Chatrapti Shivaji

छत्रपति शिवाजी:

मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे|इनका जन्म 1627 ई. में शिवनेर दुर्ग (जुन्नार के समीप ) में हुआ था| इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले तथा माता का नाम जीजा बाई था|

इनके गुरु का नाम कोंडदेव था|

शिवाजी का विवाह साईंबाई निम्बालकर से 1640 ई.में हुआ|

शाहजी ने शिवाजी को पूना की जागीर प्रदान कर स्वयं बीजापुर रियासत में नौकरी कर ली|

अपने प्रथम सैन्य अभियान(1644) के अंतर्गत शिवाजी ने बीजापुर के तोरण नामक पहाड़ी किले पर अधिकार कर लिया|1656 में शिवाजी ने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया|

बीजापुर के सुल्तान ने सितम्बर 1665 में शिवाजी को परास्त करने के लिए अपने योग्य सेनापति अफजल खां को भेजा था लेकिन शिवाजी ने अफजल खां की हत्या कर दी|

शिवाजी को ओरंगजेब ने 16 मई 1666में जयपुर भवन में कैद कर लिया था|जहां से वे 16 अगस्त 1666 को भाग निकले थे|

शिवाजी ने सूरत को दो बार (1664 व 1669में)लूटा था|

ओरंगजेब के शासनकाल में शिवाजी ने (1665)पुरन्दर की संधि की थी|यह संधि शिवाजी तथा जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह के मध्य हुई थी|

1672 में शिवाजी ने बीजापुर से पन्हाला दुर्ग चीन लिया था|

16 जून 1674 को शिवाजी ने रायगढ़ में काशी के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगा भट्ट द्वारा अपना राज्याभिषेक करवाया|मूलरूप से गंगा भट्ट महाराष्ट्र का एक सम्मानित ब्राह्मण था|जो कि लम्बे समय से काशी में रह रहा था|

शिवाजी के मंत्रीमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था|अष्ट प्रधान में पेशवा का पद सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होता था|अष्टप्रधान में निम्न पद होते थे-

1.पेशवा (प्रधानमंत्री)-राज्य का प्रशासन व अर्थव्यवस्था की देखरेख

2.सरी-ए-नौबत (सेनापति)-सैन्य प्रधान

3.अमात्य (राजस्व मंत्री)-आय व्यय का लेखा-जोखा

4.वाक्यानवीय-सुचना,गुप्तचर,संधि विग्रह के विभागों का अध्यक्ष

  1. चिटनिस-राजकीय पत्रों को पढकर उसकी भाषा शैली को देखना
  2. सुमंत –विदेश मंत्री
  3. 7.पंडित राव –धार्मिक कार्यो के लिए तिथि का निर्धारण
  1. न्यायधीश-न्याय विभाग का प्रधान

शिवाजी के दरबार में मराठी को भाषा के रूप में प्रयोग किया गा|

शिवाजी के किले की सुरक्षा में निम्न अधिकारी मौजूद रहते थे-1.हवलदार 2.सरेनौबत 3.सवनिस

शिवाजी की सेना तीन महत्त्वपूर्ण भागों में विभक्त थी-1.पागा सेना 2.सिलहदार 3. पैदल

शिवाजी की कर व्यवस्था मलिक अम्बर की कर व्यवस्था पर आधारित थी,शिवाजी ने रस्सी द्वारा माप की व्यवस्था के स्थान पर काठी व मानक छड़ी के प्रयोग को शुरू किया|

चौथ व सरदेशमुखी नामक कर शिवाजी ने शुरू किये|

चौथ-किसी क्षेत्र को बर्बाद न करने के बदले डी जाने वाली दी जाने वाली रकम को कहा जाता  था, सरदेसमुखी-इसके हक का दावा करके शिवाजी स्वयं को सर्वश्रेष्ठ देशमुख प्रस्तुत करना चाहते थे|

मात्र 53 वर्ष की आयु में 14 अप्रैल 1680 को शिवाजी की मृत्यु हो गई|

शिवाजी के उत्तराधिकारी-शिवाजी का उत्तराधिकारी शम्भाजी था|शम्भाजी ने उज्जेन के हिंदी व संस्कृत के विख्यात कवि कलश को अपना सलाहकार नियुक्त किया|

21 मार्च 1689 को मुगल सेनापति मखर्रब खां ने संगमेश्वर में छिपे हुए शम्भाजी व कलश को गिरफ्तार कर उनकी हत्या कर दी|

इसके बाद राजाराम आया और उसने अपनी दूसरी राजधानी सतारा को बनाया|यह भी मुगलों से संघर्ष करता हुआ 1700 में मारा गया|

राजाराम की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी ताराबाई अपने 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी-2 का राज्याभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गई|

1707 में औरंगजेब  की मृत्यु के बाद शम्भाजी का पुत्र साहू (जो ओरंगजेब की कैद में था) वापस महाराष्ट्र आया|जिससे 1707 में साहू और ताराबाई के मध्य खेडा का युद्ध हुआ जिसमे साहू विजयी रहा|

साहू ने 22 जनवरी 1708 ई.को सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया ,साहू के नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्यवाद के प्रवर्तक पेशवा लोग थे जो साहू के पैतृक प्रधानमंत्री थे|पेशवा पद पहले पेशवा के साथ ही वंशानुगत हो गया|

1713 साहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया,इसकी मृत्यु 1720 में हुई|इसके बाद पेशवा बाजीराव प्रथम हुए|

पेशवा बाजीराव प्रथम ने मुगल साम्राज्य की कमजोर हो रही स्थिति का फायदा उठाने के लिए साहू को उत्साहित करते हुए कहा कि आओ,हम इस पुराने वृक्ष के खोखले तने पर प्रहार करे,शाखाए तो स्वयं गिर जाएगी,हमारे प्रयत्नों से मराठा पताका कृष्णा नदी से अटक तक फहराने लगेगी|उत्तर में साहू ने कहा-नि:संदेह आप योग्य पिता के योग्य पुत्र है|

पालखेडा का युद्ध 7 मार्च 1728 में बाजीराव प्रथम व निजामुलमुल्क के बीच हुआ जिसमे निजाम की हार हुई,निजाम के साथ मुंशी शिवगाव की संधि हुई|

दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था|जिसने 29 मार्च 1737 को दिल्ली पर धावा बोल दिया,उस समय मुगल बादशाह मुहम्मदशाह दिल्ली छोड़ने को तैयार हो गया था|

बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक महिला से सम्बन्ध होने के कारण चर्चित रहा था|

बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव 1740 में पेशवा बना|1750 की सन्गोला संधि के बाद पेशवा के हाथ में सारे अधिकार सुरक्षित हो गये|

बालाजी बाजीराव को नाना साहेब के नाम से नाम से जाना जाता है|

झलकी की संधि बालाजी बाजीराव व हैदराबाद के निजाम के मध्य हुई थी|

बालाजी बाजीराव के समय ही पानीपत का तीसरा युद्ध(1761) हुआ जिसमे मराठो की हार हुई|इस हार को सह नहीं सकने के कारण बालाजी की मृत्यु 1761 में हो गई|

माधवराव नारायण प्रथम 1761 में पेशवा बना,इसने मराठो की खोयी हुई प्रतिष्ठा को पुन: प्राप्त करने का प्रयास किया|

माधवराव ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाह आलम-2 को पुन: दिल्ली की गद्दी पर बैठाया|मुगल बादशाह अब मराठो का पेंशन भोगी बन गया|

पेशवा नारायण राव की हत्या उसके चाचा रघुनाथ राव ने (1772-73) कर दी|

अंतिम पेशवा राघोवा का पुत्र बाजीराव-2 था,जो अंग्रेजो की सहायता से पेशवा बना था|मराठो के पतन में सर्वाधिक योगदान इसी का था|यह सहायक संधि स्वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार था|

मराठों के युद्ध-

प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध-1775-82-इसके बाद पुरन्दर की संधि हुई|

द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध-1803-05 –इसके बाद 1803 में देवगांव की संधि हुई|

तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध-1816-18-इसके बाद मराठा शक्ति व पेशवा के वंशानुगत पद को समाप्त कर दिया गया|