परमाणु भट्टी

नियंत्रित नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया-

वह नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया सिसके अंतर्गत उत्सर्जित होने वाले तीन न्युट्रोन कणों में से दो न्युट्रोन कणों को किसी भी प्रक्रिया द्वारा अवशोषित करा लिया जाता है तथा शेष बचा एक न्युट्रोन अभिक्रिया को सतत रूप से आगे गतिशील रखता हैं |

92U23556Ba141 +36Kr92 +30n1+200Mev

जैसे-परमाणु भट्टी या नाभिकीय रिएक्टर नियंत्रित नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया पर आधारित पाये जाते हैं|

नाभिकीय/परमाणु भट्टी-वह युक्ति जिसके द्वारा नाभिकीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता हैं| नाभिकीय भट्टी कहलाती हैं|

विश्व में सर्वप्रथम परमाणु भट्टी का निर्माण अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के अंतर्गत 1842 में प्रोफेसर एनरीको फर्मी के निर्देशन में किया गया|जबकि भारत की प्रथम परमाणु भट्टी ट्राम्बे (महाराष्ट्र)के अंतर्गत डा.होमी जहाँगीर भाभा के निर्देशन में बनकर तैयार हुई|जिसे अप्सरा नाम दिया गया|

भारत में 5 परमाणु भट्टी है जो क्रमश:है-अप्सरा,पूर्णिमा,जर्लिना,रुसी,साइरस |

सामान्यत: नाभिकीय भट्टियों में निम्नलिखित तीन भाग पाये जाते है-

1.ईधन कक्ष- नाभिकीय भट्टियों में ईधन के रूप में 92U23594Pu239 का उपयोग किया जाता हैं|लेकिन मुख्य रूप से भट्टियों में 92U235 का ही उपयोग किया जाता है|

2.नियंत्रक कक्ष-इस कक्ष के अंतर्गत न्युट्रोन कणों को अवशोषित करने वाले पदार्थ प्रयुक्त किये जाते है|इस कक्ष में अवशोषक पदार्थ के रूप में कैडमियम,बोरान ,जिर्कोनियम की छडो का उपयोग किया जाता हैं|

3.मंदक कक्ष-इस कक्ष के अंतर्गत न्युट्रोन की गति को कम करने वाले पदार्थ प्रयुक्त किये जाते है|मंदक के रूप में भारी जल (D2O) व कार्बन ग्रेफाईट की छडो का उपयोग किया जाता हैं|

नोट:-मंदक के रूप में प्रयुक्त करने के आधार पर नाभिकीय रिएक्टर दो प्रकार के पाये जाते है-

a.स्विमिंग पुल रिएक्टर-वे भट्टियां जिनमे मंदक के रूप में भारी जल का उपयोग किया जाता है|

b.परमाणु पाइल रिएक्टर- वे परमाणु भट्टियां जिनके अंतर्गत मंदक के रूप में कार्बन ग्रेफाईट छडो का उपयोग किया जाता है|

नाभिकीय सलंयन:-

दो या दो से अधिक हल्के नाभिक जुडकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते है तो इस प्रकार की अभिक्रिया को नाभिकीय सलंयन कहा जाता है|

नाभिकीय सलंयन अभिक्रिया को सम्पन्न होने के लिए उच्च ताप (108K)व उच्च दाब की आवश्यकता होती है|

प्रकृति में पृथ्वी पर नाभिकीय सलंयन अभिक्रिया को सम्पन्न करवाने के लिए पहले नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया सम्पन्न कराई जाती है

प्राकृतिक रूप से स्वत: नाभिकीय सलंयन अभिक्रिया सूर्य के केन्द्रीय भाग में सम्पन्न होती है|

1H1+1H32He4+0n1+25.7Mev

-सूर्य की उष्मा व प्रकाश की उत्पत्ति का कारण नाभिकीय सलयन अभिक्रिया है|

-सूर्य पर सर्वाधिक मात्रा में हाइड्रोजन गैस उपस्थित होती है

-अणु बम या हाइड्रोजन बम नाभिकीय सलयन अभिक्रिया पर आधारित है|

-नाभिकीय सलयन अभिक्रिया पर आधारित नाभिकीय भट्टियो को टोकामक कहा जाता है,तथा भारत का प्रथम टोकामक आदित्य नाम से जाना जाता हैं|