क्या है अल-नीनो

  •   अल-नीनो जलवायु तंत्र की एक ऐसी बडी घटना है जो मूल रूप से घटती तो भूमध्य रेखा के आसपास प्रशांत क्षेत्र में है पर पृथ्वी के लगभग सभी जल-वायवीय चक्रों को प्रभावित करती है। कहीं तेज  बारिश होती है तो कहीं सूखा पडता है।
  •  प्रशांत महासागर के केन्द्र और पूर्वी भाग में पानी का औसत सतही तापमान कुछ वर्ष के अंतराल पर असामान्य रूप से बढ जाता है। लगभग 120 डिग्री पूर्वी देशान्तर के आसपास इंडोनेशियाई द्वीप क्षेत्र से लेकर 80 डिग्री पश्चिमी देशान्तर यानी मेक्सिकों और दक्षिण अमरीकी पेरू तट तक, सम्पूर्ण उष्ण क्षेत्रीय प्रशांत महासागर में यह क्रिया होती है।
  •  एक निश्चित सीमा से अधिक तापमान बढने पर अल-नीनो की स्थिति बनती है और वहाॅं सबसे गर्म समुद्री हिस्सा पूरब की ओर खिसक जाता है। समुद्र तल के 8 से 24 किमी. ऊपर बहने वाली जेट स्ट्रीम प्रभावित होती है और पश्चिम अमरीकी तट पर भयंकर तूफान आते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका पृथ्वी के समूचे जलवायु तंत्र पर असर पडता है।
  •  पूर्वी प्रशांत महासागर और पष्चिमी प्रशांत महासागर के तापमान को ओशनिक नीनो इंडेक्स से मापा जाता है। पश्चिम की तुलना में पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान +.5 या इससे अधिक होने पर अल नीनो की स्थिति मानी जाती है और अगर इस इंडेक्स के अनुसार यह तापमान -.5 हो जाता है तो ला नीनो की स्थिति पैदा हो जाती है। भारत व कुछ अन्य इलाकों को छोडकर शेष विश्व में इसका प्रभाव अक्टूबर से मार्च के बीच होता है।