अरुणाचल प्रदेश Arunachal Pradesh

अरुणाचल प्रदेश को 20 फरवरी,1987 को पूर्ण राज्य का अधिकार मिला| 1972 तक यह पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी के नाम से जाना जाता था|20 जनवरी, 1972 को इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला और अरुणाचल प्रदेशनाम दिया गया| 15 अगस्त, 1975 को चयनित विधानसभा का गठन किया गया तथा पहली मंत्री परिषद ने कार्यभार ग्रहण किया| प्रथम आम चुनाव फरवरी 1978 में करवाया गया| इस राज्य में कुल 16 जिले है| राज्य की राजधानी ईटानगर,जो पापुर जिले में स्थित है| अरुणाचल प्रदेश की सीमाएँ दक्षिण में असम दक्षिणपूर्व मे नागालैंड पूर्व मे बर्मा/म्यांमार पश्चिम मे भूटान और उत्तर मे तिब्बत से मिलती हैं। प्रदेश की मुख्य भाषा हिन्दी और असमिया है।


आजकल नकदी फसलों जैसे-आलू, और बागबानी की फसलें जैसे सेव, संतरे और अनन्नास आदि को प्रोत्साहन दिया जा रहा है इसके अलावा कृषि मुख्य पैदावार चावल, मक्का, जौ एवं मोथी हैं। अरुणाचल प्रदेश की मुख्य फ़सलों में चावल, मक्का, बाजरा, गेहूँ, जौ, दलहन, गन्ना, अदरक और तिलहन हैं।

आंध्र प्रदेश Andra Pradesh

आंध्र प्रदेश भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित एक राज्य है। क्षेत्रफल के अनुसार यह भारत का चौथा सबसे बड़ा और जनसंख्या(4.9 करोड़, 2011 के अनुसार) की दृष्टि से आठवां सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर हैदराबाद है। फरवरी 2014 को भारतीय संसद ने अलग तेलंगाना राज्य को मंजूरी दे दी। तेलंगाना राज्य में दस जिले तथा शेष आन्ध्र प्रदेश में 13 जिले होंगे। दस साल तक हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी होगी हैदराबाद केवल दस साल के लिये राजधानी रहेगी, दस साल के बाद अमरावती शहर को राजधानी का रूप दे दिया जायेगा। भारत के सभी राज्यों में सबसे लंबा समुद्र तट गुजरात में (1600 कि॰मी॰) है, दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश राज्य का समुद्र तट (972 कि॰मी॰) है।


आंध्र प्रदेश भारत के उत्तर में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में तमिलनाडु और पश्चिम में कर्नाटक से घिरा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से आन्ध्र प्रदेश को भारत का धान का कटोरा कहा जाता है। यहाँ की फसल का लगभग 80% से ज़्यादा हिस्सा चावल है। इस राज्य में दो प्रमुख नदियाँ, गोदावरी और कृष्णा बहती हैं। तेलुगू राज्य की राजभाषा है,अन्य हिन्दी, उर्दू, बंजारी भाषा बोली जाती है| और राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए आय का मुख्य स्रोत कृषि रहा है|

पोषक तत्व तथा प्राप्ति के स्रोत Nutrients and Sources of Acquisition

कार्बोहाइड्रेट्स

कार्बोहाइड्रेट्स, कार्बनिक पदार्थ हैं, जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन व आक्सीजन होते है। इसमें हाइड्रोजन व आक्सीजन का अनुपात जल के समान होता है। कुछ कार्बोहाइड्रेट्स सजीवों के शरीर के रचनात्मक तत्वों का निर्माण करते हैं जैसे कि सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज, काइटिन तथा पेक्टिन। जबकि कुछ कार्बोहाइड्रेट्स उर्जा प्रदान करते हैं, जैसे कि मण्ड, शर्करा, ग्लूकोज़, ग्लाइकोजेन. कार्बोहाइड्रेट्स स्वाद में मीठा होते हैं। यह शरीर मे शक्ति उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है। जो हमे सभी प्रकार के अनाज, बिस्कुट, चीनी, गुड, मुरब्बा, मिठाइयां आदि से प्राप्त होते है|

वसा

वसा अर्थात चिकनाई शरीर को क्रियाशील बनाए रखने में सहयोग करती है। वसा शरीर के लिए उपयोगी है, किंतु इसकी अधिकता हानिकारक भी हो सकती है। यह मांस तथा वनस्पति समूह दोनों प्रकार से प्राप्त होती है। इससे शरीर को दैनिक कार्यों के लिए शक्ति प्राप्त होती है। इसको शक्तिदायक ईंधन भी कहा जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 100 ग्राम चिकनाई का प्रयोग करना आवश्यक है। इसको पचाने में शरीर को काफ़ी समय लगता है। जो हमे घी, मक्खन, मछली, वनस्पति, तेल, बादाम, काजू, अखरोट, चर्बी, आदि से प्राप्त होते है|

प्रोटीन

प्रोटीन एक कार्बनिक पदार्थ है जिसका गठन कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन एवं नाइट्रोजन तत्वों के अणुओं से मिलकर होता है। कुछ प्रोटीन में इन तत्वों के अतिरिक्त आंशिक रूप से गंधक, जस्ता, ताँबा तथा फास्फोरस भी उपस्थित होता है। जो हमे दूध से बने भोज्य पदार्थ, पालक, सलाद, सब्जियां, पनीर, मछली आदि से प्राप्त होते है|

खनिज लवण

आहारीय खनिज वे खनिज होते हैं, जो आहार के संग शरीर को मिलते हैं एवं पोषण करने में सहायक होते हैं। शरीर के लिए पांच महत्त्वपूर्ण तत्त्व कैल्शियम, मैग्नेशियम, फ़ास्फ़ोरस, पोटाशियम और सोडियम बहुत आवश्यक होते हैं। जो हमे दूध, अंडे, दही, पालक, सलाद, सब्जियां, पनीर, मछली, आदि से प्राप्त होते है|

जल

जल या पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना होता है| जल सभी प्राणियों के जीवन का आधार है| पीने का शुद्ध जल वर्षा झरने भूमिगत स्रोत फलों आदि से प्राप्त होता है| इसका सूत्र H2O होता है|

  1. विटामिन -B1(थायमिन)

स्त्रोत – चावल का छिलका, मटर के बीज आदि।

कमी से होने वाले रोग

लगातार पोलिस चावल खाने से B1 की कमी हो जाती है जिससे बेरी-बेरी रोग हो सकता है।

  1. विटामिन -B2 (राइबोप्लेविन)

स्त्रोत – दूध, फल, अनाज, यकृत।

कमी से होने वाले रोग

मुह में छाले होने लगते हैं।

  1. विटामिन -B3 (नियासिन)

स्त्रोत – चावल की भूसी, शकरकंद, यकृत

कमी से होने वाले रोग

पेलेग्रा रोग व मानसिक रोग होने लगते हैं। बाल सफेद होने लगते हैं।

  1. विटामिन -B5 (पेंटोथेनिक)

स्त्रोत – अंकुरिकत अनाज, हरी सब्जियां, यकृत

कमी से होने वाले रोग

डायरिया, डिमेंशन, डर्मेटाइटिस

  1. विटामिन -B6 (पाइरीडॅाक्सीन)

स्त्रोत – साबुत अनाज, अण्डा

कमी से होने वाले रोग

एनीमिया(खुन की कमी) हो जाता है।

  1. विटामिन -B9 (फोलिक अम्ल)

स्त्रोत – हरी सब्जीयां, सोयाबीन, यकृत

कमी से होने वाले रोग

छाले, अल्सर

7.विटामिन -B12 (सायनोकोबाल्मीन)

स्त्रोत – दुध, अण्डा, यकृत

कमी से होने वाले रोग

यह विटामिन RBC को परिपक्व करता है इसलिए इसकी कमी से RBC की संख्या घट जाती है व आकार बढ़ जाता है जिससे पर्नीसियस एनीमिया नामक रोग हो जाता है। इसमें कोबाल्ट धातु पायी जाती है।

भारत के राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश States and Union Territories of India

  1. क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टी से भारत एक विशाल देश हैं, जहाँ भौगोलिक विविधता के साथ साथ सांस्कृतिक और भाषाई विविधता भी है| इसके माथे पर एक तरफ जहाँ हिमालय पर्वत रूपी मुकुट(उत्तर दिशा में) सुशोभित है, वहीं दूसरी तरफ सुदूर दक्षिण में हिंद महासागर इसका पदक्षान करता है| इसके दक्षिण पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण पश्चिम में अरब सागर है| इसका सुदूर दक्षिण हिस्सा (इंदिरा प्वाइंटबड़ा निकोबार) है, जो अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित है|

    भारत के राज्य

क्र.स. राज्य का नाम राज्य का क्षेत्रफल(वर्ग किलोमीटर में) राज्य की राजधानी राज्य में कुल जिले राज्य में बोली जाने वाली भाषा
1. अरुणाचल प्रदेश 83,743 ईटानगर 16 मोनपा,मिजी, अका,शेरदूकपने, अपतानी,तागिन, हिलमिरी आदि
2. असम 78,438 दिसपुर 33 असमिया
3. आंध्र प्रदेश 1,60,205 अमरावती  13 तेलुगू, हिन्दी, उर्दू
4. गुजरात 1,96,024 गांधीनगर 33 गुजराती
5. महाराष्ट्र 3,07,713 मुंबई 36 मराठी
6. मणिपुर 22,327 इम्फाल 9 मणिपुरी
7. राजस्थान 342,239 जयपुर 33 हिन्दी,मारवाड़ी
8. उत्तर प्रदेश 2,40,928 लखनऊ 75 हिन्दी,उर्दू
9. उत्तराखण्ड 53,483 देहरादून(अस्थायी) गैरसैण(प्रस्तावित) 13 हिन्दी, अंग्रेजी, गढवाली, कुमाऊँनी
10. पश्चिम बंगाल 88,752 कोलकाता 22 बांग्ला
11. बिहार 94,163 पटना 38 हिन्दी
12. छत्तीसगढ़ 1,35,192  रायपुर 27 हिन्दी
13. गोवा 3,702 पणजी 2 हिन्दी, मराठी, कन्नड़
14. हरियाणा 44,212 चंडीगढ़ 22 हिन्दी
15. हिमाचल प्रदेश 55,673 शिमला 12 हिन्दी और पहाड़ी
16. जम्मू और कश्मीर 2,22,236 लगभग श्रीनगर (ग्रीष्मकाल)  जम्मू(शीतकाल में) 22 उर्दू, डोगरी, कश्मीरी, लद्द्खी, बाल्टी, पहाड़ी, पंजाबी,गुजरी और दादरी,आदि
17. झारखंड 79,716 रांची 24 हिन्दी
18. कर्नाटक 1,91,791 बंगलुरु 30 कन्नड़
19. केरल 38,852 तिरुवंनतपुरम 14 मलयालम
20 मध्य प्रदेश 3,08,252 भोपाल 51 हिन्दी
21. मेघालय 22,429 शिलांग 11 खासी, पनर, गारो,
22. मिजोरम 21,081 आईजॉल 8 मिजो, लुशाई
23. नगालैंड 16,579 कोहिमा 11 हिन्दी, नागामी, 16 आदिवासी  भाषा अन्य
24. ओडिशा 1,55,707 भुनेश्वर 30 ओडिया
25. पंजाब 50,362 चंडीगढ़ 22 पंजाबी
26. सिक्किम 7,096 गंगटोक 4 लेप्चा, भूटिया, नेपाली, लिंबू, सिक्किमी
27. तमिलनाडू 1,30,060 चेन्नई 32 तमिल
28. त्रिपुरा 10,486 अगरतला 8 बांग्ला, कोकबोरक
29.  तेलंगाना 1,14,840  हैदराबाद 31 तेलुगु, उर्दू

केंद्रशासित प्रदेश

क्र.स. राज्य का नाम राज्य का क्षेत्रफल(वर्ग किलोमीटर में) राज्य की राजधानी राज्य में कुल जिले राज्य में बोली जाने वाली भाषा
1. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह 8,249 पोर्ट ब्लेयर 3 हिन्दी, निकोबारी, बांग्ला, तमिल, तेलगु, मलयालम
2. चंडीगढ़ 114 चंडीगढ़ 1 हिन्दी, पंजाबी
3. दादरा और नगर हवेली 491 सिलवासा 1 गुजराती, हिन्दी
4. दमन और दीव 111 दमन 2 गुजराती
5. दिल्ली 1,483 दिल्ली 1 हिन्दी, पंजाबी, उर्दू
6. लक्षद्वीप 30 कवारत्ती 1 मलयालम, धिवेही, और द्वीप भाषा
7. पुद्दुचेरी 490 पुद्दुचेरी 4 तमिल, तेलगु, मलयालम, फ्रेंच, और अंग्रेजी

 

जैन समाज के त्यौहार Festivals of jain society

जैन पर्वों का सम्बन्ध लौकिक जगत से ना होकर आत्मा से है| आत्मा शुध्दि जैन पर्वों की पहली विशेषता है| व्रत, उपवास, एकाशन, दर्शन, पूजन, भक्ति, स्वाध्याय, उपदेश श्रमण से आत्मा के द्वेष विकारों को दूर करने का प्रयास किया जाता है| जैन पर्व आत्मजयी बनने की प्रेरणा देते है| जैन समाज में मुख्य पर्व निम्नलिखित है|

  1. दशलक्षण पर्व  प्रतिवर्ष चैत्र, भाद्रपद व माध माह की शुक्ल पंचमी से पूर्णिमा तक दशलक्षण पर्व मनाया जाता है| यह पर्व किसी व्यक्ति से संबंधित ना होकर आत्मा के गुणों से संबंधित है|
  2. पर्युषण पर्व जैन धर्म में पर्युषण पर्व महापर्व कहलाता है| पर्युषण का सात्विक अर्थ है, निकट बसना दिगम्बर परम्परा में इस पर्व का नाम दशलक्षण के साथ जुड़ा हुआ है जिसका प्रारंभ भाद्रपद सुदी पंचमी से होता है और समापन चतुर्दशी को होता है| श्वेताम्बर परम्परा में इस पर्व का प्रारंभ भाद्रपद कृष्णा बारस से होता है व समाज भाद्रपद शुक्ला पंचमी को होता है| अंतिम दिन संवत्सरी पर्व मनाया जाता है व जैन समाज, सभी लोगों से अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है|
  3. ऋषभ जयंती चैत्र कृष्ण नवमी को ऋषभ जयंती पर्व मनाया जाता है| इस दिन जैन समाज के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव का जन्म हुआ|
  4. महावीर जयंती 24वीं तीर्थकर भगवन महावीर का जन्म दिन चैत्र शुकल त्रयोदशी को महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है| इस दिन भगवन महावीर के जीवन से संबंधित झांकियां निकली जाती है|श्री महावीर जी(करौली) में इस दिन विशाल मेले का आयोजन होता है|
  5. सुगंध दशमी पर्व भाद्रपद शुक्ला तृतीय को जैन मंदिरों में सुगंधित द्रव्यों द्वारा सुगंध करके यह पर्व मनाया जाता है|
  6. रोट तीज भाद्रपद शुक्ला तृतीयको जैन मतानुयायी रोट तीज का पर्व मनाते है| जिसमें खीर व रोट(मोटी मिस्सी रोटियाँ) बनाई जाती है|
  7. पढवा ढ़ोक यह दिगम्बर जैन समाज का क्षमायाचना पर्व है जो आश्विन कृष्णा एकम को मनाया जाता है|

मुस्लिम समाज के त्यौहार Festivals of Muslim society

1 मोहर्रम

यह मुसलमानों के हिजरी सन का पहला महिना है| इस माह में हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और इंसाफ के लिए जुल्म और सितम से लड़ते हुए कर्बला के मैदान में शहादत पाई थी लेकिन धर्म विरोधियों के आगे सिर नहीं झुकाया था|उसी की याद में मोहर्रम मनाया जाता है| इस दिन ताजिया निकले जाते है| इन ताजियों को कर्बला के मैदान में दफनाया जाता है|

2 ईद उल मिलादुलनबी(बारावफात, रबी उल अव्वल)

यह त्यौहार पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्म दिन की याद में मनाया जाता है| मोहम्मद साहब का जन्म 570 ई. में मक्का(सऊदी अरब) में हुआ था| इस दिन जगह जगह जुलुस निकले जाते है| व हजरत मोहम्मद की जीवनी व शिक्षाओं पर प्रकाश डाला जाता है, व विशेष प्रार्थनाएं की जाता है|

3 ईद उल फितर(मीठी ईद)

इसे सिवैयों की ईद भी कहा जाता है| ईद शब्द का अर्थ ख़ुशी या हर्ष होता है| मुस्लिम बन्धु रमजान के पवित्र माह में 30 रोज तक रोजे अदा करने के बाद शुक्रिया के तौर पर इस त्यौहार को मनाते है| ईदगाह में सामूहिक नमाज अदा करने के बाद सभी एक दुसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते है| मीठी सिवैयां व् अन्य पकवान बनाकर खिलाये जाते है| यह भाई चारे का त्यौहार है|

4 इदुलजुहा(बकरा ईद)

यह क़ुरबानी का त्यौहार है जो पैगम्बर हजरत इब्राहीम द्वारा अपने लड़के हजरत इस्माइल की अल्लह को क़ुर्बानी देने की स्मृति में मनाया जाता है|इस दिन मुस्लमान प्रतीक के रूप में बकरे की क़ुर्बानी देते है| इदुलजुहा के माह में ही मुस्लमान हज करते है|

5 शबेरात

यह त्यौहार शाबान माह की 14वीं तारीख को मनाया जाता है| यह माना जाता है, की इस दिन हजरत मुहम्मद साहब की आकाश में अल्लाह से मुलाकात हुई थी| इस दिन मुसलमान भाई अपनी भूलों व् पापों की माफ़ी के लिए खुदा से प्रार्थना करते है|

6 शबे-कद्र

यह माना जाता है, की इस दिन कुरान शरीफ को उतारा गया था| यह रमजान की 27वीं तारीख को मनाया जाता है|

7 चेहल्लुम

यह मोहर्रम के चलिस दिनों बाद सफर मास की बीसवीं तारीख को मनाया जाता है|

भारतीय राजनीतिक संरचना Indian political structure

राज्यों का संघ भारत, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है| जिसमें शासन की संसदीय प्रणाली है| गणराज्य 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकृत और 26, जनवरी 1950 को लागु संविधान की व्यवस्थाओं के अनुसार प्रशासित किया गया|

संविधान में विधायी शक्तियां संसद एवं राज्य विधानसभाओं में विभजित है| तथा शेष शक्तियां संसद को प्राप्त है| संविधान में संशोधन का अधिकार भी भी संसद को प्राप्त है| संविधान में न्यायपालिका, भारत के नियंत्रण तथा महालेखा पारीक्षक , लोक सेवा आयोगों और मुख्य निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता  बनाए रखने के लिए प्रावधान है|

केंद्र और उसके क्षेत्र

भारत में 29 राज्य और सात केंद्रशासित प्रदेश है| ये राज्य निम्न है: आंध्र प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, कर्नाटका, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडू, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश, और पश्चिम बंगाल|

केन्द्रशासित प्रदेश: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, लक्षद्वीप तथा पुद्दुचेरी|

नागरिकता

संविधान में संपूर्ण भारत में एक समान नागरिकता की व्यवस्था की गई है, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक मन गया है, जो संविधान लागू होने के दिन 26 जनवरी, 1950 से स्थाई रूप से भारत में रहता हो, जो भारत में पैदा हुआ हो, जिसके माता पिता में से किसी एक का जन्म भारत में हुआ हो, जो सामान्यता कम से कम पांच साल से भारत क्षेत्र में रहता हो| नागरिक अधिनियम, 1955 में संविधान लागू होने के पश्चात नागरिकता ग्रहण करने, निर्धारित करने के संबंध में प्रावधान किए गए है|

मौलिक अधिकार

संविधान में सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से बुनयादी स्वतंत्रता की व्यवस्था की गई है| संविधान में मोटे तौर पर छः प्रकार की स्वतंत्रता की मौलिक अधिकारों के रूप में गारंटी डी गई है, जिसकी सुरक्षा के लिए न्यायालय की शरण लि जा सकती है| संविधान के तीसरे भाग, अनुछेद-12 से 35 तक, में मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है| ये मौलिक अधिकार निम्न है:-

1.समानता का अधिकार: कानून के समक्ष समानता, धर्म, वंश, जाती, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध और रोजगार के लिए समान अवसर|

2.विचारों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का अधिकार: सम्मेलन करना, संस्था या केंद्र बनाने, देश में सर्वत्र आने जाने, भारत के किसी भी भाग में रहने तथा कोई रोजगार या व्यवस्था करने का अधिकार (इनमें से कुछ अधिकारों को देश की सुरक्षा, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता में सीमित किया गया है)

  1. शोषण से रक्षा का अधिकार: इसके अंतर्गत सभी प्रकार की बेगार, बालश्रम और व्यक्तियों के क्रय विक्रय करने का निषेध किया जाता है|
  2. अंतःकरण की प्रेरणा तथा धर्म को निर्बाध रुप से मनाने, उसके अनुरूप आचरण करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार|
  3. नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी संस्कृति, भाषा और लिपि को संरक्षित करने तथा अल्पसंख्यकों द्वारा पसंद की शिक्षा ग्रहण करने एवं शिक्षा संस्थानों की स्थापना करने का अधिकार|
  4. मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए संवैधानिक उपायों का अधिकार|

मौलिक कर्तव्य

1976 में पारित संविधान में 42 वें संशोधन के अंतर्गत, नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है| यह कर्तव्य संविधान के भाग चार ‘ए’ के अनुच्छेद 51 ‘क’ में दिए गए हैं| इसमें अन्य बातों के अलावा यह कहा गया है कि नागरिकों का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें, स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले आदर्शों का अनुसरण करें, देश की रक्षा करें और कहे जाने पर राष्ट्रीय सेवा में जुट जाएं| धर्म, भाषा और क्षेत्रीय तथा वर्ग संबंधि विभिन्नताओं को बुलाकर सदभाव और भाईचारे की भावनाओं को बढ़ावा दें|

राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत

संविधान में निहित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत यधपि न्यायालयों द्वारा लागू नहीं कराया जा सकते| तथापि वे देश के प्रशासन का मूलभूत आधार है और सरकार का यह कर्तव्य है कि वह कानून बनाते समय इन सिद्धांतों का पालन करें\ यह सिद्धांत संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 36 से 51 में दिए गए हैं| उनमें कहा गया है- सरकार ऐसी प्रभावी सामाजिक व्यवस्था कायम करके लोगों के कल्याण के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगी, जिससे राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय का पालन हो| सरकार ऐसी नीति निर्देशन करेगी जो सभी स्त्री पुरुषों को जीवनयापन के लिए यथेष्ट अवसर दें, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा अपनी आर्थिक क्षमता, विकास की सीमाओं के अनुसार सबको काम तथा शिक्षा दिलाने की प्रभावी व्यवस्था करें और बेरोजगारी, बुढ़ापे, बीमारी तथा अपंगता या अन्य प्रकार की अक्षमता की स्थिति में सबको वित्तीय सहायता दे| सरकार श्रमिकों के लिए निर्वाह- वेतन, कार्य की मानवोचित दशाओं, रहन सहन के अच्छे स्तर तथा उधोगों के प्रबंधन में उनकी पूर्ण भागीदारी के लिए भी प्रयतन करेगी|

आर्थिक क्षेत्र में, सरकार को अपनी नीति इस ढंग से लागू करनी चाहिए जिससे कि समाज के भौतिक संसाधनों पर अधिकार और उनका लोगों के बीच इस प्रकार वितरण हो कि वे सभी लोगों के कल्याण के लिए उपयोगी सिद्ध हो और यह सुनिश्चित हो कि आर्थिक व्यवस्था को लागू करने के परिणामस्वरुप सर्वसाधारण के हितों के विरुद्ध धन और उत्पादन के साधन कुछ भी लोगों के पास केंद्रीय नहीं हो सके|

कुछ अन्य महत्वपूर्ण निर्देशांक:-

  1. बच्चों को स्वास्थ वातावरण में विकास के लिए अवसर तथा सुविधाएं उपलब्ध कराना|
  2. 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करना|
  3. अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना|
  4. ग्राम पंचायतों का गठन: करना कार्यपालिका से न्यायपालिका को अलग रखना|
  5. संपूर्ण देश के लिए समान नागरिक संहिता की घोषणा|
  6. राष्ट्रीय स्मारकों की सुरक्षा: समान अवसरों के आधार पर न्याय को बढ़ावा देना|
  7. नि:शुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था|
  8. पर्यावरण की सुरक्षा तथा सुधार|
  9. वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा|
  10. राष्ट्रों के बीच न्यायोचित भाषा तथा समानतापूर्ण संबंधों को प्रोत्साहन|
  11. अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों की शर्तों का साम्मान एवं अंतरराष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने को बढ़ावा देना|

कार्यपालिका

केंद्रीय कार्यपालिका के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रीपरिषद होता है, जो राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देता है|

राष्ट्रपति

राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचन मंडल के सदस्य अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा करते हैं| इस निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों तथा राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं| राज्यों के बीच आपस में समानता तथा राज्य और केंद्रों के बीच समानता बनाए रखने के लिए प्रत्येक मत को उचित महत्व दिया जाता है| राष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक, कम से कम 35 वर्ष की आयु तथा लोकसभा का सदस्य बनने का पात्र होना चाहिए| राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है तथा पुनर्निर्वाचित किया जा सकता है| संविधान के अनुच्छेद-61 में निहित प्रक्रिया द्वारा उन्हें पद से हटाया जा सकता है| वह उपराष्ट्रपति को संबंधित स्व-हस्तलिखित पत्र द्वारा पद त्याग कर सकते है|

कार्यपालिका के समस्त अधिकार राष्ट्रपति में निहित है| वह उनका उपयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ सरकारी अधिकारियों द्वारा कराते है| रक्षा सेनाओं की सर्वोच्च कमान भी राष्ट्रपति के पास होती है| राष्ट्रपति को संसद का अधिवेशन बुलाने, उसका सत्रावसान करने, संसद को संबोधित करने तथा संदेश भेजने, लोकसभा को भंग करने, दोनों सदनों के अधिवेशन काल को छोड़ कर किसी भी समय अध्यादेश जारी करने, बजट तथा वित्त विधेयक प्रस्तुत करने की सिफारिश करने तथा विधेयकों को स्वीकृति प्रदान करने, क्षमादान देने, दंड रोकने अथवा उनमें कमी या परिवर्तन करने या कुछ मामलों में दंड को स्थगित करने, छूट देने या दंड को बदलने के अधिकार प्राप्त होते हैं| किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के विफल हो जाने पर राष्ट्रपति उस सरकार के संपूर्ण या कोई भी अधिकार अपने हाथ में ले सकते हैं|

यदि राष्ट्रपति को इस बारे में विश्वास हो जाए कोई ऐसा गंभीर संकट पैदा हो गया है जिससे देश अथवा उसके किसी भी बात की सुरक्षा को युद्ध अथवा बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का खतरा उत्पन्न हो गया है, तो वह देश में आपात स्थिति की घोषणा कर सकते हैं|

उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा एक निर्वाचन मंडल के सदस्य करते हैं| निर्वाचन मंडल में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं| उपराष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक, कम से कम 35 वर्ष की आयु का और राज्यसभा का सदस्य बनने का पात्र होना चाहिए| उनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और इन्हें इस पद का पुननिर्वाचित किया जा सकता है| संविधान के अनुच्छेद-67 (ख) में निहित कार्यविधि द्वारा उन्हें पद से हटाया जा सकता है|

उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं| जब राष्ट्रपति बीमारी या किसी अन्य कारण से अपना कार्य करने में असमर्थ हों या जब राष्ट्रपति की मृत्यु या पद त्याग या पद से हटाया जाने के कारण राष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया है, तब छह महीने के भीतर नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकते हैं| ऐसी स्थिति में वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं कर सकते|

मंत्रिपरिषद्

कार्य-संचालन में राष्ट्रपति की सहायता करने तथा उन्हें परामर्श देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद् की व्यवस्था है| प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के परामर्श से करते हैं मंत्रिपरिषद् संयुक्त रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं| प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह केंद्र के कार्यों के संचालन के संबंध में मंत्रिपरिषद् के निर्णय, कानून बनाने के प्रस्तावों तथा उनसे संबंधित जानकारियों से राष्ट्रपति को अवगत कराते रहें| मंत्रिपरिषद् में कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्यमंत्री तथा उपमंत्री होते हैं|

विधायिका

केंद्र की विधायिका को ‘संसद’ कहा जाता है| इसमें राष्ट्रपति, दोनों सदनों (लोकसभा तथा राज्यसभा) शामिल है| संसद के दोनों सदनों की बैठक पिछली बैठक के 6 महीने के भीतर बुलानी होती है| कुछ अवसरों पर दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन किया जाता है|

राज्यसभा

संविधान में व्यवस्था है की राज्यसभा में साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा आदि क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करेंगे तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुने हुए सदस्यों की संख्या 238 से अधिक नहीं होगी| राज्यसभा के सदस्यों का विवरण परिशिष्ट में दिया जाता है|

राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है; राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा एकल हस्तांतरणीय मतों के आधार पर अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के जरिए किया जाता है| केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों का चुनाव संसद द्वारा निर्धारित कानून के अंतर्गत किया जाता है| राज्यसभा कभी भी भंग नहीं होती और उसके एक-तिहाई सदस्य हर 2 वर्ष के बाद अवकाश ग्रहण करते हैं|

लोकसभा

लोकसभा के सदस्य व्यस्क मताधिकार के आधार पर लोगों द्वारा सीधे चुने जाते हैं| संविधान में लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या अब 552 है 530 सदस्य राज्यों और 20 सदस्य केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा राष्ट्रपति को आंगल भारतीय (एंग्लो इंडियन) समुदाय के दो व्यक्तियों को उस हालत में मनोनीत करने का अधिकार होता है, जब उन्हें ऐसा लगे लगे की सदन में इस समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है|

लोकसभा के लिए विभिन्न राज्यों की सदस्य संख्या का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है कि राज्य के लिए निर्धारित सीटों की संख्या और उस राज्य की जनसंख्या का अनुपात, जहां तक व्यवहारिक रूप से संभव हो, सभी राज्यों में समान हो|

वर्तमान लोकसभा के 543 सदस्य हैं| इनमें से 530 सदस्य राज्यों से तथा 13 सदस्य केंद्रशासित प्रदेशों से सीधे चुने गए हैं| 84वें संविधान संशोधन विधेयक 2001 के तहत विभिन्न राज्यों में लोकसभा की वर्तमान सीटों की कुल संख्या का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया है तथा 2026 के बाद की जाने वाली पहली जनगणना तक इसमें कोई फेर-बदल नहीं किया जाएगा|

लोकसभा का कार्यकाल, यदि उसे भंग न किया जाए, सदन की पहली बैठक की तिथि से लेकर 5 वर्ष होता है| किंतु यदि आपात स्थिति लागू हो तो यह अवधि संसद द्वारा कानून बनाकर बढ़ाई जा सकती है| परंतु यह वृद्धि एक समय पर 1 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती और आपात स्थिति समाप्त होने के बाद किसी भी हालत में 6 महीने से अधिक समय तक नहीं हो सकती है|

इसरो का उच्च क्षमता स्वदेशी विमान (फैटबॉय) का सफल परीक्षणSuccessful test of ISRO’s high capacity indigenous aircraft (Fatboy)

Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark III(GSLV  MK III) श्रीहरिकोटा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोमवार को पहली विकास उड़ान में एक उच्च क्षमता स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन को फायरिंग करके सफलतापूर्वक परीक्षण से अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट, जीएसएलवी एम III का सफल परीक्षण किया जिसे ‘फैटबॉय’ नाम दिया। लॉन्च के साथ,  इसरो ने क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। GSLV MK III में CE-20 क्रायोजेनिक नोदन इंजन का उपयोग किया गया है| इस प्रक्षेपण ने चंद्रयान-2 और एक मानव मिशन सहित अपनी महत्वाकांक्षी भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक मजबूत आधार भी स्थापित किया है| इस सफल परीक्षण से भारी उपग्रह अन्तरिक्ष में भेज सकेंगे| जीएसएलवी ऐसा बहुचरण रॉकेट होता है जो दो टन से अधिक भार के उपग्रह को पृथ्वी से 36000 कि॰मी॰ की ऊंचाई पर भू-स्थिर कक्षा में स्थापित कर देता है जो विषुवत वृत्त या भूमध्य रेखा की सीध में होता है।

GSLV  MK III को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरे लांच पैड से 5.28 बजे तक लोंच किया गया। टेकऑफ़ के करीब 16 मिनट के बाद, वाहन ने उपग्रह को भू-सिंक्रोनस स्थानान्तरण कक्ष में रखा।

GSLV  MK III की ऊंचाई- 43.43 मी. (142.5 फुट),व्यास- 4.0 मी. (13 फुट) भार- 6,40,000 कि॰ग्रा॰ (14,00,000 पौंड) है| इसका इस्तेमाल सोमवार को उपग्रह GSAT-19 को अंतरिक्ष में करने के लिए किया गया था, जिसका वजन केवल 3,136 किलोग्राम था|

  1. अपने सफल मंगल मिशन के बाद, यह अंतरिक्ष में एक आदमी को भेजने के लिए इसरो के अगले कदम है।
  2. इसका मुख्य उद्देश्य चार-टन सामान के साथ रॉकेट की वायुमंडलीय उड़ान स्थिरता का परीक्षण करना है। दूसरा क्रू मॉड्यूल वायुमंडलीय पुनः प्रवेश प्रयोग नामक चालक दल के मॉड्यूल के पुनः प्रवेश विशेषताओं का अध्ययन करना है।
  3. इसरो के मानव मिशन के लिए अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां भी विकसित की जानी चाहिए। ये अन्य केंद्रों पर समांतर तरीके से विकसित किए जा रहे हैं। लेकिन वातावरण से बाहर कैप्सूल की वसूली के लिए सबसे पहले परीक्षण किया जाएगा।
  4. जीएसएलवी मार्क तृतीय सबसे बड़ी अगली पीढ़ी के रॉकेट है, जो इनसैट -4 वर्ग के भारी संचार उपग्रहों को लॉन्च करने में इसरो स्व-निर्भर बनाने की कल्पना की गई है, जो कि 4,500-5000 किलोग्राम वजन करती है। परिचालन के बाद, इस रॉकेट में संचार उपग्रहों के चार टन वर्ग इंटैट श्रृंखला को भर्ती करने की क्षमता होगी, जो वर्तमान में एरियन स्पेस के माध्यम से शुरू की जा रही है।
  5. पिछले चार वर्षों के दौरान जीएसएलवी रॉकेट का दूसरा मिशन है,  जब इस तरह की दो लॉन्च 2010 में विफल हुई थी।

ऊष्मा स्थानांतरण और स्थानांतरण की विधियांMethods of Heat Transfer and Transfer

 

 

ऊष्मा का एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरण होता है और एक बॉडी से दूसरी बॉडी में जाने के लिए उसे किसी माध्यम की जरूरत होती है। और कभी कभी जरूरत नहीं होती, ऊष्मा संवहन के निम्नलिखित माध्यम होते है।

  1. चालन
  2. संवहन
  3. विकिरण
  4. चालन

एक तत्व से दूसरे तत्व में जाने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है उसे संचरण कहते हैं ऊष्मा को एक तत्व उसे दूसरे तत्व में जानने के लिए दूरी बहुत कम होती है अथवा दोनों तत्व में मूवमेंट नहीं होता जैसे ऊष्मा का स्थानांतरण लोहे की छड़ में एक सिरे से दूसरे सिरे की ओर होता है।

 

चालन के लिए फॉरियर का नियम

यह उसमा स्थानांतरण का मुख्य नियम है क्योंकि यह हमें उसमा का प्रारंभिक समीकरण देता है फोर ईयर नियम एक अक्षर स्थिर ऊष्मा बहाव के ऊपर निर्भर है एक अक्षय स्थिर ऊष्मा बहाव की दर एक सतह पर स्थिर रहती है।

फॉरियर के नियमानुसार उष्मा बहाव की दर बहाव के क्षेत्रफल और तापमान में अंतर dt के समानुपाती होती है। तथा मोटाई dx के व्युत्क्रमानुपाती होती है|

2.संवहन

उष्मीय संवहन ऊर्जा स्थानांतरण की वह प्रक्रिया है। जिसमें ऊष्मा तरल के चक्रण या मिश्रण से प्रभावित होती है। संवहन द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण की प्रभाविकता तरलों के मिश्रण पर निर्भर करती है। संवहन दो प्रकार का होता है।

  1. स्वतंत्र संवहन – इसमें तरल उत्पलावन बल के प्रभाव में चक्रण करता है अर्थात ठंडे व गर्म तरल के घनत्वों में अंतर के कारण ऊष्मा का स्थानांतरण होता है।
  2. बलित संवहन – इसमें तरल का प्रवाह पम्प द्वारा करवाया जाता है। न्यूटन के अनुसार संवहन समीकरण निम्न होती है।

Q = hA(t – t’)

जहा Q = संवहन ऊष्मा दर

h = संवहन उष्मीय गुणांक

t- t’ = तापमान अंतर है।

  1. विकिरण – उष्मीय विकिरण ऊष्मा संचरण की ऐसी विधि है जो ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाती है इस विधि में किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

चालन और संवहन में ऊष्मा संचरण का मार्ग टेढ़ा मेढ़ा हो सकता है जबकि विकिरण में संचरण का मार्ग सरल रेखा होता है।

चालन और संवहन में ऊष्मा का संचरण धीरे-धीरे होता है परंतु विकिरण द्वारा ऊष्मा अति शीघ्र प्रकाश के वेग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड से पदार्थ के पृष्ठ पर पहुंचती है। ऊष्मा विकिरण संचरण का सबसे अच्छा उदाहरण सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश की किरणों द्वारा  ऊष्मा का संचरण है।

ऊष्मा विकिरण संचरण के लिए कुछ तथ्य

किरचॉफ नियम

किरचॉफ के नियमानुसार किसी निश्चित ताप पर निश्चित तरंगधैर्य परास के विकिरणों के लिए सभी वस्तुओं की एकवर्णीय उत्सर्जन तथा अवशोषण क्षमताओं का अनुपात नियत होता है और यह उसी ताप पर आदर्श कृष्णिका की स्पेक्ट्रमी उत्सर्जिन क्षमता के बराबर होता है।

या दूसरे शब्दों में कहें तो किसी निश्चित तापमान पर कुल उत्सर्जन(E) क्षमता तथा कुल अवशोषण क्षमता(a) का अनुपात सभी पदार्थों का समान होता है यदि वह पदार्थ वातावरण से साम्य में है|

स्टीफन बोल्ट्जमान नियम(Stephen Boltzmann’s Law)

स्टीपफन के अनुसार किसी पिंड के एकांक क्षेत्रफल से प्रति सेकेंड उत्सर्जित विकिरण की मात्रा पिंड के परम ताप के चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती होती है।

भारत के राष्ट्रपति President of India

भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख और भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं।, अनुच्छेद 52 के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति उनमें निहित है। सभी प्रकार के आपातकाल लगाने व हटाने वाला, युद्ध/शांति की घोषणा करने वाला होता है। वह देश के प्रथम नागरिक है। भारतीय राष्ट्रपति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक हीं पद पर रह सकते हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने हीं इस पद पर दो कार्यकाल पूरा कियें है। महामहिम प्रतिभा पाटिल भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई, 2007 को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।

क्र.सं. नाम जन्म मृत्यु कार्यकाल
1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1884 1963 26 जनवरी, 1950 – 13 मई, 1962
2. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1888 1975 13 मई, 1962 – 13 मई,1967
3. डॉ. जाकिर हुसैन 1897 1969 13 मई,1967 – 3 मई,1969
4. वराहगिरी वेंकट गिरी(कार्यवाहक) 1894 1980 3 मई,1969 – 20 जुलाई,1969
5. न्यायमूर्ति मुहम्मद हिदायतुल्लाह(कार्यवाहक) 1905 1992 20 जुलाई,1969 – 24 अगस्त, 1969
6. वराहगिरी वेंकट गिरी 1894 1980 24 अगस्त, 1969 – 24 अगस्त, 1974
7. डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद 1905 1977 24 अगस्त, 1974 – 11 फरवरी, 1977
8. बी.डी. जत्ती 1912 2002 11 फरवरी, 1977 – 25 जुलाई, 1977
9. नीलम संजीव रेड्डी 1913 1996 25 जुलाई, 1977 – 25 जुलाई, 1982
10. ज्ञानी जैल सिंह 1916 1994 25 जुलाई, 1982 – 25 जुलाई, 1987
11. आर. वेंकटरमन 1910 2009 25 जुलाई, 1987 – 25 जुलाई, 1992
12. डॉ. शंकर दयाल शर्मा 1918 1999 25 जुलाई, 1992 – 25 जुलाई, 1997
13. के.आर. नारायण 1920 2005 25 जुलाई, 1997 – 25 जुलाई, 2002
14. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम 1931 2015 25 जुलाई, 2002 – 25 जुलाई, 2007
15. श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल 1934 25 जुलाई, 2007 – 25 जुलाई, 2012
16. श्री प्रणब मुखर्जी 1935 25 जुलाई, 2012 से अब तक