ऊष्मा स्थानांतरण और स्थानांतरण की विधियांMethods of Heat Transfer and Transfer

 

 

ऊष्मा का एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरण होता है और एक बॉडी से दूसरी बॉडी में जाने के लिए उसे किसी माध्यम की जरूरत होती है। और कभी कभी जरूरत नहीं होती, ऊष्मा संवहन के निम्नलिखित माध्यम होते है।

  1. चालन
  2. संवहन
  3. विकिरण
  4. चालन

एक तत्व से दूसरे तत्व में जाने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है उसे संचरण कहते हैं ऊष्मा को एक तत्व उसे दूसरे तत्व में जानने के लिए दूरी बहुत कम होती है अथवा दोनों तत्व में मूवमेंट नहीं होता जैसे ऊष्मा का स्थानांतरण लोहे की छड़ में एक सिरे से दूसरे सिरे की ओर होता है।

 

चालन के लिए फॉरियर का नियम

यह उसमा स्थानांतरण का मुख्य नियम है क्योंकि यह हमें उसमा का प्रारंभिक समीकरण देता है फोर ईयर नियम एक अक्षर स्थिर ऊष्मा बहाव के ऊपर निर्भर है एक अक्षय स्थिर ऊष्मा बहाव की दर एक सतह पर स्थिर रहती है।

फॉरियर के नियमानुसार उष्मा बहाव की दर बहाव के क्षेत्रफल और तापमान में अंतर dt के समानुपाती होती है। तथा मोटाई dx के व्युत्क्रमानुपाती होती है|

2.संवहन

उष्मीय संवहन ऊर्जा स्थानांतरण की वह प्रक्रिया है। जिसमें ऊष्मा तरल के चक्रण या मिश्रण से प्रभावित होती है। संवहन द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण की प्रभाविकता तरलों के मिश्रण पर निर्भर करती है। संवहन दो प्रकार का होता है।

  1. स्वतंत्र संवहन – इसमें तरल उत्पलावन बल के प्रभाव में चक्रण करता है अर्थात ठंडे व गर्म तरल के घनत्वों में अंतर के कारण ऊष्मा का स्थानांतरण होता है।
  2. बलित संवहन – इसमें तरल का प्रवाह पम्प द्वारा करवाया जाता है। न्यूटन के अनुसार संवहन समीकरण निम्न होती है।

Q = hA(t – t’)

जहा Q = संवहन ऊष्मा दर

h = संवहन उष्मीय गुणांक

t- t’ = तापमान अंतर है।

  1. विकिरण – उष्मीय विकिरण ऊष्मा संचरण की ऐसी विधि है जो ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाती है इस विधि में किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

चालन और संवहन में ऊष्मा संचरण का मार्ग टेढ़ा मेढ़ा हो सकता है जबकि विकिरण में संचरण का मार्ग सरल रेखा होता है।

चालन और संवहन में ऊष्मा का संचरण धीरे-धीरे होता है परंतु विकिरण द्वारा ऊष्मा अति शीघ्र प्रकाश के वेग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड से पदार्थ के पृष्ठ पर पहुंचती है। ऊष्मा विकिरण संचरण का सबसे अच्छा उदाहरण सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश की किरणों द्वारा  ऊष्मा का संचरण है।

ऊष्मा विकिरण संचरण के लिए कुछ तथ्य

किरचॉफ नियम

किरचॉफ के नियमानुसार किसी निश्चित ताप पर निश्चित तरंगधैर्य परास के विकिरणों के लिए सभी वस्तुओं की एकवर्णीय उत्सर्जन तथा अवशोषण क्षमताओं का अनुपात नियत होता है और यह उसी ताप पर आदर्श कृष्णिका की स्पेक्ट्रमी उत्सर्जिन क्षमता के बराबर होता है।

या दूसरे शब्दों में कहें तो किसी निश्चित तापमान पर कुल उत्सर्जन(E) क्षमता तथा कुल अवशोषण क्षमता(a) का अनुपात सभी पदार्थों का समान होता है यदि वह पदार्थ वातावरण से साम्य में है|

स्टीफन बोल्ट्जमान नियम(Stephen Boltzmann’s Law)

स्टीपफन के अनुसार किसी पिंड के एकांक क्षेत्रफल से प्रति सेकेंड उत्सर्जित विकिरण की मात्रा पिंड के परम ताप के चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती होती है।