शिक्षक दिवस: श्री राधा कृष्णन जी का परिचय

*🥀🍃🥀​डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण🥀🍃🥀*

*📍जन्म-*5 सितंबर 1888
*📍पिता का नाम-*वीरास्वामी
*📍माता का नाम-*सीताम्मा
*📍प्रारंभिक शिक्षा-*क्रिश्चन मिशनरी संस्था नॉर्थन मिशन स्कूल तिरुपति
*📍मैट्रिक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण-*1902 में
*📍विषय में विशेष योग्यता-* मनोविज्ञान ,इतिहास और गणित
*📍राधाकृष्णन ने m.a. पास किया-*दर्शनशास्त्र विषय में
*📍दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक-*मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में 1916
*📍दर्शनशास्त्र से परिचय-* राधाकृष्ण के लेख और भाषण के माध्यम से
*📍मानक उपाधियां-*यूरोप और अमेरिका प्रवास के बाद
*📍पंडित जवाहरलाल नेहरू से प्रथम मुलाकात-*1928 में शीत ऋतु में (कोलकाता अधिवेशन के दौरान)
*📍मानचेस्टर विश्वविद्यालय द्वारा आमंत्रण-*व्याख्यान हेतु 1929 में
*📍आंध्र विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर-*1931 से 36 तक
*📍ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक-*1936 से 1952 तक
*📍जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में कार्य-*कोलकाता विश्वविद्यालय 1935 से 1941 तक
*📍1939 से 48 तक-*काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चांसलर
*📍यूनेस्को में उपस्थिति-*1946 में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में
*📍संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य-*1947 से 49 तक
*📍राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना-*1952 में सोवियत संघ से आने के बाद
उप राष्ट्रपति के रूप में
*📍राधाकृष्णन का पदभार-*राज्य सभा में अध्यक्ष
*📍शिक्षक दिवस-*श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित करना
*📍शिक्षक दिवस-*सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्मदिन अर्थात 5 सितंबर को
*📍ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा सर की उपाधि-*1931 में
*📍भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित-*1954 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा
*📍भारत रत्न पुरस्कार-*दार्शनिक व शैक्षिक उपलब्धियों के लिए
*📍लगातार पांच सालो तक नोमिनेट हुए-*नोबेल पुरस्कार के लिए
*📍राधा कृष्ण का व्यक्तित्व-* महान शिक्षाविद ,महान दार्शनिक, महान वक्ता ,विचारक भारतीय संस्कृति के,वैज्ञानिक डॉक्टर
*📍विशेष उपलब्धि-*भारत को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाना
*📍विशेष  रूचि-*अच्छी किताब पढ़ने की
*📍महात्मा गांधी से मुलाकात-*1915 में
*📍रविंद्रनाथ टैगोर से मुलाकात-*1918 में मैसूर में
*📍”रविंद्र नाथ टैगोर का दर्शन” शिर्षक पुस्तक-*डॉक्टर राधाकृष्णन द्वारा 1918 में प्रकाशित
*📍अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान-*”द रीन ऑफ रिलीजन  इन कंटेंपरेरी फिलॉस्फी पुस्तक से
*📍सोवियत संघ के विशिष्ट राजदूत-*सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन 1952
*📍उपराष्ट्रपति पद पर नियुक्त-*13मई1952 से 12मई 1962
*📍राष्ट्रपति पद पर  निर्वाचित-*13मई 1962 में राजेंद्र प्रसाद के बाद(13मई1967)
*📍डॉक्टर सर्वपल्ली राष्ट्रपति पद पर ताजपोशी-*13 मई 1962 को 31 तोपों की सलामी के साथ
*📍डॉक्टर राधाकृष्णन का पहनावा-*सफेद कपड़े और दक्षिण भारतीय पगड़ी
*📍नाईट बेचलर की उपाधि लौटाई-*आजादी के बाद
*📍5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत-*1962 से
*📍साहित्य अकादमी फेलोशिप-*1968 में (डॉक्टर राधाकृष्ण इसे पाने वाले पहले व्यक्ति थे)
*📍टेम्प्लेटो प्राइस-*1975 (मरणोपरांत)
*📍ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा स्कॉलरशिप की शुरुआत-*1989 डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम से
*📍मृत्यु-*17 अप्रैल 1975(88वर्ष) को
*📍डॉक्टर राधाकृष्णन की जीवनी का प्रकाशन-*1989 में उनके पुत्र डॉक्टर एस गोयल द्वारा
*📍विशेष उपलब्धि-*भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति ,भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, गैर राजनीतिक के होते हुए भी संविधान सभा क सदस्य, नोबेल पुरस्कार के लिए 5 बार चयन

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म🥀🍃🥀*

*🍁दक्षिण भारत के तिरुतनी* नामक स्थान में हुआ था यह स्थान *चेन्नई से 64 किलोमीटर उत्तर पूर्व में* स्थित है

*🍁इनका *जन्म 5 सितंबर 1888* को हुआ था जिस परिवार में *इन्होने जन्म लिया वह एक ब्राह्मण परिवार* था और *इनका जन्म स्थान भी एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात है*

*🍁राधा कृष्ण के पुरखे पहले कभी सर्वपल्ली नामक ग्राम*में रहते थे और *18वीं शताब्दी के मध्य उन्होंने तिरुतनी ग्राम*की ओर निष्क्रमण किया था

🍁लेकिन *उनके पूर्वज चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्म स्थल के ग्राम का बोध* भी सदेव रहे इसी कारण *उनके परिजन अपने नाम के पूर्व सर्व्पल्ली* लगाते हैं

🍁डॉक्टर राधाकृष्णन एक गरीब लेकिन *विद्वान ब्राम्हण* की संतान थे उनके *पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा* था

*🍁इनके पिता राजस्व विभाग में कार्य करते थे इनके पिता के ऊपर बहुत बड़े परिवार के भरण-पोषण* का दायित्व था

*🍁वीरा स्वामी के 5 पुत्र और एक पुत्री* थी जिसमें *राधाकृष्णन का स्थान दूसरे नंबर के पुत्र*पर था इनके *पिता काफी कठिनाइयो के साथ परिवार का निर्वहन* कर रहे थे

🍁इस कारण *बालक राधाकृष्णन का बचपन में कोई विशेष सुख प्राप्त नहीं*किया

 

*🥀🍃🥀राजनीति में आने से पूर्व डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन🥀🍃🥀*

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत *एक प्रख्यात शिक्षाविद्,  महान दार्शनिक, उत्कृष्ट वक्ता और एक आस्थावान हिंदू विचारक*थे
🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन *राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 40 वर्ष शिक्षक के रुप* में बिताए थे

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन में *एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण* मौजूद थे *डॉक्टर राधाकृष्णन समस्त विश्व को एक शिक्षालय* मानते थे

🍁उनकी मान्यता थी कि *शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का शुद्ध उपयोग* किया जा सकता है इसीलिए *समस्त विश्व को एक इकाई समझकर ही शिक्षा का प्रबंधन* किया जाना चाहिए

🍁एक बार *ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में भाषण* देते हुए उन्होंने कहा था कि *मानव की जाति एक* होनी चाहिए *मानव इतिहास का संपूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है और यह तभी संभव हो सकता है जब समस्त देशों की नीतियों का आधार विश्व शांति की स्थापना* का प्रयत्न करना हो

🍁सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपनी *बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं ,आनंदमय अभिव्यक्तियों और हंसाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मंत्रमुग्ध*कर दिया करते थे

🍁वह छात्रों को  *उच्च नैतिक मूल्यों का आचरण करने के लिए प्रेरित* करते थे वह जिस विषय को पढ़ाते थे *उसे पढ़ाने से पहले स्वयं अध्ययन* करते थे *दर्शन शास्त्र जैसे  गंभीर विषय को भी वह अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोचक* बना देते थे

 

*🥀🍃🥀शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का योगदान🥀🍃🥀*

*🍁शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टर राधाकृष्णन ने जो अमूल्य योगदान दिया वह निश्चित अविस्मरणीय* है वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे *वह एक जाने माने विद्वान शिक्षक, वक्ता ,प्रशासक, राजनीयक, देशभक्त और शिक्षा शास्त्रीय*थे

🍁अपने जीवन के *उत्तरार्ध में अनेक उच्च पदों पर काम करते हुए भी शिक्षा के क्षेत्र में सतत योगदान* करते रहे
उनकी मान्यता थी कि *यदि सही तरीके से शिक्षा की जाए तो समाज की अनेक बुराइयों को मिटाया* जा सकता है

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का कहना था कि *केवल जानकारी देने से शिक्षा नहीं होती बल्कि जानकारी का अपना महत्व है और आधुनिक युग में तकनीकी जानकारी महत्वपूर्ण विधि है*

*🍁व्यक्ति के बौद्धिक झुकाव और उसकी लोकतांत्रिक भावना का भी शिक्षा में बड़ा* महत्व है यह सभी बातें *व्यक्ति को उत्तरदायी नागरिक* बनाती है

*🍁शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति* यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो *व्यक्ति को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान* करती है

🍁इन सभी का *जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है करुणा प्रेम और श्रेष्ठ परंपराओं का विकास* भी शिक्षा के उद्देश्य है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहते हैं जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबंध* नहीं होगा और *शिक्षा को एक मिशन* नहीं मानेगा तब तक *अच्छी शिक्षा की कल्पना*नहीं की जा सकती है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का कहना था कि शिक्षक*उन्हीं लोगों को बनाया जाना चाहिए जो *सबसे अधिक बुद्धिमान हो शिक्षक को मात अच्छी तरह अध्यापन करके ही संतुष्ट नहीं* हो जाना चाहिए बल्कि उसे *अपने छात्रों का स्नेह और आदर भी अर्जित* करना चाहिए

*🍁सम्मान शिक्षक होने भर से नहीं मिलता उसे अर्जित* करना पड़ता है

 

*🥀🍃🥀शिक्षक दिवस की शुरुआत🥀🍃🥀*
*🍁शिक्षक दिवस की शुरुआत डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर देश के दूसरे राष्ट्रपति बनने के समय 1962* में की गई थी

*🍁हमारे देश के पूर्व और द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस* के रूप में मनाई जाती है

🍁इन दिनों जब *शिक्षा की गुणात्मकता का हास होता जा रहा है और गुरू शिष्य संबंधों की पवित्रता को ग्रहण* लगता जा रहा है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्यस्मरण फिर एक नई चेतना पैदा* कर सकता है

*🍁सन 1962 में जब डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे देश के दूसरे राष्ट्रपति* बने थे तब कुछ *शिष्य और प्रशंसक उनके पास गए उन्होंने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन से निवेदन किया कि वह उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस* के रूप में मनाना चाहते हैं

🍁उन्होंने कहा *मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाने से निश्चित ही में अपने को  गौरवान्वित अनुभव*करुंगा तब से आज तक *5 सितंबर सारे देश में उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रुप में मनाया* जा रहा है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपना जन्मदिन अपने व्यक्तिगत नाम से नहीं बल्कि संपूर्ण शिक्षक बिरादरी को सम्मानित* किए जाने के *उद्देश्य से शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त* की थी

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को प्राप्त मानक उपाधियां, सम्मान और देश के महान विचारकों से मुलाकात🥀🍃🥀*

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*🌹”””मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमों की शुरुआत है””🌹*

🍁ऐसे *सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने वाले असीम प्रतिभा के धनी डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पुरस्कारों और उपाधियों से सम्मानित* किया गया है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन व्यक्तित्व के धनी थे उनका स्वभाव हंसमुखी दूसरों की मदद करना और अपने विद्यार्थियों में नैतिक गुणों का विकास* करने जैसा था

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कार्य *उनके अमूल्य विचार प्रतिभा के धनी और देश को  शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनके जीवन्तकाल और मरणोपरांत गई उपाधियों और सम्मान से सम्मानित* किया गया है

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन यूरोप और अमेरिका प्रवास से भारत लौटे तो यहां की विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधि प्रदान कर उनकी विद्वता का सम्मान* किया

*🍁1929 में इन्हें व्याख्यान देने हेतु मानचेस्टर विश्वविद्यालय द्वारा आमंत्रित* किया

 

*🍁1932 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नाइट बेचलर/ सर की उपाधि* दी गई थी *जिसे इन्होने आजादी के बाद लौटा* दिया था

*🍁1931 में इन्हें फेलो ऑफ द ब्रिटिश एकेडमी*

*🍁1954 में इन्है इनके कार्यों के लिए भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित* किया गया

*🍁1954 में इन्हें जर्मन ऑर्डर पौर मेरिट फॉर आर्ट्स एंड साइंस सम्मान* से सम्मानित किया गया

*🍁1961 में पीस प्राइज ऑफ थे जर्मन बुक ट्रेड से 1962 में इन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत* की गयी

*🍁1963 में ब्रिटिश ऑर्डर ऑफ मेरिट सम्मान*

*🍁1968 में साहित्य अकादमी फेलोशिप(डॉक्टर राधाकृष्णन इसे पाने वाले पहले व्यक्ति थे)*

*🍁1975 में टेम्पल्टों ऑफ प्राइज़ (मरणोपरांत) 1989 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा इनके नाम से स्कॉलरशिप* की शुरुआत की गई

 

*🥀🍃🥀भारतीय नेताओं से मुलाकात और उनका जीवन पर प्रभाव🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1915 में महात्मा गांधी जी से मिले उनके विचारों से प्रभावित होकर राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आंदोलन* के समर्थन में अनेक लेख लिखें

*🍁1918 में रविंद्र नाथ टैगोर से मिले रविंद्र नाथ टैगोर ने इन्हें बहुत प्रभावित* किया यही कारण था कि *इनकी विचारों की अभिव्यक्ति हेतु डॉक्टर राधाकृष्णन ने 1918 में रविंद्रनाथ टैगोर का दर्शन शीर्षक से एक पुस्तक* प्रकाशित की

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन किताबों को बहुत अधिक महत्व* देते थे उनका मानना था कि *पुस्तके वह साधन है जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण* कर सकते हैं

*🍁राधाकृष्णन द्वारा लिखी उनकी किताब द मीन ऑफ रिलीजन इन कंटेंपरेरी फिल्म सिटी से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर* पर पहचान मिली

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1928 की शीत ऋतु में पंडित जवाहरलाल नेहरू* से मिले थे उनकी *यह प्रथम मुलाकात* थी

*🍁पंडित जवाहरलाल नेहरु कांग्रेस पार्टी के वार्षिक अधिवेशन में सम्मिलित* होने के लिए आए थे

*🍁यद्यपि सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय शैक्षिक सेवा के सदस्य* होने के कारण किसी भी *राजनीतिक संभाषण में हिस्सेदारी नहीं*कर सकते थे लेकिन *उन्होंने अपने इस पद की कोई परवाह नहीं*की और भाषण दिया

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विद्यार्थी जीवन और कार्यकाल🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जिस परिवार में जन्म लिया था उस परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं* थी लेकिन *वह शुरू से ही ज्ञानी और मेघावी* छात्र थे

🍁उन्हें *बचपन से ही किताबें पढ़ने का अत्याधिक शौक और रुचि* थी *राधाकृष्णन शुरू से ही पढ़ाई लिखाई में काफी रुचि* रखते थे

*🍁राधाकृष्णन का बचपन तिरुतनी और तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों*पर ही व्यतीत हुआ उन्होंने *अपने प्रथम 8 वर्ष तिरुतनी* में ही गुजारे थे

*🍁राधाकृष्णन का परिवार धार्मिक भावनाओं से संपूर्ण* था लेकिन इसके बावजूद *उन्होंने राधाकृष्णन को प्रारंभिक शिक्षा के लिए क्रिश्चन मिशनरी संस्था लुर्थन मिशनरी स्कूल तिरुपति में अध्ययन* के लिए भेजा

🍁इसके पश्चात *अगले 4 वर्षों के लिए इन्हें वेलूर में शिक्षा ग्रहण* करने हेतु भेजा गया इसके बाद की *शिक्षा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पूरी* हुई

🍁स्कूल के दिनों में ही *डॉक्टर राधाकृष्ण ने बाइबल के महत्वपूर्ण अंश कंठस्थ याद* कर लिए थे जिसके लिए *उन्हें विशिष्ट योग्यता का सम्मान* दिया गया

🍁राधाकृष्णन ने कम उम्र में ही *अपने स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर को पढ़* लिया था और *इनके विचारों को आत्मसात* किया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1902 में मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी* से पास की ओर *छात्रवृत्ति प्राप्त की क्रिश्चियन कॉलेज मद्रास ने भी राधाकृष्णन की विशेष योग्यता के कारण इन्हें छात्रवृत्ति* प्रदान की

*🍁1904 में डॉक्टर राधाकृष्णन ने कला संकाय परीक्षा में प्रथम श्रेणी*में प्राप्त की *इन्हें मनोविज्ञान इतिहास और गणित विषय में विशेष योग्यता की टिप्पणी* भी उच्च प्राप्तांकों के कारण मिली थी

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर* किया और *मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक* का पद पर कार्य किया

 

*🥀🍃🥀व्यवसायिक कार्य🥀🍃🥀*

*🍁मद्रास रेसीडेंसी  कॉलेज* में वह प्राध्यापक भी रहे *राधाकृष्णन ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र*से परिचित कराया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के लेखक की प्रशंसा पूरे विश्व में की गई 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय* के यह वाइस चांसलर रहे

🍁इसके पश्चात *डॉक्टर राधाकृष्णन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक बने कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में इन्होंने 1935 से 1941* तक का कार्य किया

*🍁1939 से 1948 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चांसलर* भी बने इसके पश्चात *1953 से 1962 तक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन दिल्ली विश्वविद्यालय के चांसलर* रहे

🍁इसी दौरान *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को सोवियत संघ के विशिष्ट राजदूत और भारत का उप राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित* किया गया था

🍁यह सब *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा* का ही असर था कि उन्हें *स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्मात्री  सभा का सदस्य बनाया गया 1964 में यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि* के रूप में इन्हें नियुक्त किया गया

 

 

*🥀🍃🥀राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन और राजनयिक कार्य🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की असीम प्रतिभा और उत्कृष्ट कार्य के कारण ही स्वतंत्रता के बाद उन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य* बनाया गया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा* के सदस्य रहे इसी समय *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कई विद्यालय विश्वविद्यालयों के चेयरमैन* भी नियुक्त किए गए

🍁भारतीय कांग्रेसजन चाहते थे कि *सर्वपल्ली राधाकृष्णन के गैर राजनीतिक व्यक्ति* होते हुए भी इस *संविधान सभा के सदस्य*बनाया जाए

*🍁पंडित जवाहरलाल नेहरु चाहते थे कि राधाकृष्णन के संभाषण और वक्तृव्य प्रतिभा का उपयोग 14-15 अगस्त 1947 की रात्रि को उस समय किया जाए जब संविधान सभा का ऐतिहासिक सत्र आयोजित* हो

🍁राधाकृष्णन को निर्देश दिया गया है कि *वह अपना संबोधन  रात्रि को ठीक 12:00 बजे समाप्त करें इसी के पश्चात पंडित जवाहरलाल नेहरु जी के नेतृत्व में संवैधानिक संसद द्वारा शपथ* ली जानी थी

🍁इस संबोधन के बारे में *डॉक्टर राधाकृष्णन और पंडित जवाहरलाल नेहरू के अलावा किसी को भी नहीं पता* था आजादी के बाद उनसे *आग्रह किया गया कि वह मातृभूमि की सेवा के लिए विशिष्ट राजदूत* के रूप में *सोवियत संघ के साथ राजनियक कार्य*की पूर्ति करें

🍁इस प्रकार *विजयलक्ष्मी पंडित का डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नया उत्तराधिकारी* चुना गया

*🍁पंडित जवाहरलाल नेहरू के चयन पर कई व्यक्तियों*ने आश्चर्य व्यक्त किया कि *एक दर्शनशास्त्री को राजनीतिक सेवाओं*के लिए *क्यों चुना गया उन्हें संदेह* था कि *डाक्टर राधा कृष्ण की योग्यताए*सौंपी गई

*🍁जिम्मेदारी के अनुकूल नहीं है लेकिन बाद में सर्वपल्ली राधाकृष्ण ने साबित* किया कि *मास्को में नियुक्ति भारतीय राजनीतिज्ञ* में सबसे बेहतर थे

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ना तो राजनीतिक क्षेत्र में और ना शिक्षक जगत* में नियमों से बंधे हुए नहीं थे

*🍁1952 में सोवियत संघ से आने के बाद डॉक्टर राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति* निर्वाचित किया गया *संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का नया पद सर्जित* किया गया

*🍁जवाहरलाल नेहरू ने इस पद हेतु राधा कृष्ण का चयन करके पुनः लोगों को चौंका* दिया सभी को *आश्चर्य था कि इस पद के लिए कांग्रेस पार्टी के किसी राजनीति्ञ*का चुनाव क्यों नहीं किया गया

*🍁उप राष्ट्रपति के रूप में राधा कृष्णन ने राज्यसभा में अध्यक्ष का पदभार* संभाला

*🍁सन 1952 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति* बनाया गया *डॉक्टर राधाकृष्णन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के चयन को सही साबित* किया

🍁क्योंकि *उपराष्ट्रपति के रूप में एक गैर राजनीतिक व्यक्ति ने सभी राजनीतिज्ञ*को प्रभावित किया था *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति के पद पर 13 मई 1952 से 12 मई 1962 तक कार्यरत* रहे

🍁जब *1962 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल समाप्त* होने वाला था *उसके पश्चात डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति का पद* दिया गया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में 13 मई 1962 को नियुक्त*किए गए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के *राष्ट्रपति बनने पर उन्हें 31 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रपति के पद* पर बिठाया गया

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल 13 मई 1962 से 12 मई 1967 तक* का था

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के *राष्ट्रपति बनने पर प्रसिद्ध दार्शनिक बर्टेड रसेल ने कहा था– *कि “”यह विश्व के दर्शनशास्त्र का सम्मान है की महान भारतीय गणराज्य मैं डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण को राष्ट्रपति के रुप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते में विशेषत: खुश हु”*

*🍁प्लेटो ने कहा था की–दार्शनिक को राजा होना चाहिए और महान भारतीय गणराज्य ने एक दार्शनिक को राष्ट्रपति बनाकर प्लेटो को सच्ची श्रद्धांजलि* अर्पित की है

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की नजरों में गुरु शिष्य का संबंध🥀🍃🥀*

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन *पूरी दुनिया को एक ही विद्यालय के रूप*में देखते थे उनका विचार था कि *शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सही उपयोग* किया जा सकता है *अतः विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन* करना चाहिए

*🍁विश्व की अनूठी परंपरा के प्रवर्तक डॉक्टर राधाकृष्णन अपने विद्यार्थियों का स्वागत हाथ मिलाकर* करते थे वह अपने *विद्यार्थियों को जीवन में उच्च नेतिक कर्तव्य को करने के विचार प्रसारित* करते रहते थे

*🍁मैसूर में कोलकाता आते वक्त मैसूर स्टेशन पर डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जय जयकार* से गूंज उठा था

🍁यह वह पल था *जब हर किसी की आंखे उन की विदाई पर नम थी उनका व्यक्तित्व प्रवाह केवल छात्र-छात्राओं पर ही नहीं बल्कि देश विदेश के अनेक प्रबुद्ध लोगो*पर भी पड़ा

*🍁रूसी नेता स्टालिन के हृदय में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रति* बहुत सम्मान था

*🍁बच्चों को भी इस महान शिक्षक से विशेष लगाव था इसी कारण राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद विद्यार्थियों द्वारा उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जाहिर*की गई थी

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन *बच्चों की शिक्षा के प्रति कोई समझौता* नहीं करते थे *वह बच्चों को वही शिक्षा देना चाहते थे जो उनके जीवन को बेहतर* बना सके

*🍁विद्यार्थियों के समय को वह विद्यार्थियों के अध्ययन कार्य*में ही लगाते थे

*🍁एक अच्छा शिक्षक वही हो सकता है जो अपने छात्रों का भविष्य उज्जवल* बना सके और *उसे सही दिशा में एक अच्छा ज्ञान प्राप्त* कर सके

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी को उनके पुत्र डॉक्टर एस. गोपाल ने 1989 में प्रकाशित* किया

🍁इससे पूर्व *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन की घटनाओं के संबंध में किसी को भी अधिक जानकारी नहीं* थी

*🍁लेकिन बाद में स्वयं उनके पुत्र ने ही माना कि उनकी पिता की व्यक्तिगत जिंदगी के विषय* में लिखना एक बड़ी चुनौती थी और *एक नाजुक मामला* था

🍁लेकिन *डॉक्टर एस गोपाल ने पिता के साथ अपने संबंधों को भी जीवन में रेखांकित* किय

*🍁1952 में न्युयार्क में लाइब्रेरी ऑफ लिविंग फिलॉसफर के नाम से एक श्रृंखला  दी गई है जिसमें सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में अधिकारिक रूप* से लिखा गया था

*🍁राधाकृष्णन ने उस में दर्ज जानकारी का कभी Khandan* नहीं किया

*🍁मार्च 1975 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को टेंपलटन पुरस्कार* से सम्मानित किया गया *जोकि धर्म के क्षेत्र में उत्थान के लिए प्रदान किया*जाता है

🍁इस *पुरस्कार को ग्रहण करने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के ईसाई संप्रदाय* के व्यक्ति थे

 

 

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की मृत्यु🥀🍃🥀*

*””“मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमो की शुरुआत है।”””*

 

*ऐसे सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने वाले असीम प्रतिभा का धनी सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन लम्बी बीमारी के बाद 17 अप्रैल, 1975 को प्रातःकाल इहलोक* लोक छोङकर परलोक सिधार गये।

*देश के लिए यह अपूर्णीय* क्षति थी। परंतु अपने समय के *महान दार्शनिक तथा शिक्षाविद् के रूप में वे आज भी अमर* हैं।

*शिक्षा को मानव व समाज का सबसे बड़ा आधार मानने* वाले डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का *शैक्षिक जगत में अविस्मरणीय व अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय* रहेगा। उनके *अमुल्य विचार के साथ अपनी कलम को यहीं विराम* देते हैं।

 

 

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में 51वां अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया. यह दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है जिसके तहत विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस प्रतिवर्ष 08 सितंबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है. इसके तहत यूनेस्को द्वारा घोषित विषय ‘डिजिटल दुनिया में साक्षरता’ के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया. भारत में साक्षरता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों, जिलों, ग्राम पंचायतों तथा गैर-सरकारी संगठनों को साक्षर भारत पुरस्कार प्रदान किए गये.

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण वर्ष 1988 से अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाता है. स्वतंत्रता के बाद से निरक्षरता समाप्त करना भारत सरकार के लिए प्रमुख चिंता का विषय रहा है. अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर निरक्षरता समाप्त करने के लिए जन जागरुकता को बढ़ावा और प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों के पक्ष में वातावरण तैयार किया जाता है.

वर्ष 1996 से इस कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ नए अवयव जोड़े गए हैं. वर्ष 1996 में कार्यक्रम ‘मशाल मार्च’ का आयोजन किया गया था जिसमें स्कूली छात्र और साक्षरता कार्यकर्ता शामिल हुए थे. इसके बाद के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने के लिए राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण (एसएलएमए) द्वारा साक्षरता कार्यकर्ताओं के लिए राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएं (रंगोली, ड्राइंग आदि), जेएसएस उत्पादों (केआरआईटीआई) की प्रदर्शनी, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगोष्ठी, और सांस्कृ्तिक कार्यक्रमों जैसी कई गतिविधियां शामिल की गई हैं.

मानव शरीर और उसके मुख्य अंग Human body and its main organ

  1. नेत्र(Eye)

दृष्टि वह संवेदन है जिस पर प्रत्येक मनुष्य निर्भर रहता है, नेत्र शरीर का एक अमूल्य अवयव है|  नेत्रों  के द्वारा ही हमें वस्तु का दृष्टि ज्ञान होता है|  इसका निर्माण अत्यंत कोमल तंतुओं से होता है परंतु इसकी रचना जटिल एवं कार्य संषिष्ट है|

प्रत्येक नेत्र की रचना गोलीका आकार की होती है इसीलिए इसे अक्षीगोलक(Eye ball) कहते हैं| अक्षीगोलक एक गड्डे में स्थित रहता है, इसे नेत्र गुहा कहते हैं|  इसी गड्डे में नेत्र को सुरक्षा मिलती है|  नेत्र गोलक का व्यास 2.5 से.मी. होता है| नेत्र गुहा शंकु(Orbital cavity) रूप में होती है| दृष्टि तंत्रिका (Optic nerve)  तथा मस्तिष्क में स्थित दृष्टि केंद्र (Visual centes) कुछ नेत्र उपांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है|

नेत्र उपांग(Appendage of the Eye)

  1. भौह
  2. नेत्र श्लेष्मा पलकें
  3. नेत्र पक्षन
  4. नेत्र श्लेष्मा
  5. अश्रु उपकरण
  6. पेशियां
  7. कर्ण(Ear)

कर्ण शरीर का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है, यह शरीर का आवश्यक अंग है| इससे किसी भी ध्वनि का बोध होता है| कर्ण द्वारा सुनने की क्रिया आठ वीं कपाल तंत्रिका, श्रवण तंत्रिका की सहायता से सम्पन्न होती है| कर्ण के मुख्य तीन भाग होते हैं|

बाह्यकर्ण

मध्यकर्ण

अन्तःकर्ण

a.बाह्यकर्ण(Outer Ear)

बाह्यकर्ण के दो स्पष्ट भाग होते हैं,पहला कर्ण पाली एवं दूसरा भाग कर्ण कुहर| जिसमें कर्ण पली बाहर की ओर स्थित है यह भाग अर्धचंद्राकार दिखाई देता है इसी का ऊपरी भाग पितप्रतयावसा उपस्थिति का बना होता है| कर्ण पाली का मुख्य कार्य ध्वनि को उत्पन्न तरंगों को एकत्रित करके आगे कान के भीतर भेजना है|बाह्य कर्ण का दूसरा भाग बाह्य क्छुर को कान की नली भी कहा जाता है यह नली लगभग 1 इंच लंबी होती है| नली का मार्ग सीधा नहीं बल्कि घुमावदार होता है रचना की दृष्टि से बाह्य कर्ण कुहर के दो भाग होते है| एक तिहाई भाग कार्टिलेज तथा भीतरी दो तिहाई भाग अस्थि निर्मित होता है| बाह्य कर्ण कुहर की त्वचा में विशेष प्रकार की ग्रंथि होती है जिसे कर्णमल संधि कहते हैं| इस ग्रंथि से पीला, चिकना पदार्थ स्रावित होता है जो बाह्य को चिकना रखता है|

बाह्य कर्ण कुहर पर छोटे छोटे रोम होते हैं जो बाहरी धूल के कण आदि को अंदर जाने से रोकते हैं| बाह्य कर्ण के दोनों भाग का कार्य न केवल ध्वनि तरंगों को एकत्रित करना है बल्कि उन्हें पारेषित करके आगे बढ़ाना भी है|

b.मध्यकर्ण (Middle Ear)

यह भाग अनियमित टेड़े आकार की गुहा है| मध्य कर्ण एक झिल्ली कृत पर्दे, कर्ण पटल के द्वारा बाह्य कर्ण से पृथक रहता है| जिस स्थान पर कर्ण पटल स्थित है वहीं से मध्य कर्ण का आरंभ होता है| वास्तव में मध्य कर्ण एक शंकरा आयताकार बॉक्स के समान है जिसकी अग्र मध्य पश्च भित्तियां होती हैं|

मध्य कर्ण की अग्र और पश्च भित्तियों में छिद्र हैं| अग्रभित्ति में कर्ण पटल के बिल्कुल समीप एक छिद्र होता है यह छिद्र नलिका का मुख्य द्वार है यह नलिका कंठ कर्ण नली कहलाती है| इस नलिका के द्वारा कान का संबंध नासा ग्रसनी गुहा से रहता है पश्चभित्ति का कण से संबंध शंखास्थी की कर्णमूल पदार्थ में स्थित कर्णमूल कोटर तथा करण मूल वायु सेल से रहता है मध्य कर्ण में तीन छोटी अस्थियां होती है जो कर्णास्थिका कहलाती है| संपूर्ण मध्य कर्ण गुहा श्लैष्मिक कला अस्तर से ढका रहता है| तीनों छोटी हस्तियां एक श्रृंखला के रूप में स्थित होती है जो निम्न है| मुग्दरक, घूर्णक, बलयक

  1. जिव्हा(Tongue)

जीव्हा मुख्यत: स्वाद ज्ञानकेंद्रीय है|  जिव्हा वस्तु के स्वाद का अनुभव कराती है|  जिसके आधार पर उसके उपयोग किए जाने या न किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है|  स्वाद रासायनिक संवेदना है जो स्वाद संग्राहक अंगों को उत्तेजित करते हैं|  प्रत्येक वस्तु में रासायनिक तत्व भिन्न भिन्न होने के कारण उनके स्वाद में विभिन्नता पाई जाती है|

किसी वस्तु के स्वाद को जानने के लिए वस्तु का स्वादेंद्रियों को सीधे संपर्क में आना होता है स्वाद का पता भोजन की तरल अवस्था में ही चलता है| भोजन का कुछ अंश लार में घुल जाता है| लार में घुला हुआ यह भोजन स्वाद कलिकाओं को क्रियाशील कर देता है खाद्य पदार्थ द्वारा एक रासायनिक क्रिया होती है जिसके फलस्वरुप तंत्रिका आवेग पैदा हो जाता है| ये आवेश मस्तिष्क के स्वाद केंद्र तक पहुंचते हैं और स्वाद का अनुभव देने लगते हैं किसी वस्तु का स्वाद जानने के लिए उसे घुलनशील होना अनिवार्य है| जीवा पर रखी हुई ठोस वस्तु का स्वाद अस्पष्ट होता है| मुख्य रूप से स्वाद चार प्रकार का होता है कड़वा, मीठा, नमकीन, खट्टा| अधिकांश खाद्य पदार्थों में स्वाद के अतिरिक्त गंध भी होती है| जिव्हा के आगे का भाग मीठे वे नमकीन स्वाद का अनुभव नहीं कराता क्योंकि यहां पर स्वाद का मध्य भाग किसी भी प्रकार के स्वाद का अनुभव नहीं करता क्योंकि यहां पर कलिकाओं का अभाव रहता है कुछ वैज्ञानिक धात्विक और छारीय स्वादों को भी इस वर्ग में सम्मिलित करते हैं|  स्वाद का मुख्य अंग जिव्हा है क्योंकि स्वाद के संग्राहक इसी में निहित होते है|

  1. नासिका(Nose)

नासिका भी अन्य ज्ञानेंद्रियों की तरह महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रि है| यह घ्राण संवेदना के ज्ञान का अंगक है| सुगंध और दुर्गंध की अनुभूति नासिका के द्वारा होती है| घ्राण संवेदना एक रासायनिक संवेदना है| सूंघने की क्रिया के लिए वस्तु की अवस्था गैस के रुप में होना आवश्यक है|  जब यह गैस  नासिका गुहा में अग्रेसित होती है तो घ्राण क्षेत्र की कोशिकाएं उत्तेजित हो जाती हैं एवं घ्राण का अनुभव होने लगता है घ्राण संवेदना तभी सींव है जब गैस का नाक की श्लेष्मा के साव में घुलनशील स्थिति में आ जाए| नासिका गुहा में गैस या कण वायु के माध्यम से पहुंचते हैं|


नाक द्वारा जोर से खींची गई गैस अधिक मात्रा तथा तीव्र गति से नासिका गुहा में जाती है जिससे गंध का अनुभव तुरंत हो जाता है, यहां तक कभी-कभी गंध असहनीय हो जाती है| नाक ऊपरी हिस्से पर लगाए गए रासायनिक पदार्थ की गंध नासिका द्वारा सरलता से अनुभव कि जा सकती है| घ्राण प्रदेश से आने वाली सूक्ष्म तंतु वृक्षायन द्वारा घ्राण बल्ब के तंतु से मिले रहते हैं| घ्राण बल्ब मस्तिष्क का भी बाहर निकला हुआ भाग है, जो की एथमायड अस्थि की प्लेट के ऊपर उपस्थित होता है| घ्राण बल्ब से संवेदन घ्राण पथ में पहुंचता है| घ्राण तंत्र अनेक केन्द्र्कों में प्रसारित होते हुए अनंत में घ्राण केंद्र में पहुंचता है यह केंद्र प्रममस्तिष्क में स्थित होता है तथा यहीं पर घ्राण संवेदन ग्रहण किये जाते हैं|

  1. त्वचा

त्वचा शरीर की सतह पर एक सुरक्षात्मक आवरण होता है| यह उन गुहाओं की उपकला से संबंध रखती है जिनके द्वारा त्वचा पर खुलते हैं| त्वचा में स्पर्श तंत्रिका अंताग स्थित होते हैं| यह शरीर के तापमान तथा शरीर में होने वाली जल हानि को नियंत्रित करती है| त्वचा स्पर्श संवेदन की महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रिय है| संवेदन के अनुभव के लिए संबंधित संवेदी तंत्रिकाओं में उत्तेजना आवश्यक है| इस प्रकार उत्पन्न उत्तेजना मस्तिष्क में परेषित होने के पश्चात केंद्रीय तंत्रिका तंत्र उसका विश्लेषण करती है एवं मस्तिष्क द्वारा उस विशेष संवेदना का अनुभव होता है त्वचा को दो स्तरों में विभाजित किया जाता है, बाह्य त्वचा, अंत:स्तत्वचा

भारत भूमि और उसके निवासी Land of India and its inhabitants

भारत

विश्व  में भारत मानव जाति का पालना, मानव भाषा की जन्मस्थली, इतिहास की जननी, पौराणिक कथाओं की दादी और परंपरा की परदादी रहा है| मानव इतिहास में हमारी सर्वाधिक मूल्यवान और सर्वाधिक शिक्षाप्रद सामग्री का खजाना केवल भारत में निहित है|

भारत एक बेजोड़ संस्कृति वाला देश है| भारत का कुल क्षेत्रफल 32,87,263    वर्ग किलोमीटर है| आकार की दृष्टि से भारत विश्व में सातवें स्थान पर एवं जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है|

भारत का अक्षांशीय विस्तार करीब  3,214  किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम की तरफ देशांतर  विस्तार करीब 2,933 किलोमीटर है| इसकी स्थलीय सीमा करीब 15,200 किलोमीटर है| मुख्य भूमि लक्षद्वीप समूह और अंडमान निकोबार द्वीप समूह सहित तट रेखा की कुल लम्बाई 7,516.6  किलोमीटर है|

प्राकृतिक पृष्ठभूमि

भारत की सीमा उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान, उत्तर में चीन, भूटान तथा नेपाल, सुदूर पुर्व में म्यामां और पूर्व में बांग्लादेश से लगती है| देश को मुख्य रूप से 6 अंचलों, उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी, पश्चिमी, मध्यवर्ती और पूर्वोत्तर अंचल में वर्गीकृत किया जा सकता है| यहा 29 राज्य और 7 केंद्रशासित प्रदेश है|

प्राकृतिक संरचना

संरचना के आधार पर  भारत भूमि को  मुख्य चार भागों में बांटा गया है| विशाल हिमालय क्षेत्र, गंगा और सिंधू के मैदानी भाग, रेगिस्थान क्षेत्र और दक्षिणी प्रायद्वीप में बती है|

हिमालय में उपजाऊ घाटियां प्राकृतक सौंदर्य से भरपूर है| हिमालय की ये पर्वतमाला करीब 2,400 किली मीटर में फैली है| जो अलग अलग स्थानों पर 240 से 320 किलोमीटर तक चौड़ी है| इन पर्वतमालाओं में विश्व की सबसे उंची चोटियां स्थित है| दिल्ली में यमुना और बंगाल की खाड़ी के बीच करीब 1,600 किलोमीटर क्षेत्र की ऊंचाई में केवल 200 मीटर का डाल है|

भौगोलिक संरचना

भौगोलिक क्षेत्र मुख्य रूप से भौतिक विशेषताओं का अनुसरण करता है| इसे तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है, हिमालय और उससे जुडी पर्वतमालाओं का समूह, सिंधू गंगा का मैदान और प्रायद्वीपीय ढाल|

नदी प्रणालियां

भारतीय नदी प्रणाली को चार भागों में विभक्त किया गया है, हिमालयी नदियों, दक्षिणी नदियां, तटवर्ती नदियां, अंतरदेशीय बरसाती नदियों में विभक्त किया गया है| हिमालय नदियां बर्फ और हिमनदों के पिघलने से बनती है| और इसीलिय यर वर्षभर निरंतर बहती रहती है| बाकि ज्यादातर नदिया वर्षा पर निर्भर करती है|

वनस्पति

भारत वनस्पति की दृष्टी से अत्यंत समृद्ध है कोलकाता में स्थित भारतीय वनस्पति विज्ञानं सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 46,000 पादप प्रजातीय पाई जाती है| यहाँ उत्कृष्ट वानस्पतियों की लगभग 15,000 किस्में पाई जाती है| उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार पादप विविधता की दृष्टि से भारत का विश्व में 10 और एशिया में चौथा स्थान है|

जनसंख्या

भारत की जनसंख्या 1 मार्च 2011 को 121.09 करोड़ थी 62.32 करोड़ पुरुष 58.75 करोड़ महिला है भारत का जनसंख्या घनत्व 2011 में 382 प्रति वर्ग किलोमीटर था| विश्व की सतह के 13.579 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में भारत की हिस्सेदारी मात्र 2.4 प्रतिशत है|

लिंग अनुपात

एक हजार पुरुष की तुलना में महिलाओं की संख्या को लीन अनुपात कहते है|

साक्षरता

2011 की जनगणना के प्रयोजन के लिए 7 वर्ष और ऊपर की आयु के ऐसे व्यक्ति को साक्षर समझा गया है,जो किसी भी भाषा को पढ़ने और लिखने सक्षम हो| ऐसा व्यक्ति जो पढ़ सकता है लिख नहीं सकता, को साक्षर नहीं माना जाता है|

2011 की जनगणना के परिणामों से पता चलता है की देश में साक्षारता में वृध्दि हुई है|देश की साक्षरता 73 प्रतिशत है| जिसमें 80.9 प्रतिशत पुरुष तथा 64.6 महिला है| 94 प्रतिशत साक्षरता के साथ केरल प्रथम स्थान एवं 91.9 प्रतिशत लक्षद्वीप दुसरे स्थान पर है| साक्षरता में बिहार अंतिम स्थान पर जहा 61.8 प्रतिशत है| 96.1 प्रतिशत पुरुष साक्षर और 92.1 प्रतिशत महिला साक्षरता के साथ केरल प्रथम स्थान और इसके विपरीत बिहार में 71.2 प्रतिशत पुरुष 51.5 प्रतिशत महिला साक्षरता दर है जो अंतिम स्थान पर है|       

भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक Indian national symbol

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा National flag tiranga

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जिसमें समानांतर तीन रंगों की पट्टीयां होती है| सबसे ऊपर वाली गहरी केसरिया पट्टी होती है मध्य में सफेद और सबसे नीचे गहरी हरे रंग की पट्टी होती है| ध्वज की लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होता है| सफेद पट्टी के केंद्र में एक गहरे नीले रंग का चक्र होता है, जिसका प्रारूप सम्राट अशोक के सारनाथ स्थित सिंह स्तंभ पर बने चक्र की तर्ज पर बनाया गया है| इसका व्यास सफेद पट्टी की चौड़ाई के समान है| और इसमें 24 तिल्लियां होती है| भारत की संविधान सभा ने राष्ट्र ध्वज के प्रारूप को 22 जुलाई, 1947 को अपनाया|

सरकार द्वारा समय समय पर जारी गैर सांविधिक अनुदेशों के अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन पर राजचिन्हों और नामों के दुरूपयोग की रोकथाम अधिनियम 1950 ( 1950 का 12वां) और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 ( 1971 का 69वां ) की व्यवस्थाएं लागु होंगी|

राजचिन्ह

भारत का राजचिन्ह सारनाथ स्थित अशोक के सिंह स्तंभ की अनुकृति है| मूल स्तंभ में शीर्ष 4 सिंह है, जो एक दूसरे की और पीठ किए हुए है| इसके नीचे घंटे के आकार के पदम के उपर एक चित्र वल्लरी में एक हाथी, चौकड़ी भरता हुआ एक घोडा, एक सांप तथा एक सिंह की उभरी हुई मुर्तियां है| जिनके बीच बीच में चक्र बने हुए है| चिकने बलुआ पत्थर के एकल ब्लोक को काटकर बनाए गए इस स्तंभ पर धर्मचक्र सुशोभोदित है|

भारत सरकार द्वारा 26 जनवरी, 1950 को अपनाए गए  राजचिन्ह में केवल 3 सिंह दिखाई पढ़ते थे पट्टी के मध्य में नक्काशी में चक्र है| जिसके दाई और एक सांड और बाई और एक घोडा है| दाएं और बाएं छोरों पर अन्य चक्रों के किनारे है| घंटाकार पदम छोड़ दिया गया है| फलक के नीचे मुंडकोपनिषद का सूत्र सत्यमेव जयते देवनागरी लिपि में अंकित है| जिसका अर्थ है – सत्य की ही विजय होती है|

भारत के राजचिन्ह का उपयोग भारत के राजकीय ( अनुचित उपयोग निषेध ) अधिनियम, 2005 के तहत नियंत्रित होता है|

राष्ट्रीयगान

रविन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा मूल रूप से बांग्ला में रचित और संगीतबद्ध जन गण मण के हिंदी संस्करण को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रगान के रूप में 24 जनवरी, 1950 को अपनाया था| यह सर्वप्रथम 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था| पुरे गीत में 5 पद है| प्रथम पद राष्ट्रीयगान का पूरा पाठ है जो इस प्रकार है:

जन गण मण अधिनायक जय हे

भारत भाग्य विधता|

पंजाब सिन्धगुजरात मराठा

द्राविड उत्कल बंग

विंध्य हिमाचल यमुना गंगा

उच्छल जलधि तरंग|

तब शुभ नामे जागे, तब शुभ आशीष मांगे

गाहे तब जय गाथा|

जन गण मंगलदायक जय हे

 भारत भाग्य विधाता|

जय हे, जय हे, जय हे,

जय जय जय जय हे|

राष्ट्रीगान के गायन की अवधि लगभग 52 सेकेण्ड होती है| कुभ अवसरों पर राष्ट्रीगान को संक्षिप्त रूप में गाया जाता है|जिसमे इसकी प्रथम और अंतिम पंक्तियों ( गाने का समय लगभग 20 सेकेण्ड  ) होती है|

राष्ट्रीयगीत

बंकिमचंद्र चटर्जी ने संस्कृत में वन्दे मातरम् गीत की रचना की, जिसे जन गण मन के समान दर्जा प्राप्त है| यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में जन जन का प्रेरणा स्रोत था| यह गीत पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था| इसका प्रथम पद इस प्रकार है|

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

राष्ट्रीय पंचांग

ग्रिगेरियन कैलेंडर के साथ साथ देशभर के लिए शक संवत् पर आधारित एकरूप राष्ट्रीय पंचांग, जिसका पहला महीना चैत्र है और सामान्य वर्ष 365 दिन का होता है| 22 मार्च 1957 को इन्हें सरकारी उद्देश्यों के लिए अपनाया गया|

(1) भारत का राजपत्र,

(2) आकाशवाणी के समाचार प्रसारण,

(3) भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कैलेंडर और भारत सरकार द्वारा नागरिकों को संबोधित पत्र

राष्ट्रीय पंचांग और ग्रिगेयन कैंलेंडर की तारीखों में स्थाई सादृश्य है| चैत्र का पहला दिन सामान्यत: 22 मार्च को और अधिवर्ष में 21 मार्च को पड़ता है|

रक्त सम्बंधित एवं रिश्ता सम्बंधित परीक्षण(Blood-related and relation-related tests)

परिचय

इस प्रकार की परीक्षाओं से अभ्यार्थियों के रिश्ते संबंधी ज्ञान की जांच की जाती है| हमारे परिवारिक जीवन में जो संबंध होते हैं उन्हीं के आधार पर इस तरह के प्रश्न तैयार किए जाते हैं जिन्हें हल करने के लिए हम दो तरीकों का उपयोग करते हैं|

1.आरेख बनाकर

2.जिसका संबंध पूछा जाए उसकी जगह स्वम् को रख कर,

संबंधों की सूची(List of relations)

पिता या माँ का बीटा = भाई

पिता या मा की बेटी = बहन

पिता का भाई = चाचा अथवा ताऊ

माँ का भाई = मामा

पिता की बहन = बुआ

माँ की बहन = मौसी

पिता की माँ = दादी

माँ की माँ = नानी

पिता के पिता = दादाजी

माँ के पिता = नानाजी

बेटे की पत्नी = बहु

पति की बहन = ननद

पत्नी की बहन = साली

भाई का लड़का = भतीजा

भाई की लड़की = भतीजी

मौसी अथवा चाचा, ताऊ के बेटे बेटी = मौसेरे चचेरे भाई बहन

बहन का पति = जीजा या बहनोई

भाई की पत्नी = अनुज वधु अथवा भाभी

दादा अथवा दादी का बीटा = पिता, चाचा, ताऊ,

नाना या नानी का बीटा = मामा

दादी या दादा की एक मात्र बहु = माँ

दादा या दादी की बहु = माँ, चची, ताई

नाना या नानी की बहु = मामी जी

उदाहरण(Examples)

  1. A, B का पिता है| E, A का भाई है, D, A का पिता है, यदि C, B की बहन है तो E का C से क्या संबंध है?

C, B की बहन है तथा A, B का पिता है इसलिए A, C का पिता हुआ, E, A का भाई है| अत: E, C का चाचा होगा|

  1. स्वीटी की और संकेत करते हुए बाबू ने कहा की उसका पिता मेरी माँ की बहन का पुत्र है| बाबू टी से क्या सम्बन्ध है?

स्वीटी के पिता, बाबु की मौसी का लड़का है अत: बाबु स्वीटी का चाचा है|

सबसे हल्का आधुनिक सुपरसोनिक विमान तेजस The lightest modern supersonic aircraft Tejas

स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने 12 मई,2017 को सफलतापूर्वक डर्बी मिसाइल के सहयोग से लक्ष्य को नष्ट किया| इस मिसाइल ने हवा से हवा में मार करने वाली अपनी बियोंड विजुअल रेंज(बीवीआर) मिसाइल दागने की क्षमता का प्रदर्शन किया| इसके सफल परीक्षण से स्वदेशी मिसाइल तकनीक ताकतवर तो हुई, साथ ही दृश्यता के पार जाकर मारक क्षमता(बियोंड विजुअल रेंज) भी हासिल हो गई| हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल ने राडार निर्देशन मोड़ में चांदपुर के एकीकृत परीक्षण केंद्र(आईटीआर) में एक मैनोयुरेबल एरियल लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाया| यह परिक्षण सभी मापदण्डो पर खरा उतरा है|

आईटीआर के सेंसर ने लक्ष्य और मिसाइल का पता लगाया| इस परीक्षण का उद्देश्य तेजस पर मौजूद प्रणालियों के साथ डर्बी को जोड़े जाने का आकलन करना और इसके प्रदर्शन का सत्यापन करना था| इन प्रणालियों में एवियोनिक्स, अग्नि नियंत्रण राडार, लोन्चर और मिसाइल हथियार आपूर्ति प्रणाली शामिल है|

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण सभी मानकों पर खरा उतरा है और योजना के अनुसार यह अपने मकसद में कामयाब रहा| तेजस लड़ाकू विमान बनाने की देश की क्षमता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है| यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले वर्ष तेजस वायुसेना में पुराने मिग 21 का स्थान ले लेगा|

तेजस की मुख्य विशेषताएं

  1. तेजस का कुल वजन 6540 किलोग्राम है| सिंगल इंजन वाले इस विमान को हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है|
  2. यह 50 हजार फीट उचाई तक उडान भरने में सक्षम है और एक बार में 3000 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है|
  3. तेजस हवा में ईधन भर सकता है|
  4. तेजस की सबसे बड़ी खासियत यह है की इसमें नौ तरह के हथियार लोड किए जा सकते है|
  5. दुश्मन पर हमला करने के लिए, इसमें हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइल लगी है, हवा से पृथ्वी पर मार करने वाली मिसाइल, जमीन पर निशाना लगाने के लिए आधुनिक लेजर गाइडडे बम लगे हुए हैं|
  6. अगर ताकत की बात करें तो तेजस पुराने मिग 21 से कहीं ज्यादा आगे है और मिराज 2000 से इसकी तुलना कर सकते है| यही नहीं चीन और पाकिस्तान के साझा उपक्रम से बने जेएफ 17 से कहीं ज्यादा बहतर है| तेजस का फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जबरदस्त है|
  7. भारतीय लाइट कोम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस दुनिया का सबसे छोटा, सबसे हल्के वजन का और आधुनिक सुपरसोनिक विमानों के अपने वर्ग में बहु भूमिका वाले लड़ाकू विमान है| यह एक एकल सीट लड़ाकू विमान है|
  8. एकल जेट इंजन वाला भारतीय नौसेना और वायु सेना के लिए हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है| विमान में डेल्टा विंग कोंफिग्रेशन है, जिसमें कोई तेपलेन या फोरप्लेन नहीं है| एलसीए एल्युमिनियम लिथियम मिश्र धातु, कार्बन फाइबर कंपोजिट और टाइटेनियम से निर्मित है|

भारत और कृषि India and Agriculture

भारत की अर्थव्यवस्थ में कृषि की अहम् भूमिका है| 2011 की जनगणना के अनुसार देश की आबादी का लगभग 55 प्रतिशत कृषि और इससे जुडी गतिविधियों में लगा है| और देश के सकल मूल्य संवर्धन में इसकी हिस्सेदारी 17.4 प्रतिशत है| कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए भारत सरकार ने इसके सतत विकास हेतु कई कदम उठाए है| जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना के माध्यम से पानी की बढ़ी हुई क्षमता तथा सिंचाई के लिए उपयोग में सुधार करने, परंपरागत कृषि विकाश योजना ( पी के वी वाई ) द्वारा जैविक खेती को समर्थन और किसानों की आय में वृद्धि हेतु एकीकृत राष्ट्रीय कृषि बाजार के सृजन को समर्थन जैसे कई कदम उठाए गए है|

उत्पादन

कम वर्षा और बमौसम वर्षा तथा ओलावृष्टि के कारण वर्ष 2014-15 में कृषि उत्पादन का अनुपात वर्ष 2013-14 के आकड़ों की तुलना में कम है| चौथे अग्रिम अनुमानों के अनुसार देश में चावल के कुल उत्पादन का अनुपात 1048 लाख टन है, जो वर्ष 2013-14 के उत्पादन से 18.5 लाख टन कम है| गेंहू का उत्पादन भी 88.94 लाख टन है, जो वर्ष 2013-14 के उत्पादन 958.5 लाख टन रिकॉर्ड उत्पादन से कम है|

किसानों के लिय राष्ट्रीय निति और मुख्य कार्य

भारत सरकार न्र किसानों के लिय राष्ट्रिय नीती ( एन पी एफ ) का अनुमोदन किया| इस नीती के प्रावधानों में जमीन, जल, पशुधन, मत्स्य क्षेत्रों तथा जैव संसाधनों संबंधि संपत्ती सुधारों, सीमांत प्रौधोगिकियों के अनुप्रयोग जैसे समर्थन सेवाएं और निवेश, कृषि संबंधी जैव सुरक्षा पद्धतियों, अच्छी गुणवत्ता के बीज और रोगमुक्त पौधरोपण सामग्री की आपूर्ति, ग्रामीण ऊर्जा हेतु एकीकृत दृष्टिकोण आदि शामिल है| ( एन पी एफ ) के संचालन हेतु कार्ययोजना की प्रगति की देखभाल के लिए एक अंतर मंत्रालय समिति भी गठित की गई है|

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ( पी एम के एस वाई )

इस योजना का अनुमोदन 50,000 करोड़ रूपये की लागत के साथ 5 वर्षो ( 2015-16 से 2019-20) की अवधि हेतु किया गया है| इसका मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर सिंचाई में निवेशों को समन्वित करना, सिचाई सुविधा वाले कृषि क्षेत्र का विस्तार करना है|पानी के अपव्यय कम करने और खेतो में उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग, सटीक सिंचाई और अन्य पानी बचाने वाली प्रौधोगिकियों का विकाश करना|

किसान क्रेडिट कार्ड

किसान क्रेडिट कार्ड योजना ( के.सी.सी. ) पुरे देश में संचलित है, और इसका क्रियान्वयन वाणिज्यिक बैंकों, सहायक बैंकों और ग्रामीण बैंकों द्वारा किया जा रहा है| इस योजना से किसानों को उनकी आवश्यकताओं हेतु ऋण दिया जाता है| केसीसी योजना को सरलीकृत कर इसे एटीएम सक्षम डेबिट कार्ड के रूप में बदला गया है|जिससे सिविर लगाकर भुगतान की जरूरत नहीं होती तथा बिचौलियों द्वारा किसानों का शोषण नहीं होता है|

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद

भारत सरकार के कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के अंतर्गत गठित स्वायत्त संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नेतृत्व में कृषि अनुसंधान और शिक्षा का कार्य किया जाता है| देशभर में परिषद के 109 संस्थान, 78 अखिल भारतीय समन्वित परियोजना, 642 कृषि विज्ञान केन्द्र, 71 राज्य कृषि चिकित्सा, बागवानी मत्स्य विश्वविधालय और कृषि संकाय के साथ चार सामान्य विश्वविद्यालय है|

कृषि शिक्षा

उच्चतर कृषि शिक्षा की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बनाए रखने और उन्नयन हेतु उत्कृष्टता के 28 आला क्षेत्र, प्रायोगिक ज्ञान की 21 इकाइयों हेतु आर्थिक समर्थन दिया गया है|साथ ही पुस्तकालयों का विकास तथा मल्टी मिडिया लर्निग संसाधनों समेत शिक्षण का आधुनिकीकरण किया गया| प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से फैकल्टी का क्षमता निर्माण, एवं कृषि के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है|

भारत के प्रधानमंत्री Prime Minister of India

भारत के प्रधानमंत्री 

प्रधानमंत्री भारत गणराज्य की सरकार का मुखिया होता हैं। भारत के प्रधानमंत्री, का पद, भारत के शासन प्रमुख का पद है। संविधान के अनुसार, वह भारत सरकार का मुखिया, भारत के राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार, मंत्रिपरिषद का मुखिया, तथा लोकसभा में अधिक बहुमतों वाले दल का नेता होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का नेतृत्व करता है। भारत की राजनैतिक प्रणाली में, प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल में एक वरिष्ठ सदस्य होते हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 में स्पष्ट रूप से मंत्रिपरिषद की अध्यक्षता तथा संचालन हेतु प्रधानमन्त्री की उपस्थिति को आवश्यक माना गया है। उसकी मृत्यु या पदत्याग की दशा मे समस्त परिषद को पद छोडना पडता है। वह स्वेच्छा से ही मंत्रीपरिषद का गठन करता है। राष्ट्रपति मंत्रिगण की नियुक्ति उसकी सलाह से ही करते हैं। मंत्रीगण के विभाग का निर्धारण भी वही करता है। कैबिनेट के कार्य का निर्धारण भी वही करता है। देश के प्रशासन को निर्देश भी वही देता है तथा सभी नीतिगत निर्णय भी प्रधानमंत्री ही लेता है।

इस पद की स्थापना, वर्त्तमान कर्तव्यों और शक्तियों के साथ 26 जनवरी, 1947 में  संविधान के परवर्तन के साथ हुई थी। उस समय से वर्त्तमान समय तक, इस पद पर कुल 15 पदाधिकारियों ने अपनी सेवा दी है। इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले पदाधिकारी जवाहरलाल नेहरू थे जबकि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिन्हें 26 मई, 2014 को इस पद पर नियुक्त किया गया था।

    

क्र.सं. नाम जन्म मृत्यु कार्यकाल
1. जवाहरलाल नेहरू 1889 1964 15 अगस्त, 1947 – 27 मई,1964
2. गुलजारी लाल नंदा(कार्यवाहक) 1898 1998 27 मई,1964 – 09 जून,1964
3. लाल बहादुर शास्त्री 1904 1966 09 जून,1964 – 11 जनवरी,1966
4. गुलजारी लाल नंदा(कार्यवाहक) 1898 1998 11 जनवरी,1966 – 24 जनवरी,1966
5. इंदिरा गांधी 1917 1984 24 जनवरी,1966 – 24 मार्च,1977
6. मोरारजी देसाई 1896 1995 24 मार्च,1977 – 28 जुलाई,1979
7. चरण सिंह 1902 1987 28 जुलाई,1979 – 14 जनवरी,1980
8. इंदिरा गांधी 1917 1984 14 जनवरी,1980 – 31 अक्टूबर,1984
9. राजीव गांधी 1944 1991 31 अक्टूबर,1984 – 02 दिसंबर,1989
10. विश्वनाथ प्रताप सिंह 1931 2008 02 दिसंबर,1989 – 10 नवंबर,1990
11. चन्द्रशेखर 1927 2007 10 नवंबर,1990 – 21 जून,1991
12. पी.वी.नरसिम्हा राव 1921 2004 21 जून,1991 – 16 मई,1996
13. अटल बिहारी वाजपेयी 1924   16 मई,1996 – 01 जून,1996
14. एच.डी.देवेगौडा 1933   01 जून,1996 – 21 अप्रैल, 1997
15. इंद्र कुमार गुजराल 1919 2012 21 अप्रैल, 1997 – 19 मार्च, 1998
16. अटल बिहारी वाजपेयी 1924   19 मार्च, 1998 – 22 मई, 2004
17. डॉ.मनमोहन सिंह 1932   22 मई, 2004 – 26 मई,2014
18. नरेंद्र मोदी 1950   26 मई,2014 से अब तक

            

भारत के उप-राष्ट्रपति Vice President of India

उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा एक निर्वाचन मंडल के सदस्य करते हैं| निर्वाचन मंडल में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं| उपराष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक, कम से कम 35 वर्ष की आयु का और राज्यसभा का सदस्य बनने का पात्र होना चाहिए| उनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और इन्हें इस पद पर पुन:निर्वाचित किया जा सकता है| संविधान के अनुच्छेद-67 (ख) में निहित कार्यविधि द्वारा उन्हें पद से हटाया जा सकता है|

उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं| जब राष्ट्रपति बीमारी या किसी अन्य कारण से अपना कार्य करने में असमर्थ हों या जब राष्ट्रपति की मृत्यु या पद त्याग या पद से हटाया जाने के कारण राष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया है, तब छह महीने के भीतर नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकते हैं| ऐसी स्थिति में वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं कर सकते|

 

क्र.सं. नाम जन्म मृत्यु कार्यकाल
1. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1888 1975 1952 से 1962 तक
2. डॉ. जाकिर हुसैन 1897 1969 1962 से 1967 तक
3. वराहगिरि वेंकटगिरि 1884 1980 1967 से 1969 तक
4. गोपाल स्वरूप पाठक 1896 1982 1969 से 1974 तक
5. बी.डी. जत्ती 1913 2002 1974 से 1979 तक
6. न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह 1905 1992 1979 से 1984 तक
7. आर. वेंकटरमण 1910 2009 1984 से 1987 तक
8. डॉ. शंकर दयाल शर्मा 1918 1999 1987 से 1992 तक
9. के. आर. नारायणन 1920 2005 1992 से 1997 तक
10. कृष्णकांत 1927 2002 1997 से 2002 तक
11. भैरों सिंह शेखावत 1923 2010 2002 से 2007 तक
12. मोहम्मद हामिद अंसारी 1937 11अगस्त, 2007 से अब तक