बल और ऊर्जा (Force and Energy)

बल:-

वह भौतिक राशि जो किसी पिंड या वस्तु की स्थिति को परिवर्तित कर देती हो या परिवर्तित करने का प्रयास करती हो बल कहलाती है|

बल को न्यूटन की गति के प्रथम नियमानुसार परिभाषित किया जाता है|जबकि बल का संख्यात्मक मान न्यूटन की गति के द्वितीय नियम के द्वारा प्राप्त होता है|

F= m X a

बल एक सदिश राशि है|जिसकी दिशा त्वरण या मन्दन की दिशा में पाई जाती हैं|

मात्रक =K.g x मीटर/सेकण्ड2= न्यूटन ,विमा =M1L1T-2

1 न्यूटन = 105 डाईन

  • अभिकेन्द्रीय बल: जब कोई पिंड या वस्तु किसी वृत्ताकार पथ में गतिशील होता है तो पिंड पर केंद्र की ओर लगने वाले बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते है|

  • वृत्ताकार पथ में गति के लिए अभिकेन्द्रीय बल जिम्मेदार होता है इसका मान

F=mv2/r ,F=m X(v2/r)

जैसे -1.धागे में बंधे हुए पत्थर की गति में अभिकेन्द्रीय बल का मान धागे के तनाव बल के समान पाया जाता है|

2.परमाणु के अंदर इलेक्ट्रान की कक्षाओं में गति:

इसमें स्थिर वैधुत आकर्षण बल (ze2/r2)अभिकेन्द्रीय बल के बराबर पाया जाता है|

अपकेन्द्रीय बल:किसी पिंड या वस्तु की वृत्ताकार पथ में गति के दौरान पिंड पर बाहर की ओर आरोपित होने वाले बल को अपकेन्द्रिय बल कहा जाता है|

किसी पिंड की रेखीय गति के लिए अपकेन्द्रिय बल जिम्मेदार होता है|इसका मान F= mv2/r के बराबर पाया जाता है|

अपकेन्द्रिय बल,अभिकेन्द्रीय बल के समान पाए जाते है लेकिन दिशा में विपरीत होते है|

  • नोट:-1.यदि अपकेन्द्रिय बल का मान अभिकेन्द्रीय बल से अधिक पाया जाता है तो पिंड या वस्तु वृत्ताकार पथ को छोडकर रेखिक गति करने लगती है|

2.यदि अभिकेन्द्रीय बल का मान अपकेन्द्रिय बल से अधिक पाया जाता है तो पिंड का वृत्ताकार पथ धीरे-धीरे कम हो जाता है तथा अंतत:पिंड केंद्र में गिर जाता है|

3.किसी पिंड को निश्चित वृत्ताकार पथ में गति के लिए अभिकेन्द्रीय बल का मान,अपकेन्द्रिय बल के बराबर होना चाहिए|

अपकेन्द्रिय बल पर आधारित घटनाये:

1.मलाई निकालने वाली मशीन में क्रीम का निकालना

2.वाशिंग मशीन के द्वारा कपड़ो की धुलाई

घर्षण बल:-

सामान्यता:गति की अवस्था में दोनों विपरीत दिशा में गतिशील सतहों के मध्य गति के विपरीत दिशा में एक बल आरोपित होता है जो गति का विरोध करता है घर्षण बल कहलाता हैं|

घर्षण बल का मान सम्पर्क में आने वाली सतहों के क्षेत्रफल पर निर्भर नही करता है लेकिन सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है|

खुरदरी सतह के लिए घर्षण बल का मान अधिक पाया जाता है जबकि चिकनी सतह के लिए घर्षण बल का मान कम पाया जाता है|

सामान्यत घर्षण बल तीन प्रकार के पाये जाते है:-

1.स्थैतिक घर्षण बल :-

पिंड या वस्तु की स्थिर अवस्था में लगने वाले बल के मान को स्थैतिक घर्षण बल कहा जाता है इसका मान उच्चतम पाया जाता है|

2.गतिक घर्षण (सर्पी)बल:-

पिंड या वस्तु की गति के लिए तैयार अवस्था में पाया जाता है इस अवस्था में लगने वाले बक को गतिक घर्षण बल कहते है|

3.लोटनी घर्षण बल :-

पिंड के गतिशील होने पर विपरीत दिशा में लगने वाले बल को लोटनी घर्षण बल कहा जाता है|

पिंड या वस्तु की स्थिर अवस्था में आरोपित बल की तुलना में घर्षण बल का मान अधिक पाया जाता है|

गतिक या सर्पी अवस्था में पिंड पर आरोपित बल का मान घर्षण बल के समान पाया जाता है|तथा इसे साम्यावस्था की स्थिति कहते है|

लोटनी गति की अवस्था में आरोपित बल का मान घर्षण बल की तुलना में अधिक पाया जाता है|

Fs>Fk>Fr

यांत्रिक उर्जाएं:-

ये सामान्यत:दो प्रकार की पाई जाती है

1.गतिज ऊर्जा (K.E)-

पिंड की गति के कारण पाई जाने वाली कार्य करने की क्षमता को गतिज ऊर्जा कहा जाता हैं|

K.E =1/2 mv2                              (p=m X v)

K.E =m2v2/2m

K.E=p2/2m

2.स्थितिज ऊर्जा(P.E.):-

पिंड या वस्तु की स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाली कार्य करने की क्षमता को स्थितिज ऊर्जा कहा जाता है|

P.E.=mgh स्थिति मे परिवर्तन (ऊचाई)

ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार ना तो ऊर्जा को उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है अर्थात एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है |

अत:किसी भी पिंड या वस्तु की ऊर्जा का मान हमेशा नियत पाया जाता है|

यंत्र               ऊर्जा रूपान्तरण

डायनेमो (जनित्र)    यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में

विद्युत् मोटर        विद्युत् ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में

माइक्रोफोन         ध्वनि ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में

सैल               रासायनिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में

सोलर सैल          प्रकाश ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में

मोमबत्ती            रासायनिक ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में

विद्युत् बल्ब/ट्यूबलाईट विद्युत् ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में