Psychology Diseases

मन के रोग
1 बाइपोलर डिसऑर्डर
बाइपोलर डिसऑर्डर जिसमें दो मानसिक रोगों का मेल दिखाई देता है।
1 अवसाद और 2 उन्माद (मोनिया)
जब एक ही व्यक्ति में ये दोनों अवस्थाएं बारी बारी से दौरे के रूप में दिखाई देती है तो उसे बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त बताया जाता है।
जीवन में घनघोर निराशा, हीन भावना, पछतावा, भविष्य की चिंता, आत्महत्या का विचार, एकाग्रता और स्मरण शक्ति में कमी तथा हमेशा एकांत में बैठने का प्रयास करना अवसाद के सामान्य लक्ष्ण है। इसके साथ कुछ शारीरिक लक्ष्ण भी पनप सकते हैं, जैसे थकावट, बेचैनी, अनिद्रा, भूख ना लगना, कब्ज, नपुसंकता और महिलाओं में मासिक धर्म में विकार आदि।
उन्माद की अवस्था में रोगी बहुत ज्यादा खुश, उत्तेजित या उल्लासित महसूस करता है। वह सामान्य से ज्यादा सक्रिय हो जाता है और बहुत ज्यादा पैसे खर्च करना या किसी अन्य तरीके से खुशी का इजहार करने लगता है। इसे मूड एपिसोड्स या मूड स्विंग्स भी कहा जाता है। 35 से 60 आयु वर्ग में व्यक्ति इससे सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।

2 शीजोफ्रेनिया
शीजोफ्रेनिया जिसमें रोगी का व्यवहार बिल्कुल बदल जाता है। वह अक्सर झक्की, सनकी और बेमतलब का अनुचित व्यवहार करने लगता है। रोगी द्वारा गुस्सा, गाली-गलौच, मारपीट या तोड-फोड भी देखने को मिलती है। उसकी दिनचर्या बिल्कुल गडबड हो जाती है और वह अकसर धर्म, दर्शन, विज्ञान की बातें बिना किसी मतलब या संदर्भ के करने लगता है। रोगी वास्तविकता से दूर चला जाता है और अपनी बनायी एक काल्पनिक दुनिया में रहने लगता है।

3 ओसीडी ( ओब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर )
ओसीडी एक ऐसा मानसिक रोग है, जिसमें व्यक्ति किसी सामान्य प्रक्रिया को बार-बार दोहराने के लिए विवश हो जाता है और यह एक रोग के रूप में दिखाई देने लगता है।
ऐसे रोगी बार-बार हाथ धोते हैं, पैसे गिनते हैं, बंद ताले या दरवाजे की जांच करते रहते हैं, अपने लिखे को किसी गलती की आशंका से बार-बार देखते रहते हैं और कई बार किसी अनजाने डर के साये में जीते हैं।
अधिकांश मामलों में यह रोग किसी मनोवैज्ञानिक डर से उत्पन्न होता है, परंतु कभी कभी यह अनुवांशिक कारणों से भी प्रकट होता है।

4 फोबिया
फोबिया ओसीडी से मिलता-जुलता रोग है, जिसमें व्यक्ति किसी भय से स्थायी रूप से पीडित हो जाता है।
ऐसे कुछ सामान्य भय हैं- बंद कमरे, गुफा या लिफ्ट का भय, रोगों का भय, भीड वाले स्थानों का भय, सामाजिक स्थितियों का भय आदि।
फोबिया की मुख्य वजह मन में दबी किसी उलझन या पूर्व-अनुभव को बताया जाता है।

5 डीलीरियम ( उन्मत्त प्रलाप)
डीलीरियम एक ऐसा मनोरोग है, जिसमें व्यक्ति बहका- बहका लगने लगता है। वह समय, स्थान या व्यक्तियों को गलत पहचानने लगता है। यह रोग अस्थायी प्रकृति का होता है।

6 डिमेंशिया (स्मृति रोग)
डिमेंशिया में याददाश्त के अलावा मन की अन्य शक्तियां जैसे एकाग्रता, चिंतन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडता है।
आमतौर पर यह रोग बुढापे में सताता है, परंतु यह 18 से 65 वर्ष के आयु वर्ग में भी देखा जाता है।

7 तनाव (Tension)
जब व्यक्ति समय, परिस्थिति तथा आवश्यकतानुसार कार्य नहीं कर पाता है तथा असफल हो जाता है तो वह तनाव का शिकार हो जाता है।

8 दबाव (Stress)
जब व्यक्ति सफलता-असफलता के बीच अपने आत्म सम्मान एवं आत्मप्रतिष्ठा की रक्षा के लिए संघर्षरत होता है तो वह दबाव का शिकार हो जाता है।

9 दुश्चिंता (Anxiety)
जब व्यक्ति के अचेतन मन में दमित इच्छा चेतन मन में आकर उसे परेशान करने लगे तो व्यक्ति दुश्चिंता का शिकार हो जाता है।

10 भग्नाशा/कुण्ठा (Frustration)
बार-बार कोशिश करने के बाद भी जब व्यक्ति को सफलता की प्राप्ति नहीं होती है तो व्यक्ति अपने आप में विश्वास खो बैठता है, निराश हो जाता है। इसी निराशा की स्थिति को भग्नाशा या कुण्ठा कहते हैं।

11 संघर्ष/अन्तःद्वंद्व (Conflict)
जब व्यक्ति के समक्ष दो अवसर उपस्थित हों एवं चयन किसी एक का करना हो तो व्यक्ति अन्तःद्वंद्व का शिकार हो जाता है।