीय गैसों में आर्गन (0.003%)पाई जाती हैं|

  1. अक्रीय गैसों में केवल वांडर वाल त्रिज्याएँ उपस्थित पाई जाती हैं|जिनका मान इनकी वास्तविक परमाण्विक त्रिज्या के बराबर पाया जाता हैं|
  2. केवल अक्रीय गैसे प्रकृति में एकल परमाण्विक अवस्था में पाई जाती हैं|क्योंकि इनका अष्टक पूर्ण पाया जाता हैं|जिसके कारण ये सर्वाधिक स्थाई होती हैं|

6.इनका आयनन विभव सर्वाधिक (हीलियम का सर्वाधिक)पाया जाता हैं|जबकि विद्युत् ऋणता,इलेक्ट्रोन बन्धुता व संयोजकता के मान शून्य पाये जाते हैं|

अक्रीय गैसों के उपयोग:-

  1. हीलियम के उपयोग-
  • वायुयान के टायरों में
  • गुब्बारों को भरने में
  • कृत्रिम श्वसन के दौरान (आक्सीजन 30%+हीलियम 20%)गैसों का मिश्रण काम में लिया जाता हैं|
  • इस मिश्रण में हीलियम गैस तनुकारी की तरह कार्य करती हैं|

 

2. नियाँन के उपयोग-

  • फ्लैश बल्बों व विज्ञापन बोर्डो में
  • वायुयानों को हवाई अड्डो पर उतरते समय होम सिग्नल के रूप में
  • समुंद्री जहाजो व पनडुब्बियो को होम सिग्नल देने हेतु फास्फींन गैस का उपयोग किया जाता हैं|
3.आर्गन के उपयोग-
  • विद्युत बल्बों में नाइट्रोजन व आर्गन का मिश्रण भरा होता हैं|
  • ट्यूबलाइटो में पारे की वाष्प व आर्गन का मिश्रण भरा होता हैं|
  1. जिनाँन के उपयोग-
  • इसको स्ट्रेंजर गैस के नाम से जाना जाता हैं|
  • यही एक ऐसी गैस है जो आक्सीजन व फ़्लोरिन तत्वों के साथ क्रिया करके योगिको का निर्माण करती हैं|अर्तात प्रकृति में सर्वाधिक योगिक अक्रीय गैसों में जिनाँन के ही पाये जाते हैं|
  • रेडान अक्रीय गैस रेडियो सक्रिय प्रकृति की पाई जाती हैं इसलिए इसका उपयोग चिकित्सालय में चिकित्सा कर्म में किया जाता हैं|

D खंड के तत्व :-

  • इस खंड में वे तत्व रखे गये है जिनका अंतिम इलेक्ट्रोन d उपकोश में प्रवेश करता हैं|
  • इस खंड में उपस्थित 40 तत्वों को 10 वर्गो तथा 4 आवर्तो में विभाजित किया गया हैं|
वर्ग →

आवर्त ↓

3rd B

(3)

4th B

(4)

5th B

(5)

6th B

(6)

7th B

(7)

8th

(8,9,10)

1st B

(11)

2nd

(12)

4 Sc 21 Ti 22 V 23 Cr 24 Mn 25 Fe26,Co27,Ni28 Cu 29 Zn 30
5 Y 39 Zr 40 Nd 41 Mo 42 Tc 43 Ru44,Rh45,Pd46 Ag 47 Cd 48
6 La 57 Hf 72 Ta 73 W 74 Re 75 Os76,Ir77,Pt78 Au 79 Hg 80
7 Ac 89 Unq 104 Unp 105 Unh 106 Uns 107 Uno108,Une109,Uun110 Uuu 111 Uub 112

नोट

  • सबसे भारी धातु आस्मियम इस श्रेणी में रखी गई है|जबकि सर्वाधिक गलनांक टंगस्टन (3400)का पाया जाता है|
  • प्रथम मानव निर्मित तत्व टेक्निशियम इस श्रेणी में पाया जाता हैं|
  • सर्वाधिक तनन सामर्थ्य गोल्ड की जो इस श्रेणी में पाया जाता हैं|
  • सर्वाधिक चालक धातु सिल्वर जो इस श्रेणी में पाया जाता हैं|
  • सर्वाधिक वैद्युत संयोजकता आस्मियम की +8 इस श्रेणी में पाया जाता हैं|
  • लैंथेनम व एक्टिनम इस श्रेणी में पाया जाता हैं|
  • जिंक,कैडमियम,पारा वाष्पशील धातुएं कहलाती है जो इस श्रेणी में पायी जाती हैं|
  • कॉपर,सिल्वर,गोल्ड जो सिक्का धातुएं कहलाती है इस श्रेणी में पायी जाती हैं|

संक्रमण तत्व:-

  • d खंड के तत्व जिनमे किसी भी अवस्था में(आद्य या आयनिक अवस्था ) d उपकोश अपूर्ण पाया जाता हैं संक्रमण तत्व कहलाते हैं|
  • अत: संक्रमण तत्वो की संख्या 36 मानी गई हैं|
  • जिंक(30),कैडमियम(48),पारा(80) व Uub(112)तत्वों को संक्रमण तत्व नही माना जाता हैं|
  • इस खंड के अधिकतर यौगिक युग्मित इलेक्ट्रोन की उपस्थिति के कारण रंगीन व अनुचुम्बकीय पाये जाते हैं|
  • परिवर्तनशील संयोजकता प्रदर्शित करना इस खंड के तत्वों का विशिष्ट गुण हैं|
  • इस खंड के अधिकतर तत्व द्रव व ठोस अवस्था में पाये जाते हैं|

F खंड के तत्व:-

  • इस खंड के अंतर्गत वे तत्व आते है जिनका अंतिम इलेक्ट्रान f उपकोश में प्रवेश करता हैं|
  • इस खंड के अंतर्गत कुल 28तत्व की दो श्रेणियां है जिन्हें लैंथेनाइड व एक्टिनाइड श्रेणी के नाम से जाना जाता हैं|

लैंथेनाइड श्रेणी [4f श्रेणी]

  • इस श्रेणी में सीरियम (58) से लेकर ल्युतेशियम (91) तक के 14 तत्व रखे गये हैं|
  • इस श्रेणी के सभी तत्वों को भारी धातुएं व दुर्लभ मृदा धातुएं कहा जाता हैं|

एक्टिनाइड श्रेणी[5f श्रेणी]

  • इस श्रेणी में थोरियम (90) से लारेंशियम(103) तक के 14 तत्व रखे गये हैं|इन्हें रेडियोसक्रिय तत्व कहा जाता हैं|
  • इस श्रेणी के तत्वों को आवर्त सारणी में अलग स्थान प्रदान किया गया हैं|
  • इस खंड के अधिकतर तत्व मिश्र धातुओं का निर्माण करते हैं|तथा इन मिश्र धातुओं को मिश धातु कहा जाता हैं|
  • इस खंड के अधिकतर तत्वों की आक्सीकरण अवस्था +3 पाई जाती हैं|
  • इस खंड के सभी तत्व ठोस अवस्था में पाये जाते हैं|