प्रकाश (LIGHT)

प्रकाश

प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है,प्रकाश की प्रकृति द्वैत पाई जाती है|अर्थात प्रकाश तरंग व कण दोनों की तरह व्यवहार करता हैं|

नोट-प्रकाश की तरंग प्रकृति की व्याख्या हाइमन व हाइजेनबर्ग के द्वारा की गई|जबकि प्रकाश की कणीय प्रकृति की व्याख्या न्यूटन द्वारा की गई|

  • प्रकाश एक सीधी सरल रेखा में संचरित होता है|
  • प्रकाश एक प्रकार की अनुप्रस्थ यांत्रिक तरंगे है|
  • सूर्य का दृश्य प्रकाश सात रंगो से मिलकर बना होता हैयह सर्वप्रथम न्यूटन नामक वैज्ञानिक ने बताया|

नोट:-उष्मा का संचरण पदार्थ की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा होता है|

  1. ठोस पदार्थ-चालन विधि द्वारा
  2. द्रव पदार्थ –संवहन विधि द्वारा
  3. गैसीय पदार्थ-विकिरण विधि द्वारा

सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक विकिरणों के द्वारा लगभग 8 मिनट 20 सेकण्ड में पहुंचता है|जबकि सूर्य का प्रकाश चन्द्रमा से परावर्तित होकर पृथ्वी तक विकिरण विधियों द्वारा आने में 1.28 सेकण्ड का समय लेता है|

प्रकाश का सर्वाधिक वेग निर्वात में 3×108m/sec. पाया जाता हैं|क्योंकि निर्वात का अपवर्तनांक न्यूनतम व एक पाया जाता हैं|

प्रकाश का फोटोन सिद्धांत मैक्स प्लांक नामक वैज्ञानिक ने प्रतिपादित किया इनके अनुसार प्रकाश ऊर्जा के छोटे-चौटे बंडलों के रूप में संचरित होता हैं,जिन्हें क्वांटा कहा जाता हैं|तथा दृश्य प्रकाश के क्वांटा को फोटोन कहा जाता हैं|

प्रत्येक क्वांटा की ऊर्जा निश्चित पाई जाती है|जिसका मान क्वांटा की तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होता हैं|

E= ,E=h ,  c /

=hc/  ,E=hc /   {h=6.62×10-34 ,E=12400/A˚}

प्रकाश की तरंग सिद्धांत से सम्बन्धित घटनाएं

  1. प्रकाश का परावर्तन
  2. प्रकाश का अपवर्तन
  3. प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन
  4. प्रकाश का वर्ण विक्षेपण
  5. प्रकाश का व्यतिकरण
  6. प्रकाश का विवर्तन
  7. प्रकाश का ध्रुवण

प्रकाश की कणीय सिद्धांत से सम्बन्धित घटनाएं-

1.प्रकाश विद्युत प्रभाव 2.क्राम्पटन प्रभाव

प्रकाश का परावर्तन

सूर्य के प्रकाश को जब किसी अपारदर्शक सतह पर डाला जाता है तो प्रकाश का सतह से टकराकर लौटना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है|

प्रकाश के परावर्तन से सम्बन्धित दो नियम दिए गए|

1.आपतित किरण,अभिलम्ब व परावर्तित किरण तीनों एक ही तल में पाए जाते हैं|

2.आपतन कोण का मान परावर्तन कोण के मान के समान पाया जाता हैं|,i =

जैसे-मनुष्यों के द्वारा वस्तुओं को देखने की प्रक्रिया परावर्तन घटना से सम्बन्धित होती हैं|

नोट:-1.सामान्यत कोई भी वस्तु उस रंग की दिखलाई देती है जिस रंग को वह परावर्तित करती है|

2.जब कोई वस्तु सभी रंगो को अवशोषित कर लेती है अर्थात किसी भी प्रकाश किरण का परावर्तन नही करती है तो काली दिखलाई देती है|

3.यदि वस्तु प्रकाश के सभी रंगो का परावर्तन करती है अर्थात किसी भी रंग का अवशोषण नही करती है तो वस्तु श्वेत चमकीली दिखाई देती हैं|

प्रकाश का अपवर्तन

प्रकाश की किरणों का माध्यम परिवर्तन के कारण अपने वास्तविक मार्ग से विचलित हो जाना प्रकाश का अपवर्तन कहलाता हैं|

सामान्स्त: विचलन दो प्रकार के प्राप्त होते हैं|

1.जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम की ओर गतिशील होती है तो किरने अपने वास्तविक पथ से अभिलम्ब की ओर मुड जाती हैं|

नोट-सघन माध्यम-जिस माध्यम के लिए अपवर्तनांक का मान अधिक पाया जाता हैं|

विरल माध्यम-जिस माध्यम के लिए अपवर्तनांक का मान कम पाया जाता हैं|

2.यदि प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में गतिशील होती है तों वह अभिलम्ब से दूर हो जाती हैं|

अपवर्तन के नियम:-

1.आपतित किरण,अभिलम्ब व अपवर्तित किरण तीनों एक ही तल में उपस्थित पाये जाते हैं|

2.आपतित किरण की ज्या तथा अपवर्तित किरण की ज्या का अनुपात नियत पाया जाता है|तथा इस नियतांक मान को पदार्थ का अपवर्तनांक कहा जाता हैं|

प्रकाश के अपवर्तन से सम्बन्धित घटनाएं:-

1.आकाश में तारों का लगातार टिमटिमाते हुए दिखलाई देना|

2.पानी से भरे हुए गिलास के पेंदे में रखे सिक्के का अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर उठा हुआ दिखाई देना|

3.पानी से बहरे हुए गिलास में आंशिक रूप से डूबी हुई पेन्सिल /सीधी छड का मुडा हुआ दिखाई देना|

  1. सूर्य का उदय होने से पूर्व व अस्त होनें के पश्चात भी दिखाई देना|
  2. समुंद्रके पेंदे में स्थित मछली का अपनी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊपर उठा हुआ दिखाई देना|
  3. श्वेत प्रकाश को प्रिज्म में से गुजारने पर सात रंगो में विभाजन अपवर्तन की घटना के कारण होता हैं|

नोट:अपवर्तनांक-

प्रकाश की किरणों को अवरोधित करने की क्षमता को पदार्थ का अपवर्तनांक कहा जाता हैं|जिसका मान स्नेल के नियम से ज्ञात किया जाता हैं|

किसी भी पदार्थ के अपवर्तनांक का मान सामान्यत पदार्थ की प्रकृति व उसके तापमान पर निर्भर करता है|

तापमान का मान बढने पर पदार्थ का अपवर्तनांक कम हो जाता है|अपवर्तनांक एक इकाई रहित राशि हैं|

यदि किसी माध्यम में प्रकाश का वेग ज्ञात हो तो उस माध्यम का अपवर्तनांक ज्ञात किया जा सकता है-

प्रकाश का माध्यम में वेग=निर्वात में प्रकाश का वेग/पदार्थ का अपवर्तनांक {U=C/ , =c/u

विभिन्न प्रकार के माध्यमों में प्रकाश का वेग माध्यम के अपवर्तनांक के मान पर निर्भर करता हैं|

सघन माध्यमों में प्रकाश का वेग कम पाया जाता है जबकि विरल माध्यमों में प्रकाश का वेग अधिक पाया जाता हैं|

पूर्ण आंतरिक परावर्तन:-

प्रकाश की यह घटना अपवर्तन की एक विशिष्ट अवस्था है इसको घटित होने के लिए निम्न दो शर्तो का पालन होना चाहिए|

1.प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में गतिशील होनी चाहिए

2.आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए|{}

पूर्ण आंतरिक परावर्तन से सम्बन्धित घटनाएं:-

1.गर्मी के दिनों में रेगिस्तान में मृग मरीचिका का बनना|

2.हीरे का चमकीला दिखाई देना (2.42 सर्वाधिक अपवर्तनांक)

3.सूर्य उदय व अस्त होते समय कुछ लालिमा का दिखलाई देना|

4.विद्युत बल्बों का चमकना|

5.सोनोग्राफी व एक्स रे चित्रों का निर्माण|

6.किसी जल से भरे हुए स्थान में काले रंग की वस्तुओं को रख देने पर वो चमकीली दिखाई देती है|

7.शीशे के चटकने पर दरारों का स्पष्ट चमकते हुए दिखाई देना|

वर्ण विक्षेपण:-

वर्ण विक्षेपण की घटना में अपवर्तन की घटना घटित होती है|जब किसी निकाल प्रिज्म में से सूर्य के श्वेत प्रकाश को गुजारा जाता है तो वह श्वेत प्रकाश अपने वास्तविक सात मूल रंगो में विभेदित हो जाता है इस परिघटना को वर्ण विक्षेपण कहते है|तथा रंगो से प्राप्त चित्रों को वर्ण स्पेक्ट्रम कहा जाता हैं|

सर्वाधिक वर्ण विक्षेपण बैंगनी रंग का पाया जाता है जबकि न्यूनतम वर्ण विक्षेपण लाल रंग का पाया जाता हैं|

रंगो का समूहन:-

सामान्यत:रंग तीन प्रकार के पाये जाते है-1.प्राथमिक रंग  2.द्वितीयक/गौण रंग  3.सम्पूरक रंग

1.प्राथमिक रंग-वे रंग जिनका निर्माण अन्य रंगो के मिश्रण से नहीं किया जा सकता अर्थात जिनका प्रकृति में स्वतंत्र अस्तित्त्व पाया जाता है|इनकी संख्या सामान्यत: तीन मानी गई हैं|

R.B.G.=Red,Blue,Green

जैसे-रंगीन टेलीविजन में तोनो प्राथमिक रंग उपस्थित होते हैं|

2.द्वितीयक रंग:-वे रंग जिनका निर्माण प्राथमिक रंगो के मिश्रण से होता हैं द्वितीयक रंग कहलाते हैं|इनकी संख्या भी 3 मानी गई हैं|-Megenta,Peacock blue,Yellow

3.सम्पूरक रंग-वे रंग जीके मिश्रण से सफेद रंग का निर्माण होता है उस समय वे सम्पूरक रंग कहलाते हैं|

Red +Blue=Megenta  ,Blue+Green =Peacock blue ,Green +Red=Yellow, Red +peacock blue =White ,Blue+Yellow=White ,Green+Megenta=White ,Red+Blue+Green=White ,                       Megenta+yellow+peacock blue=White

Rainbow (इन्द्रधनुष)-

इन्द्रधनुष का बनना वर्ण विक्षेपण (अपवर्तन)घटना का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है|

-इन्द्रधनुष वर्षा के तुरंत पश्चात सूर्य के विपरीत दिशा में दिखलाई देता है|सामान्यत इन्द्रधनुष दो प्रकार के पाये जाते है|

1.प्राथमिक इन्द्रधनुष-यह इन्द्रधनुष वर्षा के तुरंत पश्चात बनता है तथा इस इन्द्रधनुष के निर्माण में बाहर की तरफ लाल रंग व अंदर की तरफ बैंगनी रंग उपस्थित होता है|अंदर की तरफ उपस्थित बैंगनी रंग मानव की आँख पर लगभग 40.8˚के कोण का निर्माण करता है जबकि बाहर की तरफ स्थित लाल रंग मनुष्य की आँख पर 42.8˚के कोण का निर्माण करता है|

2.द्वितीयक इन्द्रधनुष-यह वर्षा के कुछ समय पश्चात बनता है यह प्राथमिक इन्द्रधनुष की तुलना में धुंधला व अस्पष्ट पाया जाता हैं|

इस प्रकार के इन्द्रधनुष में बाहर की तरफ बैंगनी रंग तथा अंदर की तरफ लाल रंग पाया जाता हैं|

बाहर की तरफ उपस्थित बैगनी रंग मनुष्य की आँख पर 50.8˚ का कोण बनाता है जबकि अंदर की तरफ स्थित लाल रंग 54. 52˚के कोण का निर्माण करता हैं|