जैन समाज के त्यौहार Festivals of jain society

जैन पर्वों का सम्बन्ध लौकिक जगत से ना होकर आत्मा से है| आत्मा शुध्दि जैन पर्वों की पहली विशेषता है| व्रत, उपवास, एकाशन, दर्शन, पूजन, भक्ति, स्वाध्याय, उपदेश श्रमण से आत्मा के द्वेष विकारों को दूर करने का प्रयास किया जाता है| जैन पर्व आत्मजयी बनने की प्रेरणा देते है| जैन समाज में मुख्य पर्व निम्नलिखित है|

  1. दशलक्षण पर्व  प्रतिवर्ष चैत्र, भाद्रपद व माध माह की शुक्ल पंचमी से पूर्णिमा तक दशलक्षण पर्व मनाया जाता है| यह पर्व किसी व्यक्ति से संबंधित ना होकर आत्मा के गुणों से संबंधित है|
  2. पर्युषण पर्व जैन धर्म में पर्युषण पर्व महापर्व कहलाता है| पर्युषण का सात्विक अर्थ है, निकट बसना दिगम्बर परम्परा में इस पर्व का नाम दशलक्षण के साथ जुड़ा हुआ है जिसका प्रारंभ भाद्रपद सुदी पंचमी से होता है और समापन चतुर्दशी को होता है| श्वेताम्बर परम्परा में इस पर्व का प्रारंभ भाद्रपद कृष्णा बारस से होता है व समाज भाद्रपद शुक्ला पंचमी को होता है| अंतिम दिन संवत्सरी पर्व मनाया जाता है व जैन समाज, सभी लोगों से अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है|
  3. ऋषभ जयंती चैत्र कृष्ण नवमी को ऋषभ जयंती पर्व मनाया जाता है| इस दिन जैन समाज के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव का जन्म हुआ|
  4. महावीर जयंती 24वीं तीर्थकर भगवन महावीर का जन्म दिन चैत्र शुकल त्रयोदशी को महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है| इस दिन भगवन महावीर के जीवन से संबंधित झांकियां निकली जाती है|श्री महावीर जी(करौली) में इस दिन विशाल मेले का आयोजन होता है|
  5. सुगंध दशमी पर्व भाद्रपद शुक्ला तृतीय को जैन मंदिरों में सुगंधित द्रव्यों द्वारा सुगंध करके यह पर्व मनाया जाता है|
  6. रोट तीज भाद्रपद शुक्ला तृतीयको जैन मतानुयायी रोट तीज का पर्व मनाते है| जिसमें खीर व रोट(मोटी मिस्सी रोटियाँ) बनाई जाती है|
  7. पढवा ढ़ोक यह दिगम्बर जैन समाज का क्षमायाचना पर्व है जो आश्विन कृष्णा एकम को मनाया जाता है|