शिक्षक दिवस: श्री राधा कृष्णन जी का परिचय

*🥀🍃🥀​डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण🥀🍃🥀*

*📍जन्म-*5 सितंबर 1888
*📍पिता का नाम-*वीरास्वामी
*📍माता का नाम-*सीताम्मा
*📍प्रारंभिक शिक्षा-*क्रिश्चन मिशनरी संस्था नॉर्थन मिशन स्कूल तिरुपति
*📍मैट्रिक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण-*1902 में
*📍विषय में विशेष योग्यता-* मनोविज्ञान ,इतिहास और गणित
*📍राधाकृष्णन ने m.a. पास किया-*दर्शनशास्त्र विषय में
*📍दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक-*मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में 1916
*📍दर्शनशास्त्र से परिचय-* राधाकृष्ण के लेख और भाषण के माध्यम से
*📍मानक उपाधियां-*यूरोप और अमेरिका प्रवास के बाद
*📍पंडित जवाहरलाल नेहरू से प्रथम मुलाकात-*1928 में शीत ऋतु में (कोलकाता अधिवेशन के दौरान)
*📍मानचेस्टर विश्वविद्यालय द्वारा आमंत्रण-*व्याख्यान हेतु 1929 में
*📍आंध्र विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर-*1931 से 36 तक
*📍ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक-*1936 से 1952 तक
*📍जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में कार्य-*कोलकाता विश्वविद्यालय 1935 से 1941 तक
*📍1939 से 48 तक-*काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चांसलर
*📍यूनेस्को में उपस्थिति-*1946 में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में
*📍संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य-*1947 से 49 तक
*📍राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना-*1952 में सोवियत संघ से आने के बाद
उप राष्ट्रपति के रूप में
*📍राधाकृष्णन का पदभार-*राज्य सभा में अध्यक्ष
*📍शिक्षक दिवस-*श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित करना
*📍शिक्षक दिवस-*सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्मदिन अर्थात 5 सितंबर को
*📍ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा सर की उपाधि-*1931 में
*📍भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित-*1954 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा
*📍भारत रत्न पुरस्कार-*दार्शनिक व शैक्षिक उपलब्धियों के लिए
*📍लगातार पांच सालो तक नोमिनेट हुए-*नोबेल पुरस्कार के लिए
*📍राधा कृष्ण का व्यक्तित्व-* महान शिक्षाविद ,महान दार्शनिक, महान वक्ता ,विचारक भारतीय संस्कृति के,वैज्ञानिक डॉक्टर
*📍विशेष उपलब्धि-*भारत को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाना
*📍विशेष  रूचि-*अच्छी किताब पढ़ने की
*📍महात्मा गांधी से मुलाकात-*1915 में
*📍रविंद्रनाथ टैगोर से मुलाकात-*1918 में मैसूर में
*📍”रविंद्र नाथ टैगोर का दर्शन” शिर्षक पुस्तक-*डॉक्टर राधाकृष्णन द्वारा 1918 में प्रकाशित
*📍अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान-*”द रीन ऑफ रिलीजन  इन कंटेंपरेरी फिलॉस्फी पुस्तक से
*📍सोवियत संघ के विशिष्ट राजदूत-*सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन 1952
*📍उपराष्ट्रपति पद पर नियुक्त-*13मई1952 से 12मई 1962
*📍राष्ट्रपति पद पर  निर्वाचित-*13मई 1962 में राजेंद्र प्रसाद के बाद(13मई1967)
*📍डॉक्टर सर्वपल्ली राष्ट्रपति पद पर ताजपोशी-*13 मई 1962 को 31 तोपों की सलामी के साथ
*📍डॉक्टर राधाकृष्णन का पहनावा-*सफेद कपड़े और दक्षिण भारतीय पगड़ी
*📍नाईट बेचलर की उपाधि लौटाई-*आजादी के बाद
*📍5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत-*1962 से
*📍साहित्य अकादमी फेलोशिप-*1968 में (डॉक्टर राधाकृष्ण इसे पाने वाले पहले व्यक्ति थे)
*📍टेम्प्लेटो प्राइस-*1975 (मरणोपरांत)
*📍ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा स्कॉलरशिप की शुरुआत-*1989 डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम से
*📍मृत्यु-*17 अप्रैल 1975(88वर्ष) को
*📍डॉक्टर राधाकृष्णन की जीवनी का प्रकाशन-*1989 में उनके पुत्र डॉक्टर एस गोयल द्वारा
*📍विशेष उपलब्धि-*भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति ,भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, गैर राजनीतिक के होते हुए भी संविधान सभा क सदस्य, नोबेल पुरस्कार के लिए 5 बार चयन

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म🥀🍃🥀*

*🍁दक्षिण भारत के तिरुतनी* नामक स्थान में हुआ था यह स्थान *चेन्नई से 64 किलोमीटर उत्तर पूर्व में* स्थित है

*🍁इनका *जन्म 5 सितंबर 1888* को हुआ था जिस परिवार में *इन्होने जन्म लिया वह एक ब्राह्मण परिवार* था और *इनका जन्म स्थान भी एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात है*

*🍁राधा कृष्ण के पुरखे पहले कभी सर्वपल्ली नामक ग्राम*में रहते थे और *18वीं शताब्दी के मध्य उन्होंने तिरुतनी ग्राम*की ओर निष्क्रमण किया था

🍁लेकिन *उनके पूर्वज चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्म स्थल के ग्राम का बोध* भी सदेव रहे इसी कारण *उनके परिजन अपने नाम के पूर्व सर्व्पल्ली* लगाते हैं

🍁डॉक्टर राधाकृष्णन एक गरीब लेकिन *विद्वान ब्राम्हण* की संतान थे उनके *पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा* था

*🍁इनके पिता राजस्व विभाग में कार्य करते थे इनके पिता के ऊपर बहुत बड़े परिवार के भरण-पोषण* का दायित्व था

*🍁वीरा स्वामी के 5 पुत्र और एक पुत्री* थी जिसमें *राधाकृष्णन का स्थान दूसरे नंबर के पुत्र*पर था इनके *पिता काफी कठिनाइयो के साथ परिवार का निर्वहन* कर रहे थे

🍁इस कारण *बालक राधाकृष्णन का बचपन में कोई विशेष सुख प्राप्त नहीं*किया

 

*🥀🍃🥀राजनीति में आने से पूर्व डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन🥀🍃🥀*

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत *एक प्रख्यात शिक्षाविद्,  महान दार्शनिक, उत्कृष्ट वक्ता और एक आस्थावान हिंदू विचारक*थे
🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन *राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 40 वर्ष शिक्षक के रुप* में बिताए थे

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन में *एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण* मौजूद थे *डॉक्टर राधाकृष्णन समस्त विश्व को एक शिक्षालय* मानते थे

🍁उनकी मान्यता थी कि *शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का शुद्ध उपयोग* किया जा सकता है इसीलिए *समस्त विश्व को एक इकाई समझकर ही शिक्षा का प्रबंधन* किया जाना चाहिए

🍁एक बार *ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में भाषण* देते हुए उन्होंने कहा था कि *मानव की जाति एक* होनी चाहिए *मानव इतिहास का संपूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है और यह तभी संभव हो सकता है जब समस्त देशों की नीतियों का आधार विश्व शांति की स्थापना* का प्रयत्न करना हो

🍁सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपनी *बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं ,आनंदमय अभिव्यक्तियों और हंसाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मंत्रमुग्ध*कर दिया करते थे

🍁वह छात्रों को  *उच्च नैतिक मूल्यों का आचरण करने के लिए प्रेरित* करते थे वह जिस विषय को पढ़ाते थे *उसे पढ़ाने से पहले स्वयं अध्ययन* करते थे *दर्शन शास्त्र जैसे  गंभीर विषय को भी वह अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोचक* बना देते थे

 

*🥀🍃🥀शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का योगदान🥀🍃🥀*

*🍁शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टर राधाकृष्णन ने जो अमूल्य योगदान दिया वह निश्चित अविस्मरणीय* है वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे *वह एक जाने माने विद्वान शिक्षक, वक्ता ,प्रशासक, राजनीयक, देशभक्त और शिक्षा शास्त्रीय*थे

🍁अपने जीवन के *उत्तरार्ध में अनेक उच्च पदों पर काम करते हुए भी शिक्षा के क्षेत्र में सतत योगदान* करते रहे
उनकी मान्यता थी कि *यदि सही तरीके से शिक्षा की जाए तो समाज की अनेक बुराइयों को मिटाया* जा सकता है

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का कहना था कि *केवल जानकारी देने से शिक्षा नहीं होती बल्कि जानकारी का अपना महत्व है और आधुनिक युग में तकनीकी जानकारी महत्वपूर्ण विधि है*

*🍁व्यक्ति के बौद्धिक झुकाव और उसकी लोकतांत्रिक भावना का भी शिक्षा में बड़ा* महत्व है यह सभी बातें *व्यक्ति को उत्तरदायी नागरिक* बनाती है

*🍁शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति* यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो *व्यक्ति को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान* करती है

🍁इन सभी का *जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है करुणा प्रेम और श्रेष्ठ परंपराओं का विकास* भी शिक्षा के उद्देश्य है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहते हैं जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबंध* नहीं होगा और *शिक्षा को एक मिशन* नहीं मानेगा तब तक *अच्छी शिक्षा की कल्पना*नहीं की जा सकती है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का कहना था कि शिक्षक*उन्हीं लोगों को बनाया जाना चाहिए जो *सबसे अधिक बुद्धिमान हो शिक्षक को मात अच्छी तरह अध्यापन करके ही संतुष्ट नहीं* हो जाना चाहिए बल्कि उसे *अपने छात्रों का स्नेह और आदर भी अर्जित* करना चाहिए

*🍁सम्मान शिक्षक होने भर से नहीं मिलता उसे अर्जित* करना पड़ता है

 

*🥀🍃🥀शिक्षक दिवस की शुरुआत🥀🍃🥀*
*🍁शिक्षक दिवस की शुरुआत डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर देश के दूसरे राष्ट्रपति बनने के समय 1962* में की गई थी

*🍁हमारे देश के पूर्व और द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस* के रूप में मनाई जाती है

🍁इन दिनों जब *शिक्षा की गुणात्मकता का हास होता जा रहा है और गुरू शिष्य संबंधों की पवित्रता को ग्रहण* लगता जा रहा है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्यस्मरण फिर एक नई चेतना पैदा* कर सकता है

*🍁सन 1962 में जब डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे देश के दूसरे राष्ट्रपति* बने थे तब कुछ *शिष्य और प्रशंसक उनके पास गए उन्होंने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन से निवेदन किया कि वह उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस* के रूप में मनाना चाहते हैं

🍁उन्होंने कहा *मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाने से निश्चित ही में अपने को  गौरवान्वित अनुभव*करुंगा तब से आज तक *5 सितंबर सारे देश में उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रुप में मनाया* जा रहा है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपना जन्मदिन अपने व्यक्तिगत नाम से नहीं बल्कि संपूर्ण शिक्षक बिरादरी को सम्मानित* किए जाने के *उद्देश्य से शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त* की थी

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को प्राप्त मानक उपाधियां, सम्मान और देश के महान विचारकों से मुलाकात🥀🍃🥀*

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*🌹”””मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमों की शुरुआत है””🌹*

🍁ऐसे *सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने वाले असीम प्रतिभा के धनी डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पुरस्कारों और उपाधियों से सम्मानित* किया गया है

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन व्यक्तित्व के धनी थे उनका स्वभाव हंसमुखी दूसरों की मदद करना और अपने विद्यार्थियों में नैतिक गुणों का विकास* करने जैसा था

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कार्य *उनके अमूल्य विचार प्रतिभा के धनी और देश को  शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनके जीवन्तकाल और मरणोपरांत गई उपाधियों और सम्मान से सम्मानित* किया गया है

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन यूरोप और अमेरिका प्रवास से भारत लौटे तो यहां की विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधि प्रदान कर उनकी विद्वता का सम्मान* किया

*🍁1929 में इन्हें व्याख्यान देने हेतु मानचेस्टर विश्वविद्यालय द्वारा आमंत्रित* किया

 

*🍁1932 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नाइट बेचलर/ सर की उपाधि* दी गई थी *जिसे इन्होने आजादी के बाद लौटा* दिया था

*🍁1931 में इन्हें फेलो ऑफ द ब्रिटिश एकेडमी*

*🍁1954 में इन्है इनके कार्यों के लिए भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित* किया गया

*🍁1954 में इन्हें जर्मन ऑर्डर पौर मेरिट फॉर आर्ट्स एंड साइंस सम्मान* से सम्मानित किया गया

*🍁1961 में पीस प्राइज ऑफ थे जर्मन बुक ट्रेड से 1962 में इन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत* की गयी

*🍁1963 में ब्रिटिश ऑर्डर ऑफ मेरिट सम्मान*

*🍁1968 में साहित्य अकादमी फेलोशिप(डॉक्टर राधाकृष्णन इसे पाने वाले पहले व्यक्ति थे)*

*🍁1975 में टेम्पल्टों ऑफ प्राइज़ (मरणोपरांत) 1989 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा इनके नाम से स्कॉलरशिप* की शुरुआत की गई

 

*🥀🍃🥀भारतीय नेताओं से मुलाकात और उनका जीवन पर प्रभाव🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1915 में महात्मा गांधी जी से मिले उनके विचारों से प्रभावित होकर राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आंदोलन* के समर्थन में अनेक लेख लिखें

*🍁1918 में रविंद्र नाथ टैगोर से मिले रविंद्र नाथ टैगोर ने इन्हें बहुत प्रभावित* किया यही कारण था कि *इनकी विचारों की अभिव्यक्ति हेतु डॉक्टर राधाकृष्णन ने 1918 में रविंद्रनाथ टैगोर का दर्शन शीर्षक से एक पुस्तक* प्रकाशित की

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन किताबों को बहुत अधिक महत्व* देते थे उनका मानना था कि *पुस्तके वह साधन है जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण* कर सकते हैं

*🍁राधाकृष्णन द्वारा लिखी उनकी किताब द मीन ऑफ रिलीजन इन कंटेंपरेरी फिल्म सिटी से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर* पर पहचान मिली

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1928 की शीत ऋतु में पंडित जवाहरलाल नेहरू* से मिले थे उनकी *यह प्रथम मुलाकात* थी

*🍁पंडित जवाहरलाल नेहरु कांग्रेस पार्टी के वार्षिक अधिवेशन में सम्मिलित* होने के लिए आए थे

*🍁यद्यपि सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय शैक्षिक सेवा के सदस्य* होने के कारण किसी भी *राजनीतिक संभाषण में हिस्सेदारी नहीं*कर सकते थे लेकिन *उन्होंने अपने इस पद की कोई परवाह नहीं*की और भाषण दिया

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विद्यार्थी जीवन और कार्यकाल🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जिस परिवार में जन्म लिया था उस परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं* थी लेकिन *वह शुरू से ही ज्ञानी और मेघावी* छात्र थे

🍁उन्हें *बचपन से ही किताबें पढ़ने का अत्याधिक शौक और रुचि* थी *राधाकृष्णन शुरू से ही पढ़ाई लिखाई में काफी रुचि* रखते थे

*🍁राधाकृष्णन का बचपन तिरुतनी और तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों*पर ही व्यतीत हुआ उन्होंने *अपने प्रथम 8 वर्ष तिरुतनी* में ही गुजारे थे

*🍁राधाकृष्णन का परिवार धार्मिक भावनाओं से संपूर्ण* था लेकिन इसके बावजूद *उन्होंने राधाकृष्णन को प्रारंभिक शिक्षा के लिए क्रिश्चन मिशनरी संस्था लुर्थन मिशनरी स्कूल तिरुपति में अध्ययन* के लिए भेजा

🍁इसके पश्चात *अगले 4 वर्षों के लिए इन्हें वेलूर में शिक्षा ग्रहण* करने हेतु भेजा गया इसके बाद की *शिक्षा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पूरी* हुई

🍁स्कूल के दिनों में ही *डॉक्टर राधाकृष्ण ने बाइबल के महत्वपूर्ण अंश कंठस्थ याद* कर लिए थे जिसके लिए *उन्हें विशिष्ट योग्यता का सम्मान* दिया गया

🍁राधाकृष्णन ने कम उम्र में ही *अपने स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर को पढ़* लिया था और *इनके विचारों को आत्मसात* किया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1902 में मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी* से पास की ओर *छात्रवृत्ति प्राप्त की क्रिश्चियन कॉलेज मद्रास ने भी राधाकृष्णन की विशेष योग्यता के कारण इन्हें छात्रवृत्ति* प्रदान की

*🍁1904 में डॉक्टर राधाकृष्णन ने कला संकाय परीक्षा में प्रथम श्रेणी*में प्राप्त की *इन्हें मनोविज्ञान इतिहास और गणित विषय में विशेष योग्यता की टिप्पणी* भी उच्च प्राप्तांकों के कारण मिली थी

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर* किया और *मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक* का पद पर कार्य किया

 

*🥀🍃🥀व्यवसायिक कार्य🥀🍃🥀*

*🍁मद्रास रेसीडेंसी  कॉलेज* में वह प्राध्यापक भी रहे *राधाकृष्णन ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र*से परिचित कराया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के लेखक की प्रशंसा पूरे विश्व में की गई 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय* के यह वाइस चांसलर रहे

🍁इसके पश्चात *डॉक्टर राधाकृष्णन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक बने कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में इन्होंने 1935 से 1941* तक का कार्य किया

*🍁1939 से 1948 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चांसलर* भी बने इसके पश्चात *1953 से 1962 तक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन दिल्ली विश्वविद्यालय के चांसलर* रहे

🍁इसी दौरान *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को सोवियत संघ के विशिष्ट राजदूत और भारत का उप राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित* किया गया था

🍁यह सब *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा* का ही असर था कि उन्हें *स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्मात्री  सभा का सदस्य बनाया गया 1964 में यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि* के रूप में इन्हें नियुक्त किया गया

 

 

*🥀🍃🥀राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन और राजनयिक कार्य🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की असीम प्रतिभा और उत्कृष्ट कार्य के कारण ही स्वतंत्रता के बाद उन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य* बनाया गया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा* के सदस्य रहे इसी समय *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कई विद्यालय विश्वविद्यालयों के चेयरमैन* भी नियुक्त किए गए

🍁भारतीय कांग्रेसजन चाहते थे कि *सर्वपल्ली राधाकृष्णन के गैर राजनीतिक व्यक्ति* होते हुए भी इस *संविधान सभा के सदस्य*बनाया जाए

*🍁पंडित जवाहरलाल नेहरु चाहते थे कि राधाकृष्णन के संभाषण और वक्तृव्य प्रतिभा का उपयोग 14-15 अगस्त 1947 की रात्रि को उस समय किया जाए जब संविधान सभा का ऐतिहासिक सत्र आयोजित* हो

🍁राधाकृष्णन को निर्देश दिया गया है कि *वह अपना संबोधन  रात्रि को ठीक 12:00 बजे समाप्त करें इसी के पश्चात पंडित जवाहरलाल नेहरु जी के नेतृत्व में संवैधानिक संसद द्वारा शपथ* ली जानी थी

🍁इस संबोधन के बारे में *डॉक्टर राधाकृष्णन और पंडित जवाहरलाल नेहरू के अलावा किसी को भी नहीं पता* था आजादी के बाद उनसे *आग्रह किया गया कि वह मातृभूमि की सेवा के लिए विशिष्ट राजदूत* के रूप में *सोवियत संघ के साथ राजनियक कार्य*की पूर्ति करें

🍁इस प्रकार *विजयलक्ष्मी पंडित का डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नया उत्तराधिकारी* चुना गया

*🍁पंडित जवाहरलाल नेहरू के चयन पर कई व्यक्तियों*ने आश्चर्य व्यक्त किया कि *एक दर्शनशास्त्री को राजनीतिक सेवाओं*के लिए *क्यों चुना गया उन्हें संदेह* था कि *डाक्टर राधा कृष्ण की योग्यताए*सौंपी गई

*🍁जिम्मेदारी के अनुकूल नहीं है लेकिन बाद में सर्वपल्ली राधाकृष्ण ने साबित* किया कि *मास्को में नियुक्ति भारतीय राजनीतिज्ञ* में सबसे बेहतर थे

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ना तो राजनीतिक क्षेत्र में और ना शिक्षक जगत* में नियमों से बंधे हुए नहीं थे

*🍁1952 में सोवियत संघ से आने के बाद डॉक्टर राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति* निर्वाचित किया गया *संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का नया पद सर्जित* किया गया

*🍁जवाहरलाल नेहरू ने इस पद हेतु राधा कृष्ण का चयन करके पुनः लोगों को चौंका* दिया सभी को *आश्चर्य था कि इस पद के लिए कांग्रेस पार्टी के किसी राजनीति्ञ*का चुनाव क्यों नहीं किया गया

*🍁उप राष्ट्रपति के रूप में राधा कृष्णन ने राज्यसभा में अध्यक्ष का पदभार* संभाला

*🍁सन 1952 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति* बनाया गया *डॉक्टर राधाकृष्णन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के चयन को सही साबित* किया

🍁क्योंकि *उपराष्ट्रपति के रूप में एक गैर राजनीतिक व्यक्ति ने सभी राजनीतिज्ञ*को प्रभावित किया था *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति के पद पर 13 मई 1952 से 12 मई 1962 तक कार्यरत* रहे

🍁जब *1962 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल समाप्त* होने वाला था *उसके पश्चात डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति का पद* दिया गया

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में 13 मई 1962 को नियुक्त*किए गए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के *राष्ट्रपति बनने पर उन्हें 31 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रपति के पद* पर बिठाया गया

*🍁डॉक्टर राधाकृष्णन का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल 13 मई 1962 से 12 मई 1967 तक* का था

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के *राष्ट्रपति बनने पर प्रसिद्ध दार्शनिक बर्टेड रसेल ने कहा था– *कि “”यह विश्व के दर्शनशास्त्र का सम्मान है की महान भारतीय गणराज्य मैं डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण को राष्ट्रपति के रुप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते में विशेषत: खुश हु”*

*🍁प्लेटो ने कहा था की–दार्शनिक को राजा होना चाहिए और महान भारतीय गणराज्य ने एक दार्शनिक को राष्ट्रपति बनाकर प्लेटो को सच्ची श्रद्धांजलि* अर्पित की है

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की नजरों में गुरु शिष्य का संबंध🥀🍃🥀*

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन *पूरी दुनिया को एक ही विद्यालय के रूप*में देखते थे उनका विचार था कि *शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सही उपयोग* किया जा सकता है *अतः विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन* करना चाहिए

*🍁विश्व की अनूठी परंपरा के प्रवर्तक डॉक्टर राधाकृष्णन अपने विद्यार्थियों का स्वागत हाथ मिलाकर* करते थे वह अपने *विद्यार्थियों को जीवन में उच्च नेतिक कर्तव्य को करने के विचार प्रसारित* करते रहते थे

*🍁मैसूर में कोलकाता आते वक्त मैसूर स्टेशन पर डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जय जयकार* से गूंज उठा था

🍁यह वह पल था *जब हर किसी की आंखे उन की विदाई पर नम थी उनका व्यक्तित्व प्रवाह केवल छात्र-छात्राओं पर ही नहीं बल्कि देश विदेश के अनेक प्रबुद्ध लोगो*पर भी पड़ा

*🍁रूसी नेता स्टालिन के हृदय में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रति* बहुत सम्मान था

*🍁बच्चों को भी इस महान शिक्षक से विशेष लगाव था इसी कारण राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद विद्यार्थियों द्वारा उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जाहिर*की गई थी

🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन *बच्चों की शिक्षा के प्रति कोई समझौता* नहीं करते थे *वह बच्चों को वही शिक्षा देना चाहते थे जो उनके जीवन को बेहतर* बना सके

*🍁विद्यार्थियों के समय को वह विद्यार्थियों के अध्ययन कार्य*में ही लगाते थे

*🍁एक अच्छा शिक्षक वही हो सकता है जो अपने छात्रों का भविष्य उज्जवल* बना सके और *उसे सही दिशा में एक अच्छा ज्ञान प्राप्त* कर सके

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी🥀🍃🥀*

*🍁डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी को उनके पुत्र डॉक्टर एस. गोपाल ने 1989 में प्रकाशित* किया

🍁इससे पूर्व *डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन की घटनाओं के संबंध में किसी को भी अधिक जानकारी नहीं* थी

*🍁लेकिन बाद में स्वयं उनके पुत्र ने ही माना कि उनकी पिता की व्यक्तिगत जिंदगी के विषय* में लिखना एक बड़ी चुनौती थी और *एक नाजुक मामला* था

🍁लेकिन *डॉक्टर एस गोपाल ने पिता के साथ अपने संबंधों को भी जीवन में रेखांकित* किय

*🍁1952 में न्युयार्क में लाइब्रेरी ऑफ लिविंग फिलॉसफर के नाम से एक श्रृंखला  दी गई है जिसमें सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में अधिकारिक रूप* से लिखा गया था

*🍁राधाकृष्णन ने उस में दर्ज जानकारी का कभी Khandan* नहीं किया

*🍁मार्च 1975 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को टेंपलटन पुरस्कार* से सम्मानित किया गया *जोकि धर्म के क्षेत्र में उत्थान के लिए प्रदान किया*जाता है

🍁इस *पुरस्कार को ग्रहण करने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के ईसाई संप्रदाय* के व्यक्ति थे

 

 

 

*🥀🍃🥀डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की मृत्यु🥀🍃🥀*

*””“मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमो की शुरुआत है।”””*

 

*ऐसे सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने वाले असीम प्रतिभा का धनी सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन लम्बी बीमारी के बाद 17 अप्रैल, 1975 को प्रातःकाल इहलोक* लोक छोङकर परलोक सिधार गये।

*देश के लिए यह अपूर्णीय* क्षति थी। परंतु अपने समय के *महान दार्शनिक तथा शिक्षाविद् के रूप में वे आज भी अमर* हैं।

*शिक्षा को मानव व समाज का सबसे बड़ा आधार मानने* वाले डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का *शैक्षिक जगत में अविस्मरणीय व अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय* रहेगा। उनके *अमुल्य विचार के साथ अपनी कलम को यहीं विराम* देते हैं।