व्यायाम योगा Exercise yoga

परिचय

योगासन मानव शरीर को स्वस्थ रखने की प्राचीन भारतीय काला है। जिसका प्रयोग सदियों से भारत में किया जा रहा है। वर्तमान में मनुष्य का जीवन बेहद जटिल ही गया है। हर पल भाग दोड़ और व्यस्थता बनी रहती है। विज्ञान और तकनीकी के विकास से जीवन में एक और बहुत सारी समस्याओं के समाधान प्राप्त है। टो साथ ही साथ मनुष्य को आलसी भी बनाया है। इसके परिणाम स्वरूप मानसिक तनाव व शारीरिक थकावट बढ़ गई है। इतना ही नहीं समय की कमी के कारण लोग फ़ास्ट फ़ूड,जक फ़ूड का प्रयोग बेतहासा करने लगे है। जिससे मोटापा की समस्या बढ़ रही है।साथ ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। इसके निदान के लिए लोग डॉकटर के पास जाते है। और एलोपैथी के माध्यम से दवाओं पर आश्रित हो जाते है। इन समस्याओं का समाधान आसानी से योग द्वारा किया जाता है। कुछ बहुत कारगर सूक्ष्म व्यायाम को निचे दिया गया है।

हस्त उत्तानासन

सामान्य अवस्था में खड़े होकर दोनों हाथों को आपस में मिलाएं। अब धीरे धीरे सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं और शरीर को थोड़ी पीछे की और धकेले। और फिर इस अभ्यास में हाथ नीचे लाते हुए सास छोड़े।

लाभ  पेट की चर्बी कम करता है।

आलस और थकान कम करता है।

फेफड़े मजबूत होते है

 

गतिमय त्रिलोकसन

दोनों पैरो को तीन फुट की दुरी पर रखते हुए खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए बाएं पैर पर धीरे धीरे वजन देते हुए घुटने से मोड़ें। दूसरा पैर मोड़ें नहीं। कुछ देर इस स्थिति में आएं। दुसरे पैर से यही करे। 5 बार इस योग को दोहराएं।

लाभ  पेट की चर्बी कम करता है।

पिंडली और जंघाओं को आराम मिलता है।

पेट के विकार दूर होते है।

 

पाद  हस्तासन

ताड़ासन की स्थिति में खड़े रहें। श्वास छोड़ते हुए धीरे धीरे आगे की और झुकें एवं दोनों हाथों को पैरों के तलवों के नीचे लगाएं। इस दौरान घुटने नहीं मुड़ने चाहिए।सिर को घुटने से लगाएं। इस स्थिति में 5 से 10 सेकण्ड रुके।

लाभ  पेट की अनावश्यक चर्बी कम करता है।

पेट के विकार दूर होते है। जैसे पेट का फूलना आदि।

अश्व् संचालासन

बाएं पैर को घुटने से मरोड़कर(चित्रानुसार) बैठें। दाएं पैर को जमीन से लगाकर रखें। इस पैर का घुटना जमीन से स्पर्श होना चाहिए और ऊपर की और देखने का प्रयत्न करें।

लाभ  पेट की मांसपेशियों पर दबाव के कारण पाचन तंत्र ठीक रहता है।

रक्त संचार ठीक रहता है।

मेरुदंड लचीला बना रहता है।