गुरुत्वाकर्षण बल

पृथ्वी पर सामान्यत: 4 मूल बल पाये जाते हैं|

1.गुरुत्वाकर्षण बल
2.स्थिर वैद्युत आकर्षण बल
3.नाभिकीय आकर्षण बल
4. चुम्बकीय आकर्षण बल

उपरोक्त चारों मूल बलों में से सबसे प्रबल नाभिकीय बल को जबकि सबसे दुर्बल गुरुत्वाकर्षण बल को माना जाता है|

गुरुत्वाकर्षण बल आरोपित होने के लिए न्यूनतम दो पिंडो की आवश्यकता होती है|

  • किन्ही दो असमान/समान द्रव्यमान वाले पिंडो के मध्य लगने वाले बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है|

इस बल का मान दोनों पिंडो के द्रव्यमानो के गुणनफल के समानुपाती व बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती पाया जाता हैं|

Fg=G m1m2/r2

नोट:

किसी एकल पिंड पर पृथ्वी के द्वारा आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल का मान उस पिंड के भार के समान पाया जाता है

गुरुत्त्वीय त्वरण:

mg=GMm/ r2g=GM/ r2

  • पृथ्वी की सतह से h ऊचाई गुरुत्वीय त्वरण का मान कम हो जाता हैं|

g=GM/(r+h)2

  • पृथ्वी की सतह से अंदर की ओर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान कम होता जाता है क्योकिं पृथ्वी की त्रिज्या का मान हमेशा नियत रहता है जबकि सतहसे गहराई की ओर जाने पर पिंड की सतह से दूरी का मान बढ़ता जाता हैं|

g=GM/(r+d)2

  • गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी की सतह पर भूमध्य रेखा पर न्यूनतम व ध्रुवो पर अधिकतम पाया जाता हैं|क्योकि केंद्र से भूमध्य रेखा के मध्य की दूरी का मान अधिकतम जबकि केंद्र से ध्रुवो के मध्य की दूरी का मान भूमध्य रेखा की तुलना में कम पाया जाता हैं|
  • यदि कोई पिंड निर्वात के अंतर्गत गतिशील होता है तो वहां पर गुरुत्वाकर्षण बल का मान शून्य पाया जाता है|
  • यदि दी भिन्न भिन्न द्रव्यमान वाले पिंड निर्वात के अंतर्गत समान ऊँचाई से छोड़े जाए तो पृथ्वी की सतह तक पहुंचने में दोनों को समान समय लगेगा|
  • जबकि वायुमंडल की उपस्थिति में अधिक द्रव्यमान वाले पिंड पर गुरुत्वाकर्षण बल का मान अधिक हिने के कारण पृथ्वी की सत पर पहले पहुंचेगा|अर्थात अल्प समय लगेगा|

नोट:

  • पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का मान अधिकतम सतह पर पाया जाता है|सतह से ऊपर या नीचे जाने पर कम होता जाता हैं|