प्रकाश (LIGHT)

प्रकाश

प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है,प्रकाश की प्रकृति द्वैत पाई जाती है|अर्थात प्रकाश तरंग व कण दोनों की तरह व्यवहार करता हैं|

नोट-प्रकाश की तरंग प्रकृति की व्याख्या हाइमन व हाइजेनबर्ग के द्वारा की गई|जबकि प्रकाश की कणीय प्रकृति की व्याख्या न्यूटन द्वारा की गई|

  • प्रकाश एक सीधी सरल रेखा में संचरित होता है|
  • प्रकाश एक प्रकार की अनुप्रस्थ यांत्रिक तरंगे है|
  • सूर्य का दृश्य प्रकाश सात रंगो से मिलकर बना होता हैयह सर्वप्रथम न्यूटन नामक वैज्ञानिक ने बताया|

नोट:-उष्मा का संचरण पदार्थ की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा होता है|

  1. ठोस पदार्थ-चालन विधि द्वारा
  2. द्रव पदार्थ –संवहन विधि द्वारा
  3. गैसीय पदार्थ-विकिरण विधि द्वारा

सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक विकिरणों के द्वारा लगभग 8 मिनट 20 सेकण्ड में पहुंचता है|जबकि सूर्य का प्रकाश चन्द्रमा से परावर्तित होकर पृथ्वी तक विकिरण विधियों द्वारा आने में 1.28 सेकण्ड का समय लेता है|

प्रकाश का सर्वाधिक वेग निर्वात में 3×108m/sec. पाया जाता हैं|क्योंकि निर्वात का अपवर्तनांक न्यूनतम व एक पाया जाता हैं|

प्रकाश का फोटोन सिद्धांत मैक्स प्लांक नामक वैज्ञानिक ने प्रतिपादित किया इनके अनुसार प्रकाश ऊर्जा के छोटे-चौटे बंडलों के रूप में संचरित होता हैं,जिन्हें क्वांटा कहा जाता हैं|तथा दृश्य प्रकाश के क्वांटा को फोटोन कहा जाता हैं|

प्रत्येक क्वांटा की ऊर्जा निश्चित पाई जाती है|जिसका मान क्वांटा की तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होता हैं|

E= ,E=h ,  c /

=hc/  ,E=hc /   {h=6.62×10-34 ,E=12400/A˚}

प्रकाश की तरंग सिद्धांत से सम्बन्धित घटनाएं

  1. प्रकाश का परावर्तन
  2. प्रकाश का अपवर्तन
  3. प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन
  4. प्रकाश का वर्ण विक्षेपण
  5. प्रकाश का व्यतिकरण
  6. प्रकाश का विवर्तन
  7. प्रकाश का ध्रुवण

प्रकाश की कणीय सिद्धांत से सम्बन्धित घटनाएं-

1.प्रकाश विद्युत प्रभाव 2.क्राम्पटन प्रभाव

प्रकाश का परावर्तन

सूर्य के प्रकाश को जब किसी अपारदर्शक सतह पर डाला जाता है तो प्रकाश का सतह से टकराकर लौटना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है|

प्रकाश के परावर्तन से सम्बन्धित दो नियम दिए गए|

1.आपतित किरण,अभिलम्ब व परावर्तित किरण तीनों एक ही तल में पाए जाते हैं|

2.आपतन कोण का मान परावर्तन कोण के मान के समान पाया जाता हैं|,i =

जैसे-मनुष्यों के द्वारा वस्तुओं को देखने की प्रक्रिया परावर्तन घटना से सम्बन्धित होती हैं|

नोट:-1.सामान्यत कोई भी वस्तु उस रंग की दिखलाई देती है जिस रंग को वह परावर्तित करती है|

2.जब कोई वस्तु सभी रंगो को अवशोषित कर लेती है अर्थात किसी भी प्रकाश किरण का परावर्तन नही करती है तो काली दिखलाई देती है|

3.यदि वस्तु प्रकाश के सभी रंगो का परावर्तन करती है अर्थात किसी भी रंग का अवशोषण नही करती है तो वस्तु श्वेत चमकीली दिखाई देती हैं|

प्रकाश का अपवर्तन

प्रकाश की किरणों का माध्यम परिवर्तन के कारण अपने वास्तविक मार्ग से विचलित हो जाना प्रकाश का अपवर्तन कहलाता हैं|

सामान्स्त: विचलन दो प्रकार के प्राप्त होते हैं|

1.जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम की ओर गतिशील होती है तो किरने अपने वास्तविक पथ से अभिलम्ब की ओर मुड जाती हैं|

नोट-सघन माध्यम-जिस माध्यम के लिए अपवर्तनांक का मान अधिक पाया जाता हैं|

विरल माध्यम-जिस माध्यम के लिए अपवर्तनांक का मान कम पाया जाता हैं|

2.यदि प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में गतिशील होती है तों वह अभिलम्ब से दूर हो जाती हैं|

अपवर्तन के नियम:-

1.आपतित किरण,अभिलम्ब व अपवर्तित किरण तीनों एक ही तल में उपस्थित पाये जाते हैं|

2.आपतित किरण की ज्या तथा अपवर्तित किरण की ज्या का अनुपात नियत पाया जाता है|तथा इस नियतांक मान को पदार्थ का अपवर्तनांक कहा जाता हैं|

प्रकाश के अपवर्तन से सम्बन्धित घटनाएं:-

1.आकाश में तारों का लगातार टिमटिमाते हुए दिखलाई देना|

2.पानी से भरे हुए गिलास के पेंदे में रखे सिक्के का अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर उठा हुआ दिखाई देना|

3.पानी से बहरे हुए गिलास में आंशिक रूप से डूबी हुई पेन्सिल /सीधी छड का मुडा हुआ दिखाई देना|

  1. सूर्य का उदय होने से पूर्व व अस्त होनें के पश्चात भी दिखाई देना|
  2. समुंद्रके पेंदे में स्थित मछली का अपनी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊपर उठा हुआ दिखाई देना|
  3. श्वेत प्रकाश को प्रिज्म में से गुजारने पर सात रंगो में विभाजन अपवर्तन की घटना के कारण होता हैं|

नोट:अपवर्तनांक-

प्रकाश की किरणों को अवरोधित करने की क्षमता को पदार्थ का अपवर्तनांक कहा जाता हैं|जिसका मान स्नेल के नियम से ज्ञात किया जाता हैं|

किसी भी पदार्थ के अपवर्तनांक का मान सामान्यत पदार्थ की प्रकृति व उसके तापमान पर निर्भर करता है|

तापमान का मान बढने पर पदार्थ का अपवर्तनांक कम हो जाता है|अपवर्तनांक एक इकाई रहित राशि हैं|

यदि किसी माध्यम में प्रकाश का वेग ज्ञात हो तो उस माध्यम का अपवर्तनांक ज्ञात किया जा सकता है-

प्रकाश का माध्यम में वेग=निर्वात में प्रकाश का वेग/पदार्थ का अपवर्तनांक {U=C/ , =c/u

विभिन्न प्रकार के माध्यमों में प्रकाश का वेग माध्यम के अपवर्तनांक के मान पर निर्भर करता हैं|

सघन माध्यमों में प्रकाश का वेग कम पाया जाता है जबकि विरल माध्यमों में प्रकाश का वेग अधिक पाया जाता हैं|

पूर्ण आंतरिक परावर्तन:-

प्रकाश की यह घटना अपवर्तन की एक विशिष्ट अवस्था है इसको घटित होने के लिए निम्न दो शर्तो का पालन होना चाहिए|

1.प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में गतिशील होनी चाहिए

2.आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए|{}

पूर्ण आंतरिक परावर्तन से सम्बन्धित घटनाएं:-

1.गर्मी के दिनों में रेगिस्तान में मृग मरीचिका का बनना|

2.हीरे का चमकीला दिखाई देना (2.42 सर्वाधिक अपवर्तनांक)

3.सूर्य उदय व अस्त होते समय कुछ लालिमा का दिखलाई देना|

4.विद्युत बल्बों का चमकना|

5.सोनोग्राफी व एक्स रे चित्रों का निर्माण|

6.किसी जल से भरे हुए स्थान में काले रंग की वस्तुओं को रख देने पर वो चमकीली दिखाई देती है|

7.शीशे के चटकने पर दरारों का स्पष्ट चमकते हुए दिखाई देना|

वर्ण विक्षेपण:-

वर्ण विक्षेपण की घटना में अपवर्तन की घटना घटित होती है|जब किसी निकाल प्रिज्म में से सूर्य के श्वेत प्रकाश को गुजारा जाता है तो वह श्वेत प्रकाश अपने वास्तविक सात मूल रंगो में विभेदित हो जाता है इस परिघटना को वर्ण विक्षेपण कहते है|तथा रंगो से प्राप्त चित्रों को वर्ण स्पेक्ट्रम कहा जाता हैं|

सर्वाधिक वर्ण विक्षेपण बैंगनी रंग का पाया जाता है जबकि न्यूनतम वर्ण विक्षेपण लाल रंग का पाया जाता हैं|

रंगो का समूहन:-

सामान्यत:रंग तीन प्रकार के पाये जाते है-1.प्राथमिक रंग  2.द्वितीयक/गौण रंग  3.सम्पूरक रंग

1.प्राथमिक रंग-वे रंग जिनका निर्माण अन्य रंगो के मिश्रण से नहीं किया जा सकता अर्थात जिनका प्रकृति में स्वतंत्र अस्तित्त्व पाया जाता है|इनकी संख्या सामान्यत: तीन मानी गई हैं|

R.B.G.=Red,Blue,Green

जैसे-रंगीन टेलीविजन में तोनो प्राथमिक रंग उपस्थित होते हैं|

2.द्वितीयक रंग:-वे रंग जिनका निर्माण प्राथमिक रंगो के मिश्रण से होता हैं द्वितीयक रंग कहलाते हैं|इनकी संख्या भी 3 मानी गई हैं|-Megenta,Peacock blue,Yellow

3.सम्पूरक रंग-वे रंग जीके मिश्रण से सफेद रंग का निर्माण होता है उस समय वे सम्पूरक रंग कहलाते हैं|

Red +Blue=Megenta  ,Blue+Green =Peacock blue ,Green +Red=Yellow, Red +peacock blue =White ,Blue+Yellow=White ,Green+Megenta=White ,Red+Blue+Green=White ,                       Megenta+yellow+peacock blue=White

Rainbow (इन्द्रधनुष)-

इन्द्रधनुष का बनना वर्ण विक्षेपण (अपवर्तन)घटना का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है|

-इन्द्रधनुष वर्षा के तुरंत पश्चात सूर्य के विपरीत दिशा में दिखलाई देता है|सामान्यत इन्द्रधनुष दो प्रकार के पाये जाते है|

1.प्राथमिक इन्द्रधनुष-यह इन्द्रधनुष वर्षा के तुरंत पश्चात बनता है तथा इस इन्द्रधनुष के निर्माण में बाहर की तरफ लाल रंग व अंदर की तरफ बैंगनी रंग उपस्थित होता है|अंदर की तरफ उपस्थित बैंगनी रंग मानव की आँख पर लगभग 40.8˚के कोण का निर्माण करता है जबकि बाहर की तरफ स्थित लाल रंग मनुष्य की आँख पर 42.8˚के कोण का निर्माण करता है|

2.द्वितीयक इन्द्रधनुष-यह वर्षा के कुछ समय पश्चात बनता है यह प्राथमिक इन्द्रधनुष की तुलना में धुंधला व अस्पष्ट पाया जाता हैं|

इस प्रकार के इन्द्रधनुष में बाहर की तरफ बैंगनी रंग तथा अंदर की तरफ लाल रंग पाया जाता हैं|

बाहर की तरफ उपस्थित बैगनी रंग मनुष्य की आँख पर 50.8˚ का कोण बनाता है जबकि अंदर की तरफ स्थित लाल रंग 54. 52˚के कोण का निर्माण करता हैं|

 

 

 

परमाणु भट्टी

नियंत्रित नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया-

वह नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया सिसके अंतर्गत उत्सर्जित होने वाले तीन न्युट्रोन कणों में से दो न्युट्रोन कणों को किसी भी प्रक्रिया द्वारा अवशोषित करा लिया जाता है तथा शेष बचा एक न्युट्रोन अभिक्रिया को सतत रूप से आगे गतिशील रखता हैं |

92U23556Ba141 +36Kr92 +30n1+200Mev

जैसे-परमाणु भट्टी या नाभिकीय रिएक्टर नियंत्रित नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया पर आधारित पाये जाते हैं|

नाभिकीय/परमाणु भट्टी-वह युक्ति जिसके द्वारा नाभिकीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता हैं| नाभिकीय भट्टी कहलाती हैं|

विश्व में सर्वप्रथम परमाणु भट्टी का निर्माण अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के अंतर्गत 1842 में प्रोफेसर एनरीको फर्मी के निर्देशन में किया गया|जबकि भारत की प्रथम परमाणु भट्टी ट्राम्बे (महाराष्ट्र)के अंतर्गत डा.होमी जहाँगीर भाभा के निर्देशन में बनकर तैयार हुई|जिसे अप्सरा नाम दिया गया|

भारत में 5 परमाणु भट्टी है जो क्रमश:है-अप्सरा,पूर्णिमा,जर्लिना,रुसी,साइरस |

सामान्यत: नाभिकीय भट्टियों में निम्नलिखित तीन भाग पाये जाते है-

1.ईधन कक्ष- नाभिकीय भट्टियों में ईधन के रूप में 92U23594Pu239 का उपयोग किया जाता हैं|लेकिन मुख्य रूप से भट्टियों में 92U235 का ही उपयोग किया जाता है|

2.नियंत्रक कक्ष-इस कक्ष के अंतर्गत न्युट्रोन कणों को अवशोषित करने वाले पदार्थ प्रयुक्त किये जाते है|इस कक्ष में अवशोषक पदार्थ के रूप में कैडमियम,बोरान ,जिर्कोनियम की छडो का उपयोग किया जाता हैं|

3.मंदक कक्ष-इस कक्ष के अंतर्गत न्युट्रोन की गति को कम करने वाले पदार्थ प्रयुक्त किये जाते है|मंदक के रूप में भारी जल (D2O) व कार्बन ग्रेफाईट की छडो का उपयोग किया जाता हैं|

नोट:-मंदक के रूप में प्रयुक्त करने के आधार पर नाभिकीय रिएक्टर दो प्रकार के पाये जाते है-

a.स्विमिंग पुल रिएक्टर-वे भट्टियां जिनमे मंदक के रूप में भारी जल का उपयोग किया जाता है|

b.परमाणु पाइल रिएक्टर- वे परमाणु भट्टियां जिनके अंतर्गत मंदक के रूप में कार्बन ग्रेफाईट छडो का उपयोग किया जाता है|

नाभिकीय सलंयन:-

दो या दो से अधिक हल्के नाभिक जुडकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते है तो इस प्रकार की अभिक्रिया को नाभिकीय सलंयन कहा जाता है|

नाभिकीय सलंयन अभिक्रिया को सम्पन्न होने के लिए उच्च ताप (108K)व उच्च दाब की आवश्यकता होती है|

प्रकृति में पृथ्वी पर नाभिकीय सलंयन अभिक्रिया को सम्पन्न करवाने के लिए पहले नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया सम्पन्न कराई जाती है

प्राकृतिक रूप से स्वत: नाभिकीय सलंयन अभिक्रिया सूर्य के केन्द्रीय भाग में सम्पन्न होती है|

1H1+1H32He4+0n1+25.7Mev

-सूर्य की उष्मा व प्रकाश की उत्पत्ति का कारण नाभिकीय सलयन अभिक्रिया है|

-सूर्य पर सर्वाधिक मात्रा में हाइड्रोजन गैस उपस्थित होती है

-अणु बम या हाइड्रोजन बम नाभिकीय सलयन अभिक्रिया पर आधारित है|

-नाभिकीय सलयन अभिक्रिया पर आधारित नाभिकीय भट्टियो को टोकामक कहा जाता है,तथा भारत का प्रथम टोकामक आदित्य नाम से जाना जाता हैं|

Prajamandal Movement

क्रम संख्या प्रजामंडल का नाम स्थापना वर्ष विशेष विवरण
1 जयपुर प्रजामंडल 1931, 1936-37 कर्पुरचंद पाटनी की अध्यक्षता में सर्वप्रथम 1931 में गठित लेकिन मृत प्राय रहा,चिरंजीलाल मिश्रा की अध्यक्षता में पुनर्गठित |1938 में जमनालाल बजाज अध्यक्ष बने,1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लेने वाला प्रजामंडल,जेंटिलमेंस एग्रीमेंट –सितम्बर 1942 में ज्यूर के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल व हीरालाल शास्त्री के मध्य,आजाद मोर्चा-भारत छोड़ो आन्दोलन में प्रजामंडल की निष्क्रियता से असंतुष्ट होकर बाबा हरिश्चन्द्र,रामकरण जोशी,दौलत भंडारी,हंस राय द्वारा गठित सन्गठन जिसका 1945 में प्रजामंडल में विलय हो गया|
2. (a)मारवाड़ प्रजामंडल (जोधपुर प्रजामंडल)

 

 

(b)नागरिक अधिकार रक्षक सभा

 

 

(c)मारवाड़ लोक परिषद

1934

 

1936

 

16 मई 1938

भंवरलाल सर्राफ ,अभयमल जैन व अचलेश्वर प्रसाद के प्रयासों से गठित

जनवरी 1938 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने जोधपुर आकर मारवाड़ प्रजामंडल को नई प्रेरणा दी|

10 मार्च 1936 को उत्तरदायी शासन की स्थिति का अध्ययन करने हेतु जवाहरलाल नेहरु ने जोधपुर की यात्रा की ,जोधपुर प्रजामंडल को गैर कानूनी घोषित करने पर नागरिक अधिकार रक्षक सभा नाम से नया सन्गठन बनाया|

नागरिक अधिकार रक्षक सभा को गैर कानूनी घोषित करने पर 16 मई 1938 को रणछोड़ दास गट्टानी की अध्यक्षता में मारवाड़ लोक परिषद का गठन किया|

3. मेवाड़ प्रजामंडल 24 अप्रैल 1938 माणिक्य लाल वर्मा के प्रयासों से स्थापित |

अध्यक्ष-बलवंत सिंह मेहता,उपाध्यक्ष-भूरेलाल बया,महामंत्री-माणिक्यलाल वर्मा बने|

नवम्बर 1941 को प्रथम अधिवेशन माणिक्य लाल वर्मा की अध्यक्षता में उदयपुर में हुआ,जिसमे आचार्य जे.बी.कृपलानी व विजय लक्ष्मी पंडित ने भाग लिया|

माणिक्यलाल वर्मा ने अजमेर में मेवाड़ का वर्तमान शासन नामक पुस्तिका प्रकाशित कर मेवाड़ में कुशासन की पोल खोल दी|

4. (a)बीकानेर प्रजामंडल

 

 

(b)बीकानेर राज्य प्रजा परिषद

1936

 

 

 

22 जुलाई 1942

प. मघाराम वैद्य की अध्यक्षता में गठित जिसमे भिक्षालाल बोहरा,सुरेन्द्र कुमार शर्मा,शेराराम,लक्ष्मनदास सहयोगी रहे|

बीकानेर नरेश गंगासिंह ने मघाराम को रियासत से निष्कासित कर दिया|

रघुवर दयाल गोयल  द्वारा स्थापित

5. (a)भरतपुर प्रजामंडल

 

 

 

(b)भरतपुर प्रजा परिषद

दिसम्बर 1938

 

 

 

 

25 अक्टूबर 1939

किशनलाल जोशी के प्रयासों से गोपीलाल यादव की अध्यक्षता में गठित|

साम्यवादी नेता एम.एन.राय की अध्यक्षता में भरतपुर प्रजामंडल ने फतेहपुर सीकरी में पूर्वी राजस्थान की जनता का सम्मेलन आयोजित करवाया|

सत्याग्रह आन्दोलन के पश्चात 25 अक्टूबर 1939 को राज्य सरकार और प्रजामंडल के मध्य एक समझोता हुआ,जिसमे प्रजामंडल का नाम बदलकर भरतपुर प्रजा परिषद करने पर मान्यता दी गई|

6. (a) हाडौती प्रजामंडल

 

(b) कोटा प्रजामंडल

1934

 

 

1939

प. नयनूराम शर्मा द्वारा स्थापना की गई,लेकिन मृतप्राय हो गई|

 

नयनूराम शर्मा व अभिन्न हरी ने मिलकर कोटा प्रजामंडल की स्थापना की|

7. (a)बूंदी प्रजामंडल

(b)बूंदी राज्य लोक परिषद

1931

19जुलाई 1944

कांतिलाल चौथाणी द्वारा गठित

हरिमोहन माथुर व बृजसुंदर शर्मा द्वारा गठित |

8. अलवर प्रजामंडल 1938 हरिमोहन शर्मा व कुंजबिहारी मोदी के प्रयासों से गठित

सरकारी पाठशालाओं में फ़ीस वृद्धि का विरोध करने पर स्कूल शिक्षक भोलानाथ को राज द्रोहात्म्क प्रवृतियों के कारण राजकीय सेवा से पृथक किया|

1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के लिए चंदा वसूलने का प्रजामंडल का विरोध |

9. करौली प्रजामंडल अप्रैल 1939 राज्य सेवक संघ के अध्यक्ष त्रिलोक चंद माथुर की अध्यक्षता में प्रजामंडल का गठन
10. धौलपुर प्रजामंडल 1938 ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु व जौहरीलाल इंदु के प्रयासों से गठित |इन दोनों ने 1934 में धौलपुर नागरो प्रचारिणी सभा की स्थापना की|
11. सिरोही प्रजामंडल 23 जनवरी 1939 गोकुल भाई भट्ट द्वारा 1939 में स्थापना|सिरोही प्रजामंडल के तत्वाधान में हुई सार्वजनिक सभा में लाठीचार्ज में अनेक लोग घायल हुए|इस घटना पर महात्मा गांधी ने हरिजन सेवक नामक समाचार पत्र में टिप्पणी की|
12. शाहपुरा प्रजामंडल 18 अप्रैल 1938 मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना हेतु साईकिल भ्रमण पर निकले माणिक्यलाल वर्मा की प्रेरणा से रमेश चंद्र ओझा,लादूराम व्यास,अभय सिंह डांगी द्वारा स्थापना की गई|
13. (a)जैसलमेर प्रजामंडल

(b)जैसलमेर राज्य लोक परिषद

(c)जैसलमेर राज्य प्रजा परिषद

15 दिसम्बर 1945 मीठालाल व्यास द्वारा जोधपुर में स्थापित

जैसलमेर प्रजामंडल को असफल बनाने हेतु सामन्ती तत्वों द्वारा गठित संस्था

1939 में शिव शंकर गोपा द्वारा गठित

14. कुशलगढ़ प्रजामंडल अप्रैल 1942 भंवरलाल निगम की अध्यक्षता में गठित |
15. किशनगढ़ प्रजामंडल 1939 कांतिलाल चौथाणी के प्रयत्नों से जमाल शाह की अध्यक्षता में गठित|
16. झालावाड प्रजामंडल 25 नवम्बर 1946 मांगीलाल भव्य की अध्यक्षता में गठित |इस प्रजामंडल को राजघराने का पूर्ण सहयोग प्राप्त था|
17. डूंगरपुर प्रजामंडल 1 अगस्त 1944 भिगिलाल पंडया व शिवलाल कोटडिया द्वारा स्थापित|इसके द्वारा प्रयाण सभाएं आयोजित की गई जो रियासती शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध जनता को जगाने का कार्य करती थी|
18. बांसवाडा प्रजामंडल 1943 भुपेंद्र्लाल त्रिवेदी,धुलजी भाई व मणिशंकर नागर द्वारा स्थापित
19. (a)प्रतापगढ़ प्रजामंडल

(b)प्रतापगढ़ स्टेट्स पीपुल्स कांफ्रेंस

1945

1945

चुन्नीलाल व अमृतलाल के प्रयासों से गठित |

पड़ोसी रियासत के कार्यकर्ताओं द्वारा गठित |

 

1857 Ki Kranti

1857 की क्रांति:                                                         –

1857 तक भारत में ब्रिटिश सरकार के 100 वर्ष पूरे हो गये थे,इस दौरान ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष के कारण अधिकांश विद्रोह हुए|जबकि किसानों ने भू-राजस्व नीति के कारण विद्रोह किए|इनमे से प्रमुख थे-

वेल्लोर विद्रोह-(1806)-यह विद्रोह भारतीय सैनिको ने अंग्रेजो द्वारा उनके सामाजिक,धार्मिक रीति रिवाजो में हस्तक्षेप के कारण किया|

बैरकपुर विद्रोह (1824)-47 वी रेजीमेंट ने बर्मा में सेवा देने से मना कर दिया|

1849 में सांतवी बंगाल कैवलरी ,64वी. रेजीमेंट और 22 वी रेजीमेंट का विद्रोह|

1850 में 66 वी.NI व 1852 में 38 वी NI का विद्रोह|

1857 में होने वाला सैनिक विद्रोह भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सर्वाधिक शक्तिशाली विद्रोह था.जिसने स्वतंत्रता आन्दिलं का रूप धारण कर लिया था|

विद्रोह के कारण –

1857 में हुए विद्रोह का सर्वप्रमुख व तात्कालिक कारण सैनिको को चर्बीयुक्त कारतूस उपयोग करने के लिए दिया जाना था,इसके अलावा विद्रोह का कारण भारतीय सैनिको व जनता में अंग्रेजो के प्रति काफी असंतोष था जो धीरे-धीरे अंदर ही जमा हो रहा था,बस इसे एक चिंगारी की आवश्यकता थी जो चर्बी वाले कारतूसों ने प्रदान कर दी|इस विद्रोह के समय बारत के गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग थे|जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लार्ड पामर्स्टन थे|

1857 की क्रांति की पृष्ठभूमि में निम्नलिखित कारण विद्यमान थे-

1.राजनैतिक कारण –क्रांति के राजनैतिक कारणों में दो प्रमुख कारण थे-a-वेलेजली की सहायक सन्धियाँ  b. डलहौजी की व्यपगत नीतियाँ

व्यपगत नीति अथवा राज्य हडप नीति के तहत भारतीय राज्यों का तीन श्रेनियो वर्गीकरण किया गया|व्यपगत नीति के अनुसार जिस रियासत के राजा के कोई सन्तान नही होगी उसके राज्य को राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया जाएगा|राजा की विधवा को पुत्र गोद लेने का अधिकार नही था|इस नीति के तहत डलहौजी ने सतारा(1848),जैतपुर,सम्भलपुर(1849),बघाट(1850),उदयपुर (1852),झांसी(1853),नागपुर(1854) को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया|

डलहौजी द्वारा राजस्थान की करौली रियासत को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाये जाने को कोर्ट आफ डायरेक्टर्स ने यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि करौली संरक्षित मित्र है न किआश्रित राज्य|इसी प्रकार उदयपुर और बघाट के विलय के सम्बन्ध में लिए गये डलहौजी के निर्णय को लार्ड कैनिंग ने निरस्त कर दिया|

डलहौजी ने अवध को कुशासन का आरोप लगाकर हडप लिया था|

पेशवा बाजीराव द्वितीय की मृत्यु के बाद उसके पुत्र नाना साहेब की पेंशन को डलहौजी ने बंद कर दिया|क्योंकि वह पेंशन  निजी रूप से बाजीराव द्वितीय को दी गई थी ना कि पेशवा को|

डलहौजी ने कर्नाटक व तंजौर के नवाबो की राजकीय उपाधियाँ जब्त कर ली|

लार्ड डलहौजी ने 1849 में घोषणा की कि मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी शहजादे को मुगल महल (लाल किला) छोड़ना पड़ेगा तथा उसे कुतुबमीनार के पास एक छोटे से महान में रहना होगा|1856 में कैनिंग ने यह घोषणा की कि बहादुर शाह की मृत्यु के बाद मुगलों से सम्राट की पदवी छीन ली जायेगीं|और वे सिर्फ राजा कहलायेंगे|इन सभी कारणों से राजाओं व जनता में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आक्रोश व्याप्त हो गया था|

2.प्रशासनिक कारण – भारतीयों को प्रशासन में उच्च पदों से वंचित कर दिया गया|कोई भी भारतीय सेना में सूबेदार से ऊँचे पद पर नहीं पहुंच सकता था|न्यायिक क्षेत्र में भी अंग्रेजो को भारतीयों से श्रेष्ठ दर्जा दिया गया|

3.सामाजिक व धार्मिक कारण :- रुढ़िवादी भारतीयों ने सामाजिक सुधारों का विरोध किया|साथ ही ईसाईं मिशनरियों को 1813 के चार्टर एक्ट द्वारा भारत में धर्म प्रचार की अनुमति मिल गई|उन्होंने धर्मांतरण के प्रयास किये|इसने भी भारतीयों को नाराज कर दिया|

1850 में धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम संख्या-21 द्वारा ईसाई धर्म ग्रहण करने वाले लोगों को पैत्रक सम्पत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता था|इससे लोगों को यह लगने लगा कि भारत को ईसाईं देश बनाने की कोशिश की जा रही हैं|

  1. आर्थिक कारण –अंग्रेजो की आर्थिक नीतियों के कारण भारत के उद्योग व व्यापार नष्ट होने लगे थे |इसके अलावा मनमाना लगान व कठोर भू-राजस्व नीति के कारण लोगों के आर्थिक उत्पीडन ने असंतोष को जन्म दिया|जिससे विद्रोह की भूमिका तैयार होने लगी|

  2. सैनिक कारण –भारतीयों को समुन्द्र पार जाने पर दिया जाने वाला भत्ता बंद कर दिया गया|तथा 1854 के डाकघर अधिनियम द्वारा सैनिको को दी जाने वाली नि:शुल्क डाक सुविधा समाप्त कर दी गई|

विद्रोह की योजना व आरम्भ :-इस क्रांति के मुख्य योजनाकार नाना साहब व अजीमुल्ला खां व रानोजी बापू को माना जाता है| इन्होने 31 मई को क्रांति शुरू करने का दिन चुना था|तथा इसके प्रतिक के रूप में कमल का फूल व रोटी को चुना गया|कमल का फूल विद्रोह में शामिल होने वाली सभी सैनिक टुकड़ियों में पहुचायाँ गया|रोटी को एक गाँव का चौकीदार दूसरे गाँव के चौकीदार तक पहुचाता था|

चर्बी वाले कारतूसो के प्रयोग के विरुद्ध पहली घटना कलकत्ता के पास बैरकपुर छावनी में 29 मार्च 1857 को घटी,जब 34 वी नेटिव इन्फेंट्री रेजिमेंट के एक सिपाही मंगल पांडे ने चर्बी वाले कारतूसो के प्रयोग से नमा करते हुए लेफ्टिनेंट बाग़ व सार्जेंट मेजर ह्रुसन की हत्या कर दी|

मंगल पांडे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (वर्तमान बलिया)जिले का रहने वाला था,इस घटना के आरोप में 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फांसी डे दी गई|

10 मई 1857 को मेरठ छावनी में 20 वी एन.आई. के पैदल सैनिको ने चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग से इनकार कर विद्रोह कर दिया|और अपने बंदी साथियों को मुक्त कराकर दिल्ली प्रस्थान किया|

12 मई को विद्रोहियों ने दिल्ली पर कब्जा कर बहादुर शाह जफर को भारत का बादशाह व विद्रोह का नेता घोषित कर दिया|

4 जून को झांसी में राजा गंगाधर राव की विधवा रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में विद्रोह की शुरुआत हुई|झांसी के पतन के बाद रानी ग्वालियर की ओर चली गई|17 जून 1858 को अंग्रेज जनरल हौरोज से लडती हुई शहीद हो गई|इस पर जनरल ने कहा कि भारतीय क्रांतिकारियों में यहाँ सोई हुई औरत अकेली मर्द है|

ग्वालियर में तांत्या टोपे ने विद्रोह का नेतृत्व किया|ये नाना साहब का सेनापति भी थे|ये ग्वालियर के पतन के बाद राजस्थान भी आये|इनको अप्रैल 1859 में इनके मित्र ने विश्वास घात करके पकडवा दिया और इनको 18 अप्रैल को फांसी डे दी गई|

पंजाब में नामधारी सिखों ने सशस्त्र विद्रोह किया|जबकि बरेली में कहां बहादुर खान व हरियाणा में राव तुलाराम ने क्रांति का नेतृत्व किया|

लखनऊ में बेगम हजरत महल के नेतृत्व में 4 जून 1857 को विद्रोह की शुरुआत हुई|भारतीय सैनिको ने लखनऊ के ब्रिटिश रेजीडेंसी को घेरकर अवध के चीफ कमिश्नर हेनरी लारेंस की हत्या कर दी|

21 मार्च 1858 को कालिन कैम्पबेल ने जंग बहादुर के नेतृत्व में गोरखा रेजिमेंट की सहायता से लखनऊ पुन: जीता |बेगम हजरत महल पराजित होने पर नेपाल चली गई व गुमनामी में ही मर गई|

कानपुर में विद्रोह की शुरुआत 5 जून 1857 को नाना साहब के नेतृत्व में हुई|तात्यां टोपे ने उनकी सहायता की|16 दिसम्बर 1857 को कैम्पबेल का कानपुर पर अधिकार हो गया|नाना साहब भी पराजित होकर नेपाल चले गये|

जगदीशपुर (बिहार) में कुंवर सिंह ने विद्रोह किया|युद्ध में जख्मी हो जाने के बाद 26 अप्रैल 1858 को उनकी मृत्यु हो गई|

फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्ला ने विद्रोह का नेतृत्व किया जबकि बरेली में खान बहादुर खान ने नेतृत्व किया|

दिल्ली में अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह ने बख्त खां के सहयोग से नेतृत्व किया|20 सितम्बर 1857 को ले.हडसन ने बादशाह को हुमायु के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया और उनको  उनकी बेगम के साथ रंगून भेज दिया|जहां 7 नवम्बर 1862 को उनकी मृत्यु हो गई|

दक्षिणी भारत,पंजाब,बंगाल,राजस्थान व महाराष्ट्र के अधिकांश भाग विद्रोह से अलग रहे|यहाँ के जमीदारों ने शासको के विरुद्ध होने वाले विद्रोह को कुचलने में अंग्रेजो की मदद की|

विद्रोह की असफलता के कारण –

1.विद्रोहियों के पास योग्य व कुशल नेतृत्व की कमी थी जबकि अंग्रेज सेनापति अधिक कुशल थे|

2.विद्रोह करने का अलग-अलग समय व सीमित क्षेत्र

3.शिक्षित व मध्यम वर्ग व व्यापारियों ने भी विद्रोहियों का साथ नही दिया

4.विद्रिहियो के पास सुनियोजित योजना व भविष्य का कोई दृष्टिकोण नही था|

विभिन्न विचारको के विचार –

रीज ने इसे कट्टरपंथीयों का ईसाईंयत के विरुद्ध संग्राम कहा|

डा.ताराचंद ने राष्ट्रीय विप्लव कहा|

टी.आर. होम्स ने सभ्यता और बर्बरता के मध्य संघर्ष कहा|

वी.डी.सावरकर ने भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा|

अशोक मेहता ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए सुनियोजित संग्राम कहा|

डा.रमेश मजूमदार ने अनुसार तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय संग्राम न तो पहला ही,न ही राष्ट्रीय तथा न ही स्वतंत्रता संग्राम था |
 

Chatrapti Shivaji

छत्रपति शिवाजी:

मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे|इनका जन्म 1627 ई. में शिवनेर दुर्ग (जुन्नार के समीप ) में हुआ था| इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले तथा माता का नाम जीजा बाई था|

इनके गुरु का नाम कोंडदेव था|

शिवाजी का विवाह साईंबाई निम्बालकर से 1640 ई.में हुआ|

शाहजी ने शिवाजी को पूना की जागीर प्रदान कर स्वयं बीजापुर रियासत में नौकरी कर ली|

अपने प्रथम सैन्य अभियान(1644) के अंतर्गत शिवाजी ने बीजापुर के तोरण नामक पहाड़ी किले पर अधिकार कर लिया|1656 में शिवाजी ने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया|

बीजापुर के सुल्तान ने सितम्बर 1665 में शिवाजी को परास्त करने के लिए अपने योग्य सेनापति अफजल खां को भेजा था लेकिन शिवाजी ने अफजल खां की हत्या कर दी|

शिवाजी को ओरंगजेब ने 16 मई 1666में जयपुर भवन में कैद कर लिया था|जहां से वे 16 अगस्त 1666 को भाग निकले थे|

शिवाजी ने सूरत को दो बार (1664 व 1669में)लूटा था|

ओरंगजेब के शासनकाल में शिवाजी ने (1665)पुरन्दर की संधि की थी|यह संधि शिवाजी तथा जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह के मध्य हुई थी|

1672 में शिवाजी ने बीजापुर से पन्हाला दुर्ग चीन लिया था|

16 जून 1674 को शिवाजी ने रायगढ़ में काशी के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगा भट्ट द्वारा अपना राज्याभिषेक करवाया|मूलरूप से गंगा भट्ट महाराष्ट्र का एक सम्मानित ब्राह्मण था|जो कि लम्बे समय से काशी में रह रहा था|

शिवाजी के मंत्रीमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था|अष्ट प्रधान में पेशवा का पद सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होता था|अष्टप्रधान में निम्न पद होते थे-

1.पेशवा (प्रधानमंत्री)-राज्य का प्रशासन व अर्थव्यवस्था की देखरेख

2.सरी-ए-नौबत (सेनापति)-सैन्य प्रधान

3.अमात्य (राजस्व मंत्री)-आय व्यय का लेखा-जोखा

4.वाक्यानवीय-सुचना,गुप्तचर,संधि विग्रह के विभागों का अध्यक्ष

  1. चिटनिस-राजकीय पत्रों को पढकर उसकी भाषा शैली को देखना
  2. सुमंत –विदेश मंत्री
  3. 7.पंडित राव –धार्मिक कार्यो के लिए तिथि का निर्धारण
  1. न्यायधीश-न्याय विभाग का प्रधान

शिवाजी के दरबार में मराठी को भाषा के रूप में प्रयोग किया गा|

शिवाजी के किले की सुरक्षा में निम्न अधिकारी मौजूद रहते थे-1.हवलदार 2.सरेनौबत 3.सवनिस

शिवाजी की सेना तीन महत्त्वपूर्ण भागों में विभक्त थी-1.पागा सेना 2.सिलहदार 3. पैदल

शिवाजी की कर व्यवस्था मलिक अम्बर की कर व्यवस्था पर आधारित थी,शिवाजी ने रस्सी द्वारा माप की व्यवस्था के स्थान पर काठी व मानक छड़ी के प्रयोग को शुरू किया|

चौथ व सरदेशमुखी नामक कर शिवाजी ने शुरू किये|

चौथ-किसी क्षेत्र को बर्बाद न करने के बदले डी जाने वाली दी जाने वाली रकम को कहा जाता  था, सरदेसमुखी-इसके हक का दावा करके शिवाजी स्वयं को सर्वश्रेष्ठ देशमुख प्रस्तुत करना चाहते थे|

मात्र 53 वर्ष की आयु में 14 अप्रैल 1680 को शिवाजी की मृत्यु हो गई|

शिवाजी के उत्तराधिकारी-शिवाजी का उत्तराधिकारी शम्भाजी था|शम्भाजी ने उज्जेन के हिंदी व संस्कृत के विख्यात कवि कलश को अपना सलाहकार नियुक्त किया|

21 मार्च 1689 को मुगल सेनापति मखर्रब खां ने संगमेश्वर में छिपे हुए शम्भाजी व कलश को गिरफ्तार कर उनकी हत्या कर दी|

इसके बाद राजाराम आया और उसने अपनी दूसरी राजधानी सतारा को बनाया|यह भी मुगलों से संघर्ष करता हुआ 1700 में मारा गया|

राजाराम की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी ताराबाई अपने 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी-2 का राज्याभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गई|

1707 में औरंगजेब  की मृत्यु के बाद शम्भाजी का पुत्र साहू (जो ओरंगजेब की कैद में था) वापस महाराष्ट्र आया|जिससे 1707 में साहू और ताराबाई के मध्य खेडा का युद्ध हुआ जिसमे साहू विजयी रहा|

साहू ने 22 जनवरी 1708 ई.को सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया ,साहू के नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्यवाद के प्रवर्तक पेशवा लोग थे जो साहू के पैतृक प्रधानमंत्री थे|पेशवा पद पहले पेशवा के साथ ही वंशानुगत हो गया|

1713 साहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया,इसकी मृत्यु 1720 में हुई|इसके बाद पेशवा बाजीराव प्रथम हुए|

पेशवा बाजीराव प्रथम ने मुगल साम्राज्य की कमजोर हो रही स्थिति का फायदा उठाने के लिए साहू को उत्साहित करते हुए कहा कि आओ,हम इस पुराने वृक्ष के खोखले तने पर प्रहार करे,शाखाए तो स्वयं गिर जाएगी,हमारे प्रयत्नों से मराठा पताका कृष्णा नदी से अटक तक फहराने लगेगी|उत्तर में साहू ने कहा-नि:संदेह आप योग्य पिता के योग्य पुत्र है|

पालखेडा का युद्ध 7 मार्च 1728 में बाजीराव प्रथम व निजामुलमुल्क के बीच हुआ जिसमे निजाम की हार हुई,निजाम के साथ मुंशी शिवगाव की संधि हुई|

दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था|जिसने 29 मार्च 1737 को दिल्ली पर धावा बोल दिया,उस समय मुगल बादशाह मुहम्मदशाह दिल्ली छोड़ने को तैयार हो गया था|

बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक महिला से सम्बन्ध होने के कारण चर्चित रहा था|

बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव 1740 में पेशवा बना|1750 की सन्गोला संधि के बाद पेशवा के हाथ में सारे अधिकार सुरक्षित हो गये|

बालाजी बाजीराव को नाना साहेब के नाम से नाम से जाना जाता है|

झलकी की संधि बालाजी बाजीराव व हैदराबाद के निजाम के मध्य हुई थी|

बालाजी बाजीराव के समय ही पानीपत का तीसरा युद्ध(1761) हुआ जिसमे मराठो की हार हुई|इस हार को सह नहीं सकने के कारण बालाजी की मृत्यु 1761 में हो गई|

माधवराव नारायण प्रथम 1761 में पेशवा बना,इसने मराठो की खोयी हुई प्रतिष्ठा को पुन: प्राप्त करने का प्रयास किया|

माधवराव ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाह आलम-2 को पुन: दिल्ली की गद्दी पर बैठाया|मुगल बादशाह अब मराठो का पेंशन भोगी बन गया|

पेशवा नारायण राव की हत्या उसके चाचा रघुनाथ राव ने (1772-73) कर दी|

अंतिम पेशवा राघोवा का पुत्र बाजीराव-2 था,जो अंग्रेजो की सहायता से पेशवा बना था|मराठो के पतन में सर्वाधिक योगदान इसी का था|यह सहायक संधि स्वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार था|

मराठों के युद्ध-

प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध-1775-82-इसके बाद पुरन्दर की संधि हुई|

द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध-1803-05 –इसके बाद 1803 में देवगांव की संधि हुई|

तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध-1816-18-इसके बाद मराठा शक्ति व पेशवा के वंशानुगत पद को समाप्त कर दिया गया|

 

 

 

Kim Jong Un

प्राचीन और मध्ययुगीन इतिहास में राजाओं, सुल्तानों और बादशाहों की तानाशाही के तमाम सारे उदाहरण मिलते हैं। राजा, महाराजा, सुल्तान या बादशाह स्वेच्छारी हो सकते थे। क्योंकि उनके ऊपर जनतांत्रिक नियंत्रण नहीं था। विश्व के राजनीतिक परिदृश्य में जब लोकतंत्र का आगाज हो रहा था वैसे हालात में तानाशाही शासन की अवधारणा समझ से परे थी। लेकिन सच ये है कि दुनिया ने ऐसे सनकियों का शासन देखा जिससे दुनिया बर्बादी के कगार पर आ पहुंची।

किम जोंग

उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन जिस तरह से हर काम पर अड़ियल रुख अपनाता है और हर फैसले पर अडिग रहताहै उससे माना जा रहा है कि वह दुनिया का अगला हिटलर साबित हो सकता है। किम जोंग की सनक और खौफनाक कारनामों के किस्से मशहूर हैं। वह एक ऐसा तानाशाह है जो अपने सगेसंबंधियों पर भी रहम नहीं करता। किसी को मौत देना उसके लिए लिए सबसे छोटा काम है।

फूफा को 120 शिकारी कुत्तों के सामने फेंकवाया

किम जोंग ने साल 2013 में अपने सगे फूफा को बेरहमी से मरवा दिया था। उसने अपने फूफा को खूंखार कुत्तों के सामने डलवा दिया था। 120 शिकारी कुत्तों ने किम के फूफा जेंग सेंग को नोच नोच कर मार डाला | कहा जाता है कि जिस फूफा को सनकी तानाशाह ने मरवा दिया उसी ने उसे सियासत की बारीकियां सिखाई थीं। लेकिन किम जोंग को लगने लगा था कि फूफा का प्रभाव उससे ज्यादा हो रहा है तो उसने फूफा पर कुछ आरोप लगाकर उसे उसकी हत्या करा दी।

बुआ को दिया जहर

किम जोंग की बुआ ने जब अपने पति की मौत पर सवाल उठाया तो उसे भी जहर दिला दिया गया। इसके बाद बताया गया कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। 2015 में कोरिया भागे एक अफसर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा था कि जोंग ने अपनी बुआ की हत्या करा दी।

झपकी लेने में सेना प्रमुख को मरवाया

किम जोंग को फरमान पर आनाकानी पसंद नहीं है, क्योंकि ऐसा करने वाले को सिर्फ सजामौत होती है। तानाशाह के बार किम जोंग ने उत्तर कोरिया के रक्षा प्रमुख ह्योंग योंग तोप से उड़वा दिया था। उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने किम जोंग की एक मीटिंग में झपकी लेने की हिमाकत कर दी थी।

नहीं रोने पर होती है सजा मौत

कहा जाता है कि किंम जोंग के पिता की जब मौत हुई तो ऐलान किया गया कि अंतिम संस्कार में मौजूद हर किसी को रोना होगा। लेकिन जिन लोगों के मौके पर आंसू नहीं आए उन्होंने उन्हें सजा ए मौत मिली। शोक नहीं वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया और गोली मार दी गई।

स्कूल में अश्लील साहित्य पढ़ते हुए मिला

कहा जाता है कि किंग जोंग ने स्विटजरलैंड के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बर्न में दूसरे नाम से पढ़ाई की। स्कूल में वह काफी कमजोर छात्र था। उसकी सोहबत ठीक नहीं थी। एक बार वो स्कूल में उसे पोर्न मैगजीन पढ़ते हुए पकड़ा गया था।

सनक में लेता है कोई भी फैसला

किम जोंग उन को सबसे सनकी तानाशाह बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 2015 में साउथ कोरिया में बार्डर पर लाउडस्पीकर लगाकर अपना प्रोपेगंडा लोगों को सुनाना शुरू किया था। इस पर किम जोंग उन बौखला गया और सीमा पर अपने सैनिक भेज दिया। किम जोंग ने ऐलान किया कि अगर साउथ कोरिया ने लाउड स्पीकर नहीं बंद किए तो उसकी सेना हमला कर देगी। इसके बाद बड़ी मशक्कत से दोनों देशों का विवाद सुलझा था।
खुद को भगवान बताता है तानाशाह :
उत्तरी कोरिया का तानाशाह किम जोंग खुद को भगवान के रूप में पेश करता है। वह अपने देश के नागरिकों के बीच ऐसे तथ्य पेश करता है जिसे लोग उसे भगवान मानने लगें।

 

Bal Gangadhar Tilak -His life in Hindi

तिलक को लोग प्राय:`लोकमान्य और बेताज बादशाह’ के नाम से जानते हैं|तिलक का जन्म महाराष्ट्र (रत्नागिरी)के एक मराठा ब्राह्मण वंश में हुआ था|

1897 में कानून से स्नातक करने के पश्चात तिलक ने आगरकर के सहयोग से ऐसी संस्थाएं बनाने की सोची जोकि मूल्यों की शिक्षा डे सकें| जनवरी 1900 में इन्होने पूना नवीन इंग्लिश विद्यालय स्थापित किया| ये दक्कन एज्युकेशनल सोसायटी और फर्ग्युसन कॉलेज पूना की स्थापना से भी सम्बन्धित थे|

तिलक प्रथम राष्ट्रवादी नेता थे जिन्होनें जनता से निकट सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न किया और इस दृष्टि में वे महात्मा गांधी के भी अग्रगामी थे|इस उद्देश्य से इन्होनें अखाड़े,लाठी क्लब,गो-हत्या विरोधी सभाएं स्थापित की|शिवाजी और गणपति त्यौहार प्रारम्भ किए जिससे जनता में राष्ट्र सेवा की भावना जाग सके|इसके साथ-साथ उन्होनें दो समाचार पत्र 1981 में The Maharattaa  अंग्रेजी में और केसरी मराठी में शुरू किये|

तिलक नेलाला लजत राय व विपिनचंद्र पल के साथ मिलकर राष्ट्रवादी दल अथवा उग्रवादी दल का गठन किया|इनके उग्रवादी विचारों के कारण ही 1907 में कांग्रेस का विभाजन हो गया|

तिलक ने ही सर्वप्रथम स्वराज की मांग की थी|उनके शब्दों में `स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मै इसे लेकर रहूंगा|’जिसके कारण देश के कौने-कौने तक उत्तेजना की एक नी लहर उत्पन्न हो गई थी|इनकी प्रमुख पुस्तक गीता रहस्य थी|

इनकी मृत्यु 1920 में हो गई थी|

 

Bullet Train in India

भारत में बुलेट ट्रेन की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जापान के प्रधान मंत्री शिंजो आबे ने 14 सितम्बर 2017 को गुजरात के अहमदाबाद में रखी| यह बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुम्बई के बीच चलेगी| इसकी रफ्तार 250 किमी.प्रति घंटा होगी|जिससे अहमदाबाद से मुम्बई के बीच की 500किमी. की दूरी 2 घंटे में पूरी हो सकेगी|

भारत में बुलेट ट्रेन को कुछ लोग विकास का बड़ा कदम मानते है और कुछ लोग गैर जरूरी प्रोजेक्ट| आलोचकों का कहना है कि बुलेट ट्रेन पर लगने वाली लागत को यदि वर्तमान रेलवे सिस्टम पर खर्च किया जाए तो बहुत सारी यात्री सुविधाएं बढाई जा सकती हैं जैसे- जहां रेल कनेक्टिविटी नहीं है वहां पर नई रेल परियोजना,यात्री सुरक्षा आदि| इसी प्रकार की आलोचनाए दिल्ली मैट्रो के समय दी गई थी कि क्या हमारे पास ऐसी विलासिता पर खर्च करने लायक पैसा है?,लेकिन आज देखे तो 7 शहरों में आज मैट्रो चल रही है और 24 शहरों में मैट्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं|

लेकिन लागत-लाभ के आधार पर किसी प्रोजेक्ट का मूल्यांकन कैसे हो सकता है|,बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट की लागत तो मौटे तौर पर 1.1 लाख करोड है जिसका 80% तो हमें 0.1 फीसदी ब्याज पर मिल रहा हैं जो कि 50 साल में चुकाना होगा|अन्य सारी परियोजनाओं की तुलना में यह सस्ता प्रोजेक्ट है|

लेकिन इसके अन्य फायदे भी है जैसे-इससे मिलने वाली आमदनी,रोजगार और साथ ही साथ जापान जैसा दोस्त|

जापानी प्रधानमंत्री ने तो कहा कि यदि जापान का JA और इण्डिया का I मिल जाए तो जय बनता है जो विजय का प्रतीक है जिससे भारत जापान के बीच रणनीतिक भागीदारी बढ़ेगी|क्योकि अभी हमनें कुछ समय पहले चीन के ओ आर ओ बी प्रोजेक्ट व डोकलाम प्रकरण का सामना किया है|

बुलेट ट्रेन एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो दुनिया को संदेश देता है कि भारत में बदलाव की रफ्तार जबरदस्त है,ऐसा संदेश न सिर्फ देश के प्रति धारणा बदलता है बल्कि ऐसा माहौल भी निर्मित करता है जिससे विदेशियों की नजर हम पर पडती है फिर चाहे वे निवेशक हो या पर्यटक|

बुलेट ट्रेन भारत में केवल रेल सेवा को ही सुधार नही देगी बल्कि भारत में बदलाव की प्रक्रिया को तेज कर देगी ताकि वह एक आधुनिक/विकसित देश के रूप में विश्व मंच पर उभर सके|

भारत के प्रमुख युद्ध

*1. हाईडेस्पीज का युद्ध (Battle of the Hydaspes) समय : 326 ई.पू.*
किसके बीच – सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस के बीच हुआ, जिसमे सिकंदर की विजय हुई।

*2. कलिंग की लड़ाई (Kalinga War) समय : 261 ई.पू.*
किसके बीच – सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया। युद्ध के रक्तपात को देखकर उसने युद्ध न करने की कसम खाई।

*3. सिंध की लड़ाई (समय : 712 ई.)*
किसके बीच – मोहम्मद कासिम ने अरबों की सत्ता स्थापित की।

*4. तराईन का प्रथम युद्ध (Battles of Tarain) समय : 1191 ई.*
किसके बीच – मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच हुआ, जिसमे चौहान की विजय हुई।

*5. तराईन का द्वितीय युद्ध (2nd Battles of Tarain) समय : 1192 ई.*
किसके बीच – मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच हुआ, जिसमे मोहम्मद गौरी की विजय हुई।

*6. चंदावर का युद्ध (Battle of Chandawar) समय : 1194 ई.*
किसके बीच – इसमें मुहम्मद गौरी ने कन्नौज के राजा जयचंद को हराया।

*7. पानीपत का प्रथम युद्ध (First Battle of Panipat ) समय : 1526 ई.*
किसके बीच – मुग़ल शासक बाबर और इब्राहीम लोधी के बीच।

*8. खानवा का युद्ध (Battle of Khanwa) समय : 1527 ई.*
किसके बीच – बाबर ने राणा सांगा को पराजित किया।

*9. घाघरा का युद्ध (Battle of Ghagra) समय : 1529 ई.*
किसके बीच – बाबर ने महमूद लोदी के नेतृत्व में अफगानों को हराया।

*10. चौसा का युद्ध (Battle of Chausal) समय : 1539 ई.*
किसके बीच – शेरशाह सूरी ने हुमायु को हराया

*11. कन्नौज /बिलग्राम का युद्ध (Battle of Kanauj or Billgram) समय : 1540 ई.*
किसके बीच – एकबार फिर से शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराया व भारत छोड़ने पर मजबूर किया।

*12. पानीपत का द्वितीय युद्ध (Second Battle of Panipat) समय : 1556 ई.*
किसके बीच – अकबर और हेमू के बीच।

*13. तालीकोटा का युद्ध (Battle of Tallikota) समय : 1565 ई.*
किसके बीच – इस युद्ध से विजयनगर साम्राज्य का अंत हो गय।

*14. हल्दी घाटी का युद्ध (Battle of Haldighati) समय : 1576 ई.*
किसके बीच – अकबर और राणा प्रताप के बीच, इसमें राणा प्रताप की हार हुई।

*15. प्लासी का युद्ध (Battle of Plassey) समय : 1757 ई.*
किसके बीच – अंग्रेजो और सिराजुद्दौला के बीच, जिसमे अंग्रेजो की विजय हुई और भारत में अंग्रेजी शासन की नीव पड़ी।

*16. वांडीवाश का युद्ध (Battle of Wandiwash) समय : 1760 ई.*
किसके बीच – अंग्रेजो और फ्रांसीसियो के बीच, जिसमे फ्रांसीसियो की हार हुई।

*17. पानीपत का तृतीय युद्ध (Third Battle of Panipat) समय : 1761 ई.*
किसके बीच – अहमदशाह अब्दाली और मराठो के बीच, जिसमे फ्रांसीसियों की हार हुई।

*18. बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar) समय : 1764 ई.*
किसके बीच – अंग्रेजो और शुजाउद्दौला, मीर कासिम एवं शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना के बीच, जिसमे अंग्रेजो की विजय हुई।

*19. प्रथम मैसूर युद्ध (समय : 1767-69 ई.)*
किसके बीच – हैदर अली और अंग्रेजो के बीच, जिसमे अंग्रेजो की हार हुई।

*20. द्वितीय मैसूर युद्ध (समय : 1780-84 ई.)*
किसके बीच – हैदर अली और अंग्रेजो के बीच, जो अनिर्णित छूटा।

*21. तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (समय : 1790 ई.)*
किसके बीच – टीपू सुल्तान और अंग्रेजो के बीच लड़ाई संधि के द्वारा समाप्त हुई।

*22. चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध (समय : 1799 ई.)*
किसके बीच – टीपू सुल्तान और अंग्रेजो के बीच, टीपू की हार हुई और मैसूर शक्ति का पतन हुआ।

*23. चिलियान वाला युद्ध (समय : 1849 ई.)*
किसके बीच – ईस्ट इंडिया कंपनी और सिखों के बीच हुआ था जिसमे सिखों की हार हुई।

*24. भारत चीन सीमा युद्ध (समय : 1962 ई.)*
किसके बीच – चीनी सेना द्वारा भारत के सीमा क्षेत्रो पर आक्रमण। कुछ दिन तक युद्ध होने के बाद एकपक्षीय युद्ध विराम की घोषणा। भारत को अपनी सीमा के कुछ हिस्सों को छोड़ना पड़ा।

*25. भारत पाक युद्ध (Indo-Pakistani War) समय : 1965 ई.*
किसके बीच – भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जिसमे पाकिस्तान की हार हुई। भारत पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ।

*26. भारत पाक युद्ध (Indo-Pakistani War) समय : 1971 ई.*
किसके बीच – भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जिसमे पाकिस्तान की हार हुई। फलस्वरूप बांग्लादेश एक स्वतन्त्र देश बना।

*27. कारगिल युद्ध (Kargil War) समय : 1999 ई.*
किसके बीच – जम्मू एवं कश्मीर के द्रास और कारगिल क्षेत्रो में पाकिस्तानी घुसपैठियों को लेकर हुए युद्ध में पुनः पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा और भारतीयों को जीत मिली।

भारतीय लेखक

प्रमुख भारतीय लेखक एवं उनकी पुस्तके-

◆पंचतंत्र ~ विष्णु शर्मा

●प्रेमवाटिका ~ रसखान
●मृच्छकटिकम् ~ शूद्रक
●कामसूत्र् ~ वात्स्यायन
●दायभाग ~ जीमूतवाहन
●नेचुरल हिस्द्री ~ प्लिनी

●दशकुमारचरितम् ~ दण्डी
●अवंती सुन्दरी ~ दण्डी
●बुध्दचरितम् ~ अश्वघोष
●कादम्बरी् ~ बाणभटृ
●अमरकोष ~ अमर सिहं
●शाहनामा ~ फिरदौसी
●साहित्यलहरी ~ सुरदास
●सूरसागर ~ सुरदास
●हुमायूँनामा ~ गुलबदन बेगम

●नीति शतक ~ भर्तृहरि
●श्रृंगारशतक ~ भर्तृहरि
●वैरण्यशतक ~ भर्तृहरि
●हिन्दुइज्म ~ नीरद चन्द्र चौधरी

●पैसेज टू इंगलैंड ~ नीरद चन्द्र चौधरी

●अॉटोबायोग्राफी अॉफ ऐन अननोन इण्डियन ~ नीरद चन्द्र चौधरी

●कल्चर इन द वैनिटी वैग ~ नीरद चन्द्र चौधरी

●मुद्राराक्षस ~ विशाखदत्त

●अष्टाध्यायी ~ पाणिनी
●भगवत् गीता ~ वेदव्यास
●महाभारत ~ वेदव्यास
●मिताक्षरा ~ विज्ञानेश्वर

●राजतरंगिणी ~ कल्हण
●अर्थशास्त्र ~ चाणक्य
●कुमारसंभवम् ~ कालिदास
●रघुवंशम् ~ कालिदास
●अभिज्ञान शाकुन्तलम् ~ कालिदास

●गीतगोविन्द ~ जयदेव
●मालतीमाधव ~ भवभूति
●उत्तररामचरित ~ भवभूति
●पद्मावत् ~ मलिक मो. जायसी

●आईने अकबरी ~अबुल फजल
●अकबरनामा ~अबुल फजल
●बीजक ~ कबीरदास
●रमैनी ~ कबीरदास
●सबद ~ कबीरदास
●किताबुल हिन्द ~ अलबरूनी
●कुली ~ मुल्कराज आनन्द
●कानफैंशंस अॉफ ए लव ~मुल्कराज आनन्द

●द डेथ अॉफ ए हीरो~मुल्कराज आनन्द

●जजमेंट ~ कुलदीप नैयर
●डिस्टेंन्ट नेवर्स~ कुलदीप नैयर

●इण्डिया द क्रिटिकल इयर्स~ कुलदीप नैयर

●इन जेल ~ कुलदीप नैयर
●इण्डिया आफ्टर नेहरू ~कुलदीप नैयर

●बिटवीन द लाइन्स ~कुलदीप नैयर

●चित्रांगदा ~रविन्द्र नाथ टैगौर

●गीतांजली~रविन्द्र नाथ टैगौर

●विसर्जन ~रविन्द्र नाथ टैगौर

●गार्डनर ~रविन्द्र नाथ टैगौर

●हंग्री स्टोन्स ~रविन्द्र नाथ टैगौर

●गोरा ~ रविन्द्र नाथ टैगौर

●चाण्डालिका~ रविन्द्र नाथ टैगौर

●भारत-भारती ~ मैथलीशरण गुप्त

●डेथ अॉफ ए सिटी~ अमृता प्रीतम

●कागज ते कैनवास~ अमृता प्रीतम

●फोर्टी नाइन डेज~ अमृता प्रीतम

●इन्दिरा गाँधी रिटर्नस ~खुशवंत सिहं

●दिल्ली ~खुशवंत सिहं
●द कम्पनी अॉफ वीमैन ~ खुशवंत सिहं

●सखाराम बाइण्डर ~ विजय तेंदुलकर

●इंडियन फिलॉस्पी ~डॉ. एस. राधाकृष्णन

●इंटरनल इंडिया ~इंदिरा गाँधी

●कामयानी ~जयशंकर प्रसाद

●आँसू ~ जयशंकर प्रसाद
●लहर ~ जयशंकर प्रसाद
●लाइफ डिवाइन ~अरविन्द घोष

●ऐशेज अॉन गीता ~अरविन्द घोष

●अनामिका ~सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

●परिमल ~सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

●यामा ~ महादेवी वर्मा
●ए वाइस अॉफ फ्रिडम ~नयन तारा सहगल

●एरिया अॉफ डार्कनेस ~वी. एस. नायपॉल

●अग्निवीणा ~ काजी नजरुल इस्लाम

●डिवाइन लाइफ ~ शिवानंद
●गोदान ~ प्रेमचन्द्र
●गबन ~ प्रेमचन्द्र
●कर्मभूमि ~ प्रेमचन्द्र
●रंगभूमि ~ प्रेमचन्द्र
●अनटोल्ड स्टोरी ~बी. एम. कौल

●कन्फ्रन्डेशन विद पाकिस्तान ~बी. एम. कौल

●कितनी नावों में कितनी बार ~अज्ञेय

●गोल्डेन थेर्सहोल्ड ~सरोजिनी नायडू

●ब्रोकेन विंग्स ~सरोजिनी नायडू

●दादा कामरेड ~ यशपाल
●पल्लव ~ सुमित्रानन्दन पंत्त

●चिदम्बरा~ सुमित्रानन्दन पंत्त

●कुरूक्षेत्र ~रामधारी सिहं ‘दिनकर’

●उर्वशी ~रामधारी सिहं ‘दिनकर’

●द डार्क रूम ~आर. के. नारायण

●मालगुड़ी डेज ~आर. के. नारायण

●गाइड ~आर. के. नारायण
●माइ डेज ~आर. के. नारायण
●नेचर क्योर ~ मोरारजी देसाई

●चन्द्रकान्ता ~देवकीनन्दन खत्री

●देवदास ~शरतचन्द्र चटोपाध्याय

●चरित्रहीन ~शरतचन्द्र चटोपाध्याय…